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Bharat Tiwari Encounter: सवालों के घेरे में आए जगदीशपुर SDM संजीत कुमार कौन? पहले प्रयास में BPSC क्रैक कर बने थे अफसर

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार के पूर्व DGP अभयानंद ने घटनास्थल पर जगदीशपुर SDM संजीत कुमार की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं। संजीत कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में BPSC की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली थी। जानिए कौन हैं संजीत कुमार।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 30, 2026

bharat tiwari encounter case

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सवालों के घेरे में जगदीशपुर SDM

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर जगदीशपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) संजीत कुमार सवालों के घेरे में आ गए हैं। भरत तिवारी की मां ने संजीत कुमार पर 17 जून को हुई इस पूरी घटना की साज़िश रचने का आरोप लगाया है। इस बीच, बिहार के पूर्व DGP अभयानंद ने भी इस एनकाउंटर के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं, खासकर घटना स्थल पर जगदीशपुर के SDM संजीत कुमार की मौजूदगी पर उंगली उठाई है।

कौन हैं संजीत कुमार?

भरत तिवारी एनकाउंटर केस विवाद के केंद्र में आए जगदीशपुर के मौजूदा SDM संजीत कुमार का प्रशासनिक करियर प्रेरणादायक और शानदार रहा है। वह बिहार के मधेपुरा ज़िले के गम्हरिया गांव के रहने वाले हैं। संजीत कुमार एक साधारण परिवार से आते हैं। वह शंभू भगत और ललिता देवी की तीन संतानों में सबसे बड़े हैं।

पहले ही प्रयास में सफलता

अपनी काबिलियत साबित करते हुए, संजीत कुमार ने पहले ही प्रयास में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास कर ली थी। फरवरी 2019 में घोषित 60वीं, 61वीं और 62वीं BPSC परीक्षाओं के संयुक्त नतीजों में उन्होंने पूरे राज्य में 60वीं रैंक हासिल की। ​​बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) में अधिकारी के तौर पर चुने जाने के बाद, उनकी पहली पोस्टिंग बेगूसराय ज़िले में डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुई। वहां कुछ समय तक काम करने के बाद, उन्हें भोजपुर ज़िले के जगदीशपुर में सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर प्रमोट किया गया।

SDM घटना स्थल पर क्यों गए? अभयानंद का सवाल

पुलिसिंग में अपने लंबे अनुभव के आधार पर बिहार के पूर्व DGP अभयानंद ने इस कथित एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ऑपरेशन आम तौर पर दो तरह के होते हैं। एक में कानून-व्यवस्था बनाए रखना शामिल होता है, जहां भीड़ को संभालने या तनावपूर्ण स्थितियों को शांत करने के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मी दोनों तैनात किए जाते हैं। दूसरे तरह के ऑपरेशन में अपराधियों को पकड़ने के लिए तलाशी और जब्ती की कार्रवाई शामिल होती है। भरत तिवारी का मामला इसी दूसरी श्रेणी में आता था, क्योंकि पुलिस उन्हें कथित तौर पर अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी।

अभयानंद ने यह बात उठाई कि तलाशी और जब्ती (search-and-seizure) की कार्रवाई के लिए SDM रैंक के अधिकारी की मौजूदगी जरूरी नहीं है। ऐसी कार्रवाई आमतौर पर इंस्पेक्टर या DSP रैंक के अधिकारी की अगुवाई में पुलिस करती है। SDM की मौजूदगी तभी होती जब DM और SP ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई संयुक्त आदेश जारी किया हो। अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो SDM वहां क्या कर रहे थे? किसी अपराध से जुड़ी रेड से उनका क्या लेना-देना था?

भरत तिवारी एनकाउंटर का मटेरियल था ही नहीं - अभयानंद

ज़िला प्रशासन और पुलिस की थ्योरी पर पूर्व DGP ने कहा कि जब SP एनकाउंटर करने का सोच-समझकर फ़ैसला लेते हैं, तो अपराधी के बैकग्राउंड की जांच की जाती है ताकि यह पता चल सके कि वह कोई जघन्य या खूंखार अपराधी है या नहीं। भरत तिवारी के मामले में ऐसा कोई बैकग्राउंड या आपराधिक इतिहास नहीं था और न ही उनके खिलाफ कोई चार्जशीट थी। वह बस सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे। तो फिर, उन्हें ही इस कार्रवाई के लिए क्यों चुना गया?

मां ने भी SDM पर आरोप लगाए

इस कथित एनकाउंटर की जांच के लिए पटना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग बनाया गया है। जब जस्टिस विनोद सिन्हा और उनकी टीम जांच के लिए 25 जून को बिलौटी गांव पहुंची, तो भरत तिवारी की मन ने उनसे कहा कि उनके बेटे की हत्या के ज़िम्मेदार लोगों को फांसी होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि SDM उनके बेटे की हत्या में शामिल थे।

एनकाउंटर के बाद से दफ्तर में सिमटे SDM, सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी

एनकाउंटर के बाद से जगदीशपुर SDM ऑफिस का माहौल बदला हुआ है। चर्चा है कि संजीत कुमार की सक्रियता न के बराबर हो गई है। वह नियमित रूप से ऑफिस आ रहे हैं और सिर्फ जरूरी विभागीय दस्तावेजों और फ़ाइलों पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने आम जनता, शिकायतकर्ताओं और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों से मिलना-जुलना बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, संजीत कुमार पहले मुहर्रम जैसे बड़े और संवेदनशील त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख के लिए सड़कों पर सक्रिय रहते थे। हालांकि, इस बार शुक्रवार को ताजिया जुलूस के दौरान पूरे सब-डिविजन में वे कहीं भी नजर नहीं आए।