
राजद सांसद सुधाकर सिंह (फोटो- sudhakar singh FB)
RJD on Bharat Tiwari Encounter: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हमला बोला है। सिंह ने कहा कि सम्राट चौधरी पर खुद कभी गंभीर आपराधिक आरोप लगे थे। अगर पिछली सरकारों ने भी मौजूदा सरकार जैसी एनकाउंटर पॉलिसी अपनाई होती, तो आज वे मुख्यमंत्री के पद पर नहीं होते। इसके अलावा RJD सांसद ने पटना में तैनात पुलिस के आला अधिकारियों पर इस मामले में शामिल होने का आरोप लगाया और इस घटना को पुलिस द्वारा पहले से सोची-समझी हत्या करार दिया।
सुधाकर सिंह ने कहा कि सत्तापक्ष के लोग भले ही लालू प्रसाद यादव को खलनायक के रूप में पेश करने की कोशिश करें, लेकिन लालू जी ने हमेशा कानून का सम्मान किया। सुधाकर सिंह ने कहा, "लालू जी कुछ लोगों के लिए इसलिए खलनायक हैं क्योंकि उन्होंने (सम्राट चौधरी का) एनकाउंटर नहीं कराया था। अगर तब उनका एनकाउंटर हो गया होता, तो क्या आज वह मुख्यमंत्री का पद देख पाते? उन पर तो हत्या का आरोप था, अपहरण का आरोप था, रंगदारी वसूलने का आरोप था। ये तमाम आरोप उन पर थे, लेकिन लालू जी ने कानून के दायरे में काम किया। अगर तब पुलिस सीधे गोली मार देती, तो आज वे मुख्यमंत्री न बने होते।"
लालू परिवार की संपत्तियों को लेकर बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार करते हुए सांसद ने कहा कि केंद्र और बिहार में पिछले 30 सालों में कई बार बीजेपी की सरकार रही, लेकिन वे आज तक लालू जी की कुल संपत्ति का पता नहीं लगा पाए। सुधाकर सिंह ने कहा, "आप पिछले 30 साल से यही तो काम कर रहे हैं। इतने सालों में आपकी सरकारें रहीं, फिर भी आप कुछ पता नहीं कर पाए। आप सरकार चलाने लायक नहीं हैं। आप बेहद अकर्मण्य और निकम्मे लोग हैं।"
भरत तिवारी एनकाउंटर की कहानी को खारिज करते हुए सुधाकर सिंह ने पटना एसटीएफ (STF) के आला अधिकारी पर मर्डर की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मैं पूरी जिम्मेदारी और दावे के साथ कह रहा हूं कि वहां का लोकल दरोगा और स्थानीय पुलिस इस घटना में शामिल नहीं है। वे तो सिर्फ दर्शक बनकर खड़े थे। इस बेगुनाह लड़के की दिनदहाड़े हत्या करने के लिए पटना से एसटीएफ के डीजी कुंदन कृष्णन ने विशेष टीम को वहां भेजा था। मारने वाले लोग पटना से गए थे।"
सुधाकर सिंह ने आगे कहा कि भरत तिवारी का गुनाह सिर्फ इतना था कि उसके पास एक अवैध पिस्तौल या कट्टा था। कानून के मुताबिक, अवैध हथियार रखने पर अधिकतम 2 साल की सजा का प्रावधान है। पुलिस का काम उसे गिरफ्तार कर जेल भेजना था, न कि सीधे मौत की सजा सुना देना। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या हर छोटे-बड़े गुनाह की सजा सिर्फ एनकाउंटर होगी? कुंदन कृष्णन को किसी की हत्या कराने का अधिकार किसने दे दिया? ऐसे अधिकारियों को तुरंत जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए।"
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा घोषित और रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में शुरू हुई न्यायिक जांच को सुधाकर सिंह ने पूरी तरह ढोंग बताया। उन्होंने सेपरेशन ऑफ पावर्स का हवाला देते हुए कहा कि जब खुद मुख्यमंत्री मंचों से खुलेआम चिल्ला रहे हैं कि हम एनकाउंटर करेंगे, किसी को छोड़ेंगे नहीं, तो उनके ही अधीन काम करने वाली कोई भी कैबिनेट कमिटी उनके खिलाफ जांच कैसे कर सकती है?
सांसद ने कहा, "यह एक नकली जांच कमीशन है जिसे कैबिनेट के जरिए सिर्फ मामले को रफा-दफा करने के लिए बनाया गया है। यह जांच एजेंसी कभी भी मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और डीजी के कार्यकलापों की जांच नहीं कर पाएगी। अंत में यह कमिटी लोकल लेवल के एक-दो दरोगा या सिपाहियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारियों और असली गुनहगारों को बचा लेगी। यह सरकार की सोची-समझी लीपापोती है।"
सुधाकर सिंह ने सरकार की इस कार्रवाई को तानाशाही से भी ऊपर बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक सरकार नहीं है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्षता के लिए पटना हाई कोर्ट के सिटिंग जज के नेतृत्व में एक स्वतंत्र आयोग का गठन होना चाहिए, जो न सिर्फ भरत तिवारी बल्कि पिछले तीन महीनों में बिहार में हुए सभी कथित एनकाउंटरों की गहराई से जांच करे।
Published on:
25 Jun 2026 01:50 pm
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