
प्रशांत किशोर (फ़ोटो- IANS)
Bihar MLC Election: बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची पर तीखा हमला बोला है। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि RJD ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ पैसे के आधार पर टिकट बांटे हैं।
RJD द्वारा जारी छह उम्मीदवारों की सूची पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सूची RJD की कम और किसी दूसरी पार्टी की ज्यादा लग रही है, कुछ उम्मीदवार जदयू से आए हैं, कुछ कांग्रेस से और कुछ तो जन सुराज छोड़कर भी गए हैं। टिकट उसे मिला है जिसने सबसे ज्यादा पैसे दिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि RJD कार्यकर्ता देख रहे हैं कि टिकट किसे मिला और पार्टी के भीतर इस मामले पर चर्चा हो रही है। उन्होंने लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के बयान का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी उम्मीदवारों की सूची पर सवाल उठाए थे।
RJD उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि चुनाव से ठीक पहले शामिल होने वाले अवसरवादियों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि दशकों से पार्टी और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार करना आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी कार्यकर्ताओं के प्रति RJD की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला न केवल लालू के वफादार समर्थकों के साथ विश्वासघात है, बल्कि लालू जी की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती के लिए भी एक बड़ा झटका है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज पार्टी भी जल्द ही बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। उन्होंने बताया कि जन सुराज की सूची अगले दो-तीन दिनों में जारी कर दी जाएगी। पार्टी पहले ही सभी आठ MLC सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जाहिर कर चुकी है। अब तक, RJD ने आठ में से छह सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है।
बख्तियारपुर का नाम बदलकर 'नीतीशपुर' करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह एक और स्पष्ट संकेत है कि बिहार में अब भाजपा के प्रभाव वाली सरकार बन चुकी है, जहां विकास पर चर्चा कम और जगहों के नाम बदलने पर चर्चा ज्यादा होगी। उन्होंने आगे कहा कि बिहार बाढ़ के गंभीर संकट से जूझ रहा है। फिर भी, ऐसे मुश्किल समय में बाढ़ के स्थायी समाधान पर चर्चा करने के बजाय शहरों के नाम बदलने पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं, उनकी सोच क्या है और वे जनता की पीड़ा और कल्याण के प्रति कितने लापरवाह हैं।
Updated on:
13 Sept 2026 08:54 pm
Published on:
13 Sept 2026 08:53 pm
