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IAS से लेकर ठेकेदार तक, बिहार टेंडर घोटाला के 7 आरोपी कौन? जिनके खिलाफ विजिलेंस को मिले सबूत

Rishu Shree Tender Scam: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में वरिष्ठ आईएएस संजीव हंस, पूर्व वित्त सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी समेत सात आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, टेंडर मैनेजमेंट और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 25, 2026

rishu shree bihar tender scam

ठेकेदार रिशु श्री और IAS संजीव हंस

Bihar Tender Scam: बिहार टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की है। विजिलेंस ने कुल सात नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और वित्त विभाग के तत्कालीन सचिव मुमुक्षु चौधरी शामिल हैं। विजिलेंस की जांच से पता चला है कि ठेकेदार रिशु श्री ने सरकारी विभागों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अधिकारियों को 2% से 3.5% तक का तय कैश कमीशन दिया और बदले में करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर हासिल किए। आइए, जानते हैं कौन हैं वो 7 आरोपी।

मास्टरमाइंड और मुख्य ठेकेदार रिशु श्री

ठेकेदार रिशु श्री इस पूरे घोटाले का केंद्र बिंदु और सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है। पिछले 7-8 वर्षों में रिशु श्री ने बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों के साथ काम करके M/s मातृस्वा कंस्ट्रक्शन और मातृस्वा इंफ्रा जैसी कंपनियों के जरिए गैर-कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये कमाए। उसने जल संसाधन, भवन निर्माण, शहरी विकास और BUIDCO जैसे विभागों के अधिकारियों को भारी रिश्वत देकर टेंडर हासिल किए।

विजिलेंस को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि रिशु ने बिल पास कराने के लिए 2% से 3.5% और टेंडर हासिल करने के लिए 5% से 7% तक कमीशन दिया। उस पर फर्जी बिलों का इस्तेमाल करके बड़ी मात्रा में कैश निकालने और सरकारी दस्तावेज चुराने का आरोप है। उसने इस गैर-कानूनी कमाई का इस्तेमाल दिल्ली-NCR, हरियाणा और पटना में बड़ी मात्रा में बेनामी चल-अचल संपत्ति और कीमती ज़मीन खरीदने में किया। रिशु श्री अभी गिरफ्तार है।

IAS संजीव हंस

बिहार कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस पर आरोप है कि जल संसाधन विभाग के सचिव के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रिशु श्री को गलत तरीके से टेंडर दिए। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) के ADG पंकज कुमार दरद ने बताया कि रिशु श्री की कंपनी के डायरेक्टर पवन कुमार ने अपने बयान में माना है कि उन्होंने संजीव हंस को 67 लाख की सीधी नकद रिश्वत दी थी। इसके अलावा कमलकांत गुप्ता नाम के व्यक्ति के जरिए हंस के बैंक खाते में 50 लाख ट्रांसफर करने के सबूत भी मिले हैं।

इसके अलावा, संजीव हंस पर बिरपुर में कोसी बेसिन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत कोसी बैराज सर्कल में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने की टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी करने का आरोप है। रिशु, हंस के प्रभाव का इस्तेमाल करके टेंडर हासिल करता था और अपनी गैर-कानूनी कमाई को सफेद करता था। 9 जनवरी 2023 को पटना के रूपसपुर पुलिस स्टेशन में हंस के खिलाफ रेप और ब्लैकमेल का आरोप लगाते हुए FIR (18/2023) दर्ज की गई, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। फिलहाल IAS संजीव हंस फरार हैं और विजिलेंस विभाग उन्हें पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रहा है।

मुमुक्षु कुमार चौधरी, तत्कालीन वित्त विभाग सचिव

तत्कालीन वित्त विभाग सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी इस सिंडिकेट के दूसरे सबसे प्रभावशाली अधिकारी हैं। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, खासकर मनचाही पोस्टिंग पाने और रिश्वत लेने के मामले में। आरोप है कि चौधरी ने सहरसा और सीतामढ़ी के नगर आयुक्त (म्युनिसिपल कमिश्नर) के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान रिशु श्री को काफी फायदा पहुंचाया। रिशु श्री ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके चौधरी की सीतामढ़ी के नगर आयुक्त के तौर पर नियुक्ति करवाई थी और बदले में उन्हें मोटा वित्तीय कमीशन मिला था।

सहरसा में मुमुक्षु के कार्यकाल के दौरान रिशु श्री ने शहरी विकास परियोजना के लिए लगभग 10 करोड़ का टेंडर गैर-कानूनी तरीके से हासिल किया। इसके बदले मुमुक्षु चौधरी को भारी रिश्वत दी गई। रिशु श्री के मोबाइल फोन से मिली व्हाट्सएप चैट और टैली अकाउंटिंग लेजर में उनका नाम और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का जिक्र है। जांच एजेंसियों ने उनसे भ्रष्टाचार से कमाई गई 2 करोड़ की नकदी भी बरामद की। SVU ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

रिटायर्ड चीफ इंजीनियर तरणी दास

भवन निर्माण विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर तरणी दास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि वे नियमित रूप से रिशु श्री के सिंडिकेट से कमीशन लेते थे और बदले में सरकारी टेंडर दिलाने और बिल पास कराने में मदद करते थे। पद पर रहते हुए दास ने भवन निर्माण विभाग में रिशु श्री को गैर-कानूनी तरीके से दस से ज़्यादा सरकारी टेंडर दिए।

इन टेंडरों को पास करने और प्रोजेक्ट की लागत का अनुमान बढ़ाकर बताने के बदले, दास को कुल टेंडर वैल्यू का 2-3 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के तौर पर मिलता था। 27 मार्च 2025 को ED ने उनके ठिकानों पर बड़ी रेड की और 8.57 करोड़ नकद बरामद किए थे। इसके बाद SVU ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह

शहरी विकास और आवास विभाग के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह पर ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन प्रोजेक्ट के लिए रिशु श्री से अलग से 1 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप है। बिल आसानी से पास कराने के लिए रिशु उन्हें नियमित रूप से नकद कमीशन देते थे। विजिलेंस विभाग को इस 1 प्रतिशत कमीशन डील की पूरी जानकारी रिशु की वॉट्सऐप चैट से मिली। यह योजना ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन के काम और अन्य टेंडर कॉन्ट्रैक्ट्स को रिशु श्री को दिलाने के लिए बनाई गई थी। जब ED ने इस मामले में उमेश सिंह के ठिकानों पर रेड की थी, तो उनके घर से 1 करोड़ नकद बरामद हुआ था। उमेश कुमार सिंह अभी गिरफ्तार हैं।

मातृस्वा इन्फ्रा के डायरेक्टर पवन कुमार

पवन कुमार M/s मातृस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं और कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री के करीबी सहयोगी हैं। चार्जशीट में उसे रिशु श्री के सिंडिकेट के लिए 'मनी कैरियर' (पैसा पहुंचाने वाला) बताया गया है। पवन कुमार ने खुद माना कि उसने रिशु श्री के कहने पर IAS अधिकारी संजीव हंस को पैसे पहुंचाए थे। वह एक पेट्रोल पंप से फर्जी बिलों का इस्तेमाल करके बड़ी मात्रा में नकद पैसे निकालने का काम करता था, जिसका इस्तेमाल बाद में रिश्वत देने के लिए किया जाता था।

16 जुलाई 2024 को मातृस्वा इंफ्रा के ऑफिस पर ED की रेड के दौरान एक डिजिटल एक्सेल शीट मिली। इस शीट में 'S सर' को किए गए 67 लाख के पेमेंट का ब्यौरा था। कड़ी पूछताछ के दौरान पवन ने कबूल किया कि 'S सर' कोई और नहीं, बल्कि उस समय के सेक्रेटरी संजीव हंस थे। पवन कुमार अभी फरार है।

संतोष कुमार, मातृस्वा कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर

संतोष कुमार M/s मातृस्वा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं और 2010 से रिशु श्री के वफादार कर्मचारी रहे हैं। पवन कुमार की तरह ही, उनका काम भी जल संसाधन विभाग, BUIDCO और भवन निर्माण विभाग के सीनियर अधिकारियों और इंजीनियरों तक कमीशन का पैसा समय पर और सुरक्षित रूप से पहुंचाना था। रिशु ने अपने साम्राज्य को छिपाने के लिए उन्हें मातृस्वा कंस्ट्रक्शन और अर्बन एनवायर्नमेंटल सॉल्यूशंस जैसी डमी (शेल) कंपनियों में डायरेक्टर बनाया था।

सरकारी टेंडर इन्हीं डमी कंपनियों के नाम पर लिए जाते थे। संतोष पर अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए फर्जी और जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाने, साथ ही बैंकों से गैर-कानूनी तरीके से नकद पैसे निकालने के गंभीर आरोप हैं। संतोष कुमार को SVU पहले ही गिरफ़्तार कर जेल भेज चुकी है।

5 गिरफ्तार, 2 अभी भी फरार

SVU के ADG पंकज कुमार दरद ने बताया है कि जांच के बाद इन सात लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सबूत मिले हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर कोर्ट में शुरुआती चार्जशीट दाखिल की गई है। इन सात आरोपियों में से पांच अभी जेल में हैं। स्पेशल विजिलेंस टीमें अब इस बड़े टेंडर घोटाले में शामिल फरार IAS अधिकारी संजीव हंस और कॉन्ट्रैक्टर के मुख्य सहयोगी पवन कुमार के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।