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बिहार टेंडर घोटाले में 4000 पेज की चार्जशीट दाखिल, ADG बोले- कमीशन लेकर अफसरों को मैनेज करता था रिशु श्री

Rishu Shri Tender Scam: बिहार टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने रिशु श्री, आईएएस संजीव हंस समेत सात आरोपियों के खिलाफ 4,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी का दावा है कि टेंडर मैनेजमेंट, कमीशनखोरी और अधिकारियों से सांठगांठ के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 24, 2026

Bihar IAS TRansfer Tender Scam

IPS पंकज दराद

Bihar Tender scam: बिहार टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम ने स्पेशल कोर्ट में 4,000 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सचिव IAS संजीव हंस और ठेकेदार रिशु श्री शामिल हैं। इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। SVU के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) पंकज कुमार दरद ने बुधवार को यह जानकारी दी।

7 से 10 प्रतिशत कमीशन वसूली का खेल

ADG पंकज दरद ने बताया कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड रिशु श्री था। जांच टीमों ने सहरसा और सीतामढ़ी सहित कई जिलों में गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनसे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। ADG ने बताया कि रिशु श्री का काम करने का तरीका यह था कि वह टेंडर प्रक्रिया के दौरान अपनी पसंदीदा कंपनियों को गैर-कानूनी फायदे पहुंचाता था। उदाहरण के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उसने पहले अहमदाबाद की एक कंपनी के लिए कोसी बैराज का टेंडर हासिल किया, लेकिन बाद में काम अपनी ही कंपनी को सौंप दिया, जिसमें पवन कुमार डायरेक्टर थे। सहरसा में उसने तारिणी दास की मदद से 10 बड़े टेंडर हासिल किए।

ADG ने बताया कि रिशु श्री इन पसंदीदा कंपनियों से 7 से 10 प्रतिशत तक भारी कमीशन वसूलता था और फिर गैर-कानूनी कमाई का 2 से 3.5 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के तौर पर सरकारी अधिकारियों को देकर उन्हें मैनेज करता था। इन लेन-देन के पक्के सबूत मोबाइल चैट और दस्तावेजों में मिले हैं।

ADG ने आगे बताया कि जांच में यह भी पता चला कि यह सिंडिकेट सिर्फ जल संसाधन विभाग तक ही सीमित नहीं था। इसके तार वित्त विभाग, भवन निर्माण विभाग और शहरी विकास विभाग के अधिकारियों से भी जुड़े थे। रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को 61 संपत्तियों के कागजात, साथ ही करोड़ों रुपये के गहने और नकदी मिली।

फरार IAS होंगे गिरफ्तार

विजिलेंस डिपार्टमेंट ने साफ़ कर दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब फरार आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कस रहा है। इस मामले में दो और IAS अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। ADG पंकज दरद ने साफ किया कि IAS अधिकारी संजीव हंस और पवन कुमार के पक्के सबूत हैं। दोनों अभी फरार हैं और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है।

ADG ने बताया कि दो अन्य IAS अधिकारियों, अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर को दो बार नोटिस भेजा गया था लेकिन वे पेश नहीं हुए। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर को लेकर उनके खिलाफ अब तक कोई सीधा आपराधिक मामला सामने नहीं आया है, लेकिन उन पर प्रशासनिक स्तर पर कर्तव्य में लापरवाही के आरोप हैं। मुख्य आरोपी रिशु श्री ने उन्हें विदेश यात्राओं पर भेजा था। पूछताछ में पता चला कि अभिलाषा शर्मा ज्योतिष की जानकार हैं और उन्होंने रिशु श्री की हथेली देखकर कुछ उपाय बताए थे। उनके बीच पैसों के लेन-देन के सबूत मिले हैं। इसलिए उन्हें अभी तक क्लीन चिट नहीं दी गई है और जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी।