
जांच के लिए NEET छात्रा के घर पहुंची FSL टीम (फोटो- X@Junior_Editor20)
NEET Student Rape-Death Case: राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार को झकझोर कर रख दिया। केस अपने हाथ में लेने के बाद से CBI सबूतों को जोड़ने में लगी है। इस रहस्य को सुलझाने के लिए CBI अब करीब 10 संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को अभी तक कोई ठोस और पक्के सुराग नहीं मिले हैं, इसलिए वह साइंटिफिक तरीकों का सहारा लेने की तैयारी कर रही है। इसमें हॉस्टल मैनेजमेंट से जुड़े लोग, गार्ड और कुछ दूसरे संदिग्ध शामिल हो सकते हैं।
CBI टीम सोमवार को एक बार फिर शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची थी। लगभग दो घंटे तक टीम ने हॉस्टल और उस कमरे की जांच की, जहां छात्रा रहती थी। कमरे के अंदर के हालात, सामान, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और दूसरे संभावित सबूतों की जांच की गई। जांच के दौरान, CBI अधिकारियों ने हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और दो वार्डन से बंद कमरे में पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, तीनों से अलग-अलग पूछताछ की गई। उनसे उस दिन की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था, छात्रा की मानसिक स्थिति और घटनाक्रम के हर पहलू पर विस्तार से पूछताछ हुई।
जांच टीम ने हॉस्टल के गार्ड अमरेंद्र से भी डिटेल में पूछताछ की, जिसने घटना वाले दिन छात्रा को सबसे पहले देखा था। CBI यह समझना चाहती है कि जब उसे उसके कमरे से नीचे लाया गया था, तो उसकी हालत कैसी थी। CBI ने आगे की जांच के लिए हॉस्टल से कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और स्टूडेंट का पर्सनल सामान जब्त किया है।
जब CBI टीम हॉस्टल पहुंची, तो हॉस्टल के अंदर और बाहर भारी पुलिस तैनात थी। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जांच के दौरान फोटो और आवश्यक डॉक्यूमेंटेशन भी किया गया। पूछताछ के बाद हॉस्टल संचालिका और वार्डन से लिखित आश्वासन लिया गया कि जब भी CBI बुलाएगी, वे जांच में सहयोग करेंगी।
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट पहले ही कन्फर्म कर चुकी है कि छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म के दाग मिले थे, जो सेक्सुअल असॉल्ट का इशारा करते हैं। इस केस में CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म के DNA का संदिग्ध आरोपी के DNA सैंपल से मैच करना है। जांच एजेंसी इस साइंटिफिक सबूत के आधार पर किसी पक्के नतीजे पर पहुंचना चाहती है। हालांकि, DNA रिपोर्ट से अभी तक कोई पक्का नतीजा नहीं निकला है। सूत्रों का कहना है कि यदि डीएनए मिलान में देरी होती है या परिणाम स्पष्ट नहीं होता, तो पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए संदिग्धों के बयान वेरिफाई किए जा सकते हैं।
एक लाई डिटेक्टर टेस्ट किसी व्यक्ति के शरीर में बिना मर्जी के होने वाले फिजियोलॉजिकल बदलावों को मापता है। यह हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, सांस लेने की दर और स्किन कंडक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है। ऐसा माना जाता है कि झूठ बोलने पर व्यक्ति के शरीर में स्ट्रेस बढ़ जाता है, जिससे इन इंडिकेटर्स में बदलाव आते हैं।
टेस्ट के दौरान, व्यक्ति को एक कुर्सी पर बैठाया जाता है और उसके शरीर पर सेंसर लगाए जाते हैं। एक्सपर्ट सवाल पूछता है और जवाबों का एक ग्राफ कंप्यूटर स्क्रीन पर रिकॉर्ड किया जाता है। हालांकि, कोर्ट में नतीजों को सीधा सबूत नहीं माना जाता है, लेकिन वे जांच एजेंसी को सही दिशा और मुख्य दोषियों के बारे में सुराग दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, CBI संबंधित व्यक्ति की सहमति और कोर्ट के आदेश के बिना यह टेस्ट नहीं कर सकती है।
CBI ने अपनी जांच का दायरा हॉस्टल तक ही सीमित नहीं रखा है। टीम जहानाबाद में छात्रा के पैतृक गांव भी गई, जहां उसके माता-पिता सहित अन्य परिजनों से घंटों तक पूछताछ की गई। इसके बाद, गया में उसके उसके मामा और दूसरे रिश्तेदारों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसी स्टूडेंट की मानसिक स्थिति, उसने किसी को कोई परेशानी बताई या नहीं, और जांच में हॉस्टल मैनेजमेंट की भूमिका को समझने की कोशिश कर रही है।
Updated on:
24 Feb 2026, 1:06 PM IST
Published on:
24 Feb 2026, 1:06 PM IST
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