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22 साल बाद संसद लौट रहे नीतीश कुमार; कृषि मंत्री से रेल मंत्री तक, जानिए कब-कब संभाला मंत्रालय

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के लिए तैयार हैं। इससे पहले 1989 से 2004 तक नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाई थी और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। जानिए नीतीश कुमार ने केंद्र में कब और कौन-कौन सी ज़िम्मेदारियां निभाई थीं।

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पटना

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Anand Shekhar

Apr 10, 2026

Nitish Kumar MLC Resignation

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (सोर्स: सीएम एक्स अकाउंट)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्य सभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेकर अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। गुरुवार को दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली ही उनका ठिकाना होगा और वो वहीं रहकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बात का संकेत भी दिया कि 3-4 दिन में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। नीतीश कुमार का केंद्रीय राजनीति से जुड़ाव बहुत पुराना है। 1989 में पहली बार सांसद बनने से लेकर 2004 तक उन्होंने दिल्ली के सत्ता के गलियारों में कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला।

वीपी सिंह सरकार में पहली बार बने मंत्री

    केंद्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की यात्रा दिसंबर 1989 में शुरू हुई। बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद वे पहली बार लोकसभा में पहुंचे। उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए, तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने उन्हें कृषि और सहकारिता राज्य मंत्री नियुक्त किया। हालांकि, यह कार्यकाल छोटा रहा और नवंबर 1990 में सरकार गिरने के साथ ही समाप्त हो गया।

    अटल सरकार में रेल मंत्री

    नीतीश कुमार का कद सही मायने में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के दौरान बढ़ा। 1998 में उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दौरान 1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल में एक भयानक रेल दुर्घटना हुई। इस त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीति में नैतिकता का यह उदाहरण आज भी मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है।

    भूतल परिवहन और कृषि मंत्रालय

    वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार ने अलग-अलग समय पर कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान भी संभाली। 1998 और 1999 के बीच उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला। इसके बाद नवंबर 1999 से मार्च 2000 तक और फिर मई 2000 से जुलाई 2001 तक उन्होंने देश के कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया। इस भूमिका में उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए।

    रेल मंत्री के रूप में दूसरी पारी

    साल 2001 में नीतीश कुमार एक बार फिर रेल मंत्री बने और मई 2004 तक इस पद पर बने रहे। रेल मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को भारतीय रेलवे के लिए स्वर्ण युग से कम नहीं माना जाता है। नीतीश कुमार ही थे जिन्होंने IRCTC की शुरुआत की और इस तरह उस ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली की नींव रखी जिसका उपयोग हम आज करते हैं। इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उन्होंने 17,000 करोड़ रुपये का एक विशेष सुरक्षा कोष स्थापित किया। इतना ही नहीं टिकट बुकिंग में तत्काल कोटा और कम्प्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली को उन्होंने ही मजबूती दी।

    चारों सदनों के सदस्य

    आज राज्य सभा में शपथ लेकर नीतीश कुमार अपने नाम एक दुर्लभ रिकॉर्ड भी दर्ज करेंगे। नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर चारों विधायी सदनों लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद का सदस्य बनने का गौरव हासिल कर लिया है।

    नीतीश कुमार कब किस सदन के रहे सदस्य

    नालंदा के हरनौत से चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार पहली बार 1985 में विधानसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा के लिए 6 बार चुने गए। 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर नीतीश कुमार ने विधान परिषद में शामिल होने का विकल्प चुना। तब से 2006, 2012, 2018 और 2024 में वे चार बार बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में चुने गए हैं। अब आज 10 अप्रैल को वे राज्य सभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।