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Patna Coaching Clash: पटना में कोचिंग का कारोबार या ‘मंडी’? हर एडमिशन पर एजेंटों को हिस्सा, सफल छात्र पर बोली

Patna Coaching Clash: पटना में कोचिंग कारोबार को लेकर एजेंट-कमीशन, एडमिशन में प्रलोभन और भर्ती परीक्षाओं में ‘सेटिंग’ के आरोपों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। छात्रों से अलग-अलग स्तर पर वसूली और सफलता के दावों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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Patna Coaching Clash

सांकेतिक तस्वीर। फोटो -(AI Generated)

Patna Coaching Clash: फैजल खान और रौशन आनंद के कोचिंग विवाद के बीच पटना का मुसलहपुर हाट इलाका पिछले कई दिनों से किसी बड़ी घटना की आशंका के चलते सहमा हुआ है। कभी यह क्षेत्र फल और सब्जियों के बाजार के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां हर मकान पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग बेरोजगार छात्रों के बीच नौकरी के सपनों का प्रचार कर रहे हैं। कोचिंग के इस ‘मंडी’ में हर साल करीब 15,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में कुल 6,383 कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें से अकेले पटना में 1,256 कोचिंग संस्थान हैं। वहीं मुजफ्फरपुर में 578 और गया में 428 संस्थान हैं।

कोचिंग में एजेंट-कमीशन का खेल

पटना में कोचिंग में पढ़ने आने वाले छात्रों को सपनों का आकर्षण दिखाने का काम होर्डिंग्स के बाद पूछताछ काउंटरों पर तैनात कर्मचारी करते हैं। वे छात्रों के साथ एक तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं। ‘अगर अभी एडमिशन नहीं लिया तो कोर्स छूट जाएगा’ और ‘आज दाखिला लेने पर 20 से 50 प्रतिशत तक डिस्काउंट मिलेगा’ जैसे प्रलोभन देकर छात्रों को आकर्षित किया जाता है। अगर छात्र इस प्रचार के जाल से बाहर निकलने में सफल हो जाते हैं, तो कोचिंग संस्थानों के बाहर हॉस्टल और चाय-पान की दुकानों पर सक्रिय कमीशन एजेंटों का नेटवर्क काम करता है। ये एजेंट छात्रों को अपने प्रभाव में लेने के बाद एक ही बैच के छात्रों से अलग-अलग रकम वसूलते हैं—कहीं 6,500 रुपये, तो कहीं मोलभाव के आधार पर 4,000 रुपये तक।

इसके बाद ये एजेंट छात्रों को कोचिंग संस्थान तक पहुंचाने का काम करते हैं। इसके बदले में वे बीपीएससी परीक्षाओं के लिए 2,000 रुपये, वन-डे परीक्षाओं के लिए 500 रुपये और नीट-जेईई जैसे महंगे कोर्स में कुल फीस का लगभग 10 प्रतिशत (10,000 से 20,000 रुपये तक) कमीशन के रूप में लेते हैं।

पटना कोचिंग में भर्ती रिजल्ट का खेल

कुछ कोचिंग संचालक दारोगा भर्ती सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘सेटिंग’ का खेल करने का भी आरोप लगाया जाता है। वे छात्रों और अभिभावकों को सफलता का प्रलोभन देकर उनसे बड़ी रकम वसूलते हैं। इससे पहले फैजल खान और रौशन आनंद के संस्थानों के बीच पोस्टर प्रतिस्पर्धा को लेकर गोलीबारी और हिंसक झड़प की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। सिपाही भर्ती के मामले में एक कोचिंग संस्थान ने 12,000 और दूसरे ने 10,000 छात्रों के सफल होने का दावा किया था। दोनों के दावों को मिलाकर यह संख्या 22,000 हो जाती है, जबकि कुल पदों की संख्या 19,838 ही थी।

फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर से जुड़ा खेल

दरअसल, इस पूरे दावों का खेल फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर से शुरू होता है। पटना में सिपाही और दारोगा भर्ती के लगभग 35 फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं, जहां करीब 17 से 18 हजार छात्र प्रशिक्षण लेते हैं। इनमें से 9,000 से अधिक छात्र एक से अधिक कोचिंग संस्थानों के संपर्क में रहते हैं। कोचिंग संस्थान विभिन्न फिजिकल एकेडमी से टाइअप कर अपने छात्रों को वहां भेजते हैं। इसके बदले छात्रों की पहचान के लिए उन्हें संबंधित आईडी भी उपलब्ध कराई जाती है। इसी आधार पर संस्थान अपने-अपने सफलता के दावे करते हैं।

सफल छात्र पर लगती है बोली

कुछ छात्र स्वतंत्र रूप से ट्रेनिंग लेते हैं, लेकिन चयन के बाद कोचिंग संचालक सीधे फिजिकल ट्रेनर्स से संपर्क करते हैं। वे चयनित अभ्यर्थियों को अपने संस्थान से जोड़कर दिखाने के लिए उन्हें लाखों रुपये और महंगे गिफ्ट ऑफर करते हैं। यहीं से विवाद की शुरुआत होती है, जो कई बार मारपीट और गोलीबारी तक पहुंच जाता है।

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