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संतोष के नाम पर चलती थीं कंपनियां, ऋतंभरा के नाम करोड़ों की संपत्ति; रिशु श्री की पत्नी पर भी अब ED का शिकंजा

Rishu Shree Tender Scam: सरकारी टेंडर में गड़बड़ी के आरोपी कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री के परिवार पर जांच एजेंसियां ​​अब शिकंजा कस रही हैं। ED ने रिशु श्री के घर से उनकी पत्नी ऋतंभरा के नाम पर खरीदी गई 1.50 करोड़ की बेनामी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ बरामद किए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। वहीं, रिशु के करीबी सहयोगी संतोष कुमार ने कबूल किया है कि टेंडर घोटाले से जुड़ी रिश्वत की रकम पहुंचाने और बेनामी संपत्ति हासिल करने के लिए उनके नाम पर शेल कंपनियां चलाई जा रही थीं।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 07, 2026

rishu shree tender scam

ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो

Rishu Shree Tender Scam: बिहार में सरकारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और भ्रष्टाचार को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की कार्रवाई तेज हो गई है। जाने-माने कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद अब जांच उनके परिवार और करीबी सहयोगियों तक भी पहुंच गई है। जांच एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी और पूछताछ में जो बातें सामने आईं हैं, उसने रिशु श्री के करोड़ों के काले साम्राज्य की परतें खोलकर रख दी हैं। इस मामले में रिशु श्री की पत्नी ऋतंभरा और रिशु के करीबी सहयोगी व राजदार संतोष कुमार पर भी ED का शिकंजा कसने जा रहा है।

ऋतंभरा के नाम पर डेढ़ करोड़ का फ्लैट

कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ED को ऐसे अहम वित्तीय दस्तावेज मिले जिनसे उनकी पत्नी ऋतंभरा का इस मामले में सीधा संबंध सामने आता है। ED को रिशु श्री के घर से 19 दिसंबर 2018 को खरीदी गई एक महंगी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक वाले दस्तावेज मिले। इन दस्तावेजों के मुताबिक, ऋतंभरा उस प्रॉपर्टी की कानूनी मालकिन हैं और रिशु श्री को उनके पति के तौर पर दर्ज किया गया है।

जब्त किए गए सेल डीड में जमीन और फ़्लैट की कीमत लगभग 1.50 करोड़ रुपये बताई गई है। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह निवेश पत्नी के नाम पर इसलिए किया गया था ताकि सरकारी टेंडरों में हेराफेरी करके कमाए गए काले पैसों को सफेद किया जा सके। हालांकि ऋतंभरा को अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस या समन नहीं भेजा गया है, लेकिन ठोस सबूतों को देखते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना और पूछताछ के लिए उन्हें बुलाना तय है।

संतोष के नाम पर खड़ी थीं फर्जी कंपनियां

संतोष कुमार इस पूरे भ्रष्टाचार रैकेट के सबसे अहम व्यक्तियों में से एक हैं और उन्हें स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) पहले ही हिरासत में ले चुकी है। वह रिशु श्री का इतना भरोसेमंद और वफादार था कि रिशु की गैर-कानूनी दौलत को सफ़ेद करने के लिए उनके नाम पर कई शेल कंपनियां चलाई जाती थीं। ये कंपनियां सरकारी टेंडर हासिल करने और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने के लिए मुखौटा कंपनियों के तौर पर काम करती थीं।

इसके अलावा, रिशु श्री ने संतोष के नाम पर जमीन और फ्लैट के बड़े सौदे किए। रिशु के घर से मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि 16 मई 2019 को 17.82 लाख रुपये की एक और प्रॉपर्टी खरीदी गई थी। यह प्रॉपर्टी संतोष, रिशु श्री और विपुल वैभव के नाम पर संयुक्त रूप से खरीदी गई थी। साथ ही सेल डीड से सबूत मिलते हैं कि रिशु श्री ने 21 फरवरी 2019 को अपने नाम पर 2 करोड़ रुपये की एक और प्रॉपर्टी खरीदी थी।

संतोष के जरिए ही ट्रांसफर होती थी रिश्वत की रकम

SVU और ED की कड़ी पूछताछ के दौरान, रिशु के करीबी संतोष कुमार ने पूरे भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। संतोष ने माना कि अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों और बिचौलियों तक पहुंचाई जाने वाली रिश्वत की बड़ी रकम उसके जरिए ट्रांसफर की जाती थी। उसने टेंडर में हेरफेर से मिले कैश को खपाने और बेनामी संपत्ति हासिल करने में मुख्य जरिया के तौर पर काम किया। इस कबूलनामे और रिशु के घर से मिली जमीन के दस्तावेजों के आधार पर उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। संतोष के बयान से अब रिशु श्री की पत्नी ऋतंभरा के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि परिवार के सदस्यों के अलग-अलग बेनामी प्रॉपर्टी सौदों से जुड़े होने के सबूत सामने आए हैं।

ED अफसर को रिशु श्री ने भेजा था भावुक संदेश

बताया जा रहा है कि ED का समन मिलने पर कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री घबरा गया था। यह महसूस करते हुए कि कानून का शिकंजा उस पर कस रहा है, उसने जांच को प्रभावित करने की एक हताश और नाकाम कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री ने जांच कर रहे ED अधिकारी के पर्सनल मोबाइल नंबर पर लालच देने वाला एक बहुत ही भावुक मैसेज भेजा। मैसेज में, रिशु श्री ने जांच अधिकारी और उनके परिवार का साथ देने का वादा किया और हर तरह की मदद की पेशकश की। जब उसे एहसास हुआ कि अधिकारी इन प्रस्तावों से नहीं पिघले, तो उसने सहानुभूति पाने और दबाव बनाने के लिए आत्महत्या की धमकी देने का सहारा लिया। हालांकि, जांच एजेंसी ने इन हथकंडों को नजरअंदाज किया और अपनी जांच जारी रखी।