
बुजुर्ग को सहारा देकर ले जाते लोग
Vaishali Court News: बिहार के वैशाली जिला अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साल 1992 में दर्ज हुए एक जानलेवा हमले के मामले में पूरे 34 साल बाद अब जाकर वर्ष 2026 में अपना अंतिम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी दीप राय उर्फ जिसा राय को दोषी करार दिया था और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने आज मंगलवार को इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए 85 वर्ष के बुजुर्ग आरोपी को 3 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह पूरा मामला वैशाली जिले के जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र का है, जहां आज से करीब साढ़े तीन दशक पहले 10 मई 1992 को आपसी रंजिश और जमीनी विवाद को लेकर एक खूनी खेल खेला गया था। उस वक्त आरोपी दीप राय सहित 5 लोगों ने पीड़ित पक्ष पर जानलेवा हमला करते हुए गोलीबारी की थी, जिसमें पीड़ित गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। उस वक्त पुलिस की जांच के बाद साल 1993 ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई थी, जिसमें 5 लोगों को आरोपी बनाया गया था। तीन दशकों तक चली लंबी सुनवाई में चार आरोपियों की मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमला यानी हाफ मर्डर और आर्म्स एक्ट के तहत संगीन मुकदमा दर्ज किया था। जब यह अपराध हुआ था, तब आरोपी जवान था। लेकिन जब सजा सुनाई गई तो आरोपी की उम्र 85 साल हो चुकी है और वो बिना सहारे के चलने में भी समर्थ नहीं हैं। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 307 (जानलेवा हमला) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर अपराधों का दोषी पाया है।
वैशाली कोर्ट के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 85 वर्षीय बुजुर्ग आरोपी को 1992 के उस जानलेवा हमले का मुख्य दोषी पाया। अदालत ने आरोपी की ढलती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी दलीलों को सुनते हुए कानून के दायरे में उन्हें 3 साल की सश्रम कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।
Updated on:
02 Jun 2026 07:33 pm
Published on:
02 Jun 2026 07:33 pm
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