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बिहार में कैबिनेट विस्तार कब? आएंगे नए चेहरे या पुराना फॉर्मूला रहेगा बरकरार, जानिए क्या है सम्राट सरकार का प्लान

Bihar Cabinet Expansion: बिहार में फिलहाल पूरी सरकार सिर्फ मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही चला रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कैबिनेट का विस्तार कब होगा? और जब यह होगा तो क्या वही पुराना फॉर्मूला अपनाया जाएगा, या फिर नए चेहरों को मौक़ा दिया जाएगा?
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 17 Apr 2026, 8:46 AM IST

Samrat Choudhary

सम्राट चौधरी

Bihar Cabinet Expansion:बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन तो हो गया है, लेकिन फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ केवल दो उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ही कामकाज संभाल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने और वहां की गहमागहमी समाप्त होते ही 5 मई के बाद किसी भी दिन बिहार कैबिनेट का विस्तार कर दिया जाएगा।

तीन कंधों पर 47 विभाग

बिहार के राजनीतिक इतिहास में 2022 के बाद यह पहला मौका है जब कैबिनेट इतनी छोटी है। फिलहाल सरकार का पूरा ढांचा केवल तीन चेहरों पर टिका है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह समेत 29 विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव को 8 विभाग आवंटित किए गए हैं। विस्तार के बाद ही इन विभागों का विधिवत बंटवारा अन्य मंत्रियों के बीच किया जाएगा, जिससे सरकार के कामकाज में गति आने की उम्मीद है।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की बड़ी चुनौती

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। सम्राट सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस सीमित संख्या के भीतर एनडीए के सभी घटकों को साधना और जातीय समीकरण को संतुलित करना है। इस बार एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिल सकता है कि कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से अधिक होगी। भाजपा ने इस बार बड़े और प्रभावी विभाग अपने पास रखे हैं।

पुराना फॉर्मूला या नए चेहरे?

जदयू सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने भरोसेमंद चेहरों पर ही दांव खेला जाएगा। जदयू के श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, जमा खान, सुनील कुमार और लेसी सिंह की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, भाजपा में भी पुराने दिग्गजों को हो बरकरार रखने की संभावना है, हालांकि राजनीतिक संदेश देने के लिए कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है।

चिराग-मांझी और कुशवाहा की बढ़ी धड़कनें

सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह से पहले भाजपा को छोड़कर एनडीए के अन्य दलों के संभावित मंत्रियों की सूची तैयार कर ली गई थी। लेकिन भाजपा के अधिकांश नेता अभी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में व्यस्त हैं, इसलिए उनकी सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसी वजह से सभी मंत्रियों का शपथ ग्रहण को फिलहाल रोक दिया गया है। रणनीति यह है कि भाजपा और सभी सहयोगी दलों के नेता एक साथ ही शपथ लेंगे।

पिछली सरकार में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भी मंत्री बनाया गया था, जबकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इस बार भी, मंत्री पदों को लेकर अंतिम फैसला पूरी तरह से उपेंद्र कुशवाहा की पसंद पर ही निर्भर करेगा। लोजपा (राम विलास) की ओर से मंत्रियों के नामों पर अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ही लेंगे। वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष सुमन का नाम पक्का माना जा रहा है।

संभावित मंत्रियों की लिस्ट

  • JDU कोटे से: श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, जमा खान, सुनील कुमार, लेसी सिंह।
  • BJP कोटे से: विजय कुमार सिन्हा, मंगल पाण्डेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, लखेंद्र पासवान, रमा निषाद, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अरूण शंकर प्रसाद, संजय सिंह टाइगर।
  • अन्य सहयोगी दल: संतोष कुमार सुमन (HAM), संजय पासवान, संजय कुमार सिंह (LJPR) और दीपक प्रकाश (RLM)।

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