भाजपा औपचारिक तौर पर भले ही हर मामले में तुरंत फैसला न लेती हो, लेकिन “वन पर्सन–वन पोस्ट” का सिद्धांत पार्टी की कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा है। नितिन नबीन के मामले में भी यही नीति लागू होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल कोई तात्कालिक दबाव नहीं है, लेकिन आने वाले समय में कैबिनेट विस्तार या फेरबदल के दौरान यह फैसला लिया जा सकता है। यानी नितिन नबीन कुछ समय तक दोनों जिम्मेदारियां निभा सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा चलना मुश्किल माना जा रहा है।