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स्कूल से लेकर मार्केट तक भालुओं का आतंक: 50,776 घटनाएं, समस्या से निपटने के लिए बनाना पड़ा ‘नया मंत्रालय’

जापान में भालू सिर्फ जंगलों की समस्या नहीं रह गए हैं। वे शहरों, रिहायशी इलाकों, स्कूलों, दुकानों और सड़कों तक पहुंच रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए है कि जापान की सरकार को इनके हमलों से निपटने के लिए अलग से एक मंत्रालय बनाना पड़ा।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 19, 2026

Bear Attacks in japan

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

जापान में भालू अब सिर्फ जंगलों की समस्या नहीं रह गए हैं। वे शहरों, रिहायशी इलाकों, स्कूलों, दुकानों और सड़कों तक पहुंच रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि जापान सरकार को इनके हमलों से निपटने के लिए एक अलग मंत्री पद ही बनाना पड़ा है। गुरुवार को प्रधानमंत्री साने ताकाइची के कैबिनेट फेरबदल में सत्तारूढ़ दल के सांसद हिरोयोशी सासागावा को पर्यावरण मंत्री बनाया गया और उन्हें ही नए बनाए गए 'भालू नियंत्रण प्रभारी' पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। सासागावा परमाणु आपात तैयारी से जुड़े मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।

रिकॉर्ड स्तर पर हमले

सरकार का यह फैसला बीते वित्त वर्ष (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) के आंकड़ों के बाद आया है, जो अब तक के सबसे खराब रहे। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार इस दौरान भालुओं के हमलों में रिकॉर्ड 13 लोगों की मौत हुई और 238 लोग घायल हुए, जबकि कुल 216 हमले दर्ज किए गए। ये तीनों आंकड़े अब तक के सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल के मुकाबले यह बड़ी छलांग है, जब सिर्फ 3 मौतें और 82 लोग घायल हुए थे। इसी अवधि में देशभर में भालुओं के दिखने की 50,776 घटनाएं दर्ज हुईं, जो पिछले साल के करीब 20,513 के आंकड़े से लगभग ढाई गुना (150 प्रतिशत) ज्यादा और 2009 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से सबसे अधिक हैं।

स्कूल से लेकर फैक्ट्री तक पहुंचे भालू

इस साल भालू जापान के कई शहरी इलाकों में दिखे। टोक्यो से करीब 100 किलोमीटर उत्तर में स्थित करीब 5 लाख की आबादी वाले शहर उत्सुनोमिया में एक भालू के पार्क, शहर के बीचोंबीच और बाद में एक औद्योगिक क्षेत्र में लगातार दिखने के बाद प्रशासन ने एहतियातन 94 प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया।

इसी दौरान फुकुशिमा के एक औद्योगिक इलाके में भी भालू के घुसने से लोग घायल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा हमले शहरी इलाकों या रिहायशी बस्तियों के आसपास ही हुए हैं, जो दिखाता है कि भालू अब इंसानी आबादी से डरने के बजाय उसके करीब आने लगे हैं।

घटती आबादी और भोजन की कमी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हैं। जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी लगातार घट रही है, जिससे जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच पहले जैसी निगरानी और गतिविधि नहीं बची, और शिकारियों की संख्या भी घट गई है जो पहले भालुओं की तादाद को काबू में रखते थे। इसके अलावा बदलते मौसम और गर्माहट ने बलूत (एकोर्न) जैसे प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता व हाइबरनेशन के मौसम को प्रभावित किया है, जिससे भालू खाने की तलाश में खेतों, बागानों और बस्तियों का रुख करने लगे हैं।

14 हजार से ज्यादा भालू मारे गए

हालात से निपटने के लिए जापान में बड़े पैमाने पर भालुओं को पकड़ने और मारने का अभियान भी चलाया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 14,000 से ज्यादा भालुओं को मारा गया, जिनमें करीब 12,000 एशियाई काले भालू और 2,000 भूरे भालू शामिल थे।

यह पिछले साल के मुकाबले करीब तीन गुना है। गौरतलब है कि एशियाई काला भालू दुनियाभर में संकटग्रस्त प्रजातियों में गिना जाता है और जापान में इसकी अनुमानित आबादी करीब 42,000 बताई जाती है, जिससे बड़े पैमाने पर हो रहे शिकार को लेकर संरक्षणवादियों में चिंता बढ़ गई है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 8,800 और भालुओं को हटाने का लक्ष्य रखा है।

सरकार के कदम

जापान सरकार ने रिटायर्ड पुलिसकर्मियों व सेल्फ डिफेंस फोर्स (SDF) के जवानों को हथियारबंद शिकारी के तौर पर तैनात करने, जाल व निगरानी ड्रोन के लिए स्थानीय निकायों को सब्सिडी देने और आपातकालीन शिकार पर हंटिंग टैक्स में छूट जैसे प्रस्तावों पर भी विचार शुरू किया है। इसके लिए 3.4 अरब येन (करीब 22 करोड़ डॉलर) का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है।

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