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‘मौत के गड्ढों’ पर लीपापोती! हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी NH-130 पर खतरा बरकरार, पत्रिका की पड़ताल में खुली विभाग के दावों की पोल

Raipur-Bilaspur Highway: हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे-130 की बदहाली दूर नहीं हुई है। सड़क पर अब भी जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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हिमांशु शर्मा

Sep 19, 2026

Highway Potholes

नेशनल हाईवे (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@हिमांशु शर्मा। NH 130 Road Condition: रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे की बदहाली पर हाईकोर्ट की फटकार का भी कोई असर नहीं पड़ा है। कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान लेते हुए एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग से जवाब तलब किया। साथ ही स्थिति चिंताजनक कहते हुए सुधार के कड़े निर्देश दिए। उसके बावजूद एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने 8-10 छोटे-बड़े गड्ढे पाटकर सिर्फ खानापूर्ति कर दी है, जबकि सड़क पर अब भी सैकड़ों मौत के गड्ढे खुले पड़े हैं, जो रोज हादसों को न्योता दे रहे हैं।

रायपुर से बिलासपुर तक करीब 120 किलोमीटर की इस सड़क पर हर दिन एक लाख से अधिक गाड़ियों का आवागमन होता है। यह प्रदेश का सबसे व्यस्त नेशनल हाईवे है, लेकिन इसकी हालत किसी गांव की कच्ची सड़क से भी बदतर हो चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालकों को अंदाजा ही नहीं लगता कि गड्ढा कितना गहरा है।

गड्ढे भरने के दावों की खुली पोल

पत्रिका ने फिर से विभाग के दावों की हकीकत की पोल खोलने के लिए रायपुर से लेकर सिमगा तक 45 किलोमीटर का सफर तय किया। सड़क की स्थिति देखते हुए लगा कि अब हाईकोर्ट के निर्देश को भी हवा में उड़ा दिया गया है। अफसरों ने दिखावे के लिए कुछ-कुछ जगहों पर गड्ढों पर लीपापोती कर दी। बाकी मौत के गड्ढ़ों को खुले में छोड़ दिया है। अब भी रायपुर से बिलासपुर नेशनल हाईवे 130 में शुरु के ही चारों ओवब्रिज में बड़े-बड़े गड्ढे मिले। हालांकि गिनती के ही जगहों में सिर्फ रिपेयरिंग हुआ था। बाकी की हालत जस की तस है।

NH 130 Road Condition: पौधों की कटाई-छटाई में ज्यादा ध्यान

सबसे शर्मनाक बात यह है कि गड्ढे भरने से ज्यादा ध्यान विभाग का डिवाइडर पर लगे पौधों की कटाई-छटाई में है। साहब लोगों को सड़क सुंदर दिखनी चाहिए, भले ही उस सुंदर सड़क पर गड्ढों में गिरकर लोग मर जाएं। सुबह जब पत्रिका की टीम सिमगा से वापस जब लौट रही थी, तो देखा कि सुबह करीब 10.30 बजे धरसींवा के पास अमर जवान शहीद पेट्रोल पंप के पास बैरिकेट लगाकर 20 से अधिक कर्मचारी पौधों की कटाई-छटाई कर रहे थे। विभाग को गड्ढ़े भरने से ज्यादा पौधों की कटाई जरूरी लग रही है। जबकि आए दिन इस हाईवे पर बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। रात के समय तो यह हाईवे मौत का कुआं बन जाता है। क्या एनएचएआई किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?