
पुष्प की अभिलाषा-माखन लाल चतुर्वेदी (Photo source- Patrika)
Independence Day 2025: 1921 में बिलासपुर केंद्रीय जेल की चारदीवारी के भीतर लिखी गई पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की अमर कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ आज भी देशभक्ति का ज्वार भर देती है। असहयोग आंदोलन के दौरान गिरफ्तार होकर जेल पहुंचे यह कवि, लेखक और पत्रकार ने अपने शब्दों से अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी और आजादी के दीवानों के दिलों में जोश जगा दिया।
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