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MP में सरकारी नियमों पर बड़ा अपडेट, बड़े बदलाव की तैयारी में सरकार

MP News: मध्य प्रदेश में बदलावों का कैलेंडर हो रहा तैयार, कर्मचारियों और युवाओं को बड़ी सौगात, भर्ती प्रक्रिया, पेंशन नीति, अवकाश और कैशलेस इलाज तक बदल जाएंगे हर पॉलिसी के नियम-कायदे...

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MP news(फोटो: सोशल मीडिया)

MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और युवाओं को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। प्रदेश की मोहन सरकार नए परिवर्तनों के साथ प्रदेश का चेहरा बदलने जा रही है। बड़ा बदलाव नीति लागू करने के तरीके के साथ ही भर्ती से लेकर पेंशन तक, अवकाश से लेकर उपचार तक हर क्षेत्र में मोहन सरकार ने नई सोच और नई रणनीति ब्लूप्रिंट तैयार कर दिया है। नए नियमों का यह बदलाव महज एक सुधार का कदम नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की री-इंजीनियरिंग माना जा सकता है।

भर्ती व्यवस्था में दिखेगी क्रांति (Recruitment Policy)

अब तक राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग विभागों में भर्ती के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित कराई जाती थीं। इससे न केवल समय बल्कि, लाखों युवाओं को बार-बार मेहनत की जरूरत पड़ती थी। लेकिन अब नए साल 2026 से सरकार एक ऐसी संयुक्त भर्ती प्रणाली लाने की तैयारी में है, जिसमें साल में 4-5 बार परीक्षा होगी और एक मेरिट लिस्ट से ही सभी विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इस नई व्यवस्था को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के जिम्मेदारों का मानना है कि वे युवाओं का समय और अवसर दोनों बचाना चाहते हैं। इनका कहना है कि यह व्यवस्था न केवल पारदर्शी होगी बल्कि, इससे भर्ती प्रक्रिया में तेजी भी आएगी।

सरकारी कर्मचारियों कैशलेस इलाज का तोहफा (Cashless Treatment Policy)

एमपी में अभी तक सरकारी कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था थी कि कर्मचारियों को पहले इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ता था, फिर खर्च का दावा संबंधित विभाग में लगाना पड़ता था। लेकिन इस प्रक्रिया को बदलते हुए नए साल 2026 में सरकार बड़ी झंझट से मुक्ति देते हुए राजस्थान की आयुष्मान कार्ड योजना की तर्ज पर एक एकीकृत कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों के साथ ही चयनित निजी अस्पतालों में भी 'बिना जेब से भुगतान' किए इलाज संभव होगा। इलाज के खर्च की सीमा 5 से 10 लाख रुपए तक होगी। इसका लाभ सरकारी कर्मचारियों के साथ ही पेंशनर्स को भी मिलेगा। खासतौर पर बड़ा फायदा उनका होगा जिनकी पेंशन या वेतन सीमित है।

आधुनिक होंगे पेंशन नियम, लचीलापन बढ़ेगा (Pension Policy Update)

नई पेंशन नीति के तहत 2026 से अविवाहित पुत्र या पुत्री को भी पेंशन लाभ के लिए पात्र माना जाएगा। बता दें कि अभी तक यह लाभ माता-पिता या विवाहित जीवनसाथी तक सीमित था, लेकिन नए प्रस्ताव में जीवनपर्यंत माता-पिता पर आश्रित व्यक्ति को भी पेंशन नियम से जोड़ा जाएगा। नए साल में पेंशन नियम 2026 को लेकर मोहन सरकार का ये कदम न केवल संवेदनशील सोच को दर्शाता है बल्कि, आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी प्रोत्साहित करने वाला साबित होगा।

अवकाश नीति भी बदलेगी, स्थानीय छुट्टी पर संस्कृति का तड़का (Leave Policy)

नए साल 2026 से सार्वजनिक और ऐच्छिक और लोकल अवकाशों के नियम भी बदलेंगे। अब छुट्टी में स्थानीय संस्कृति का रंग नजर आएगा। यानी पूरे एमपी में एक साथ या एक ही दिन एक जैसी छुट्टियां नहीं रहेंगी। मोहन सरकार अवकाश नीति को लेकर अब 'क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली' पर विचार कर रही है। यानी स्थानीय संस्कृति, पर्व-त्योहार और परंपराओं के अनुसार हर जिले को कुछ छुट्टियों की स्वायत्तता दी जाएगी।

उदाहरण के लिए राज्य सरकार की ओर से भोपाल, इंदौर में अलग-अलग सूची, तो जबलपुर, ग्वालियर में अलग-अलग अवकाश की लिस्ट जारी की जाएगी। ताकि स्थानीय जीवन की लय से प्रशासन भी जुड़ा रहे।

तीसरी संतान नीति पर बड़ा संशोधन कर सकती है सरकार

अब तक तीसरी संतान के बाद सरकारी नौकरी के आवेदन या पदोन्नति पर रोक जैसी नीतियां लागू हैं। सरकार अब इसे बदलने पर भी विचार कर सकती है। नये प्रस्ताव के तहत इस नियम को स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए देखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, इसे पूरी तरह समाप्त करने पर भी विचार किया जा रहा है।

'सप्ताह में 5 दिन काम' मॉडल पर की जा रही समीक्षा (5 days working)

मध्यप्रदेश समेत देशभर में कोविड महामारी के दौरान लागू किया गया यह प्रयोग कई विभागों में उत्पादकता बढ़ाने वाला साबित हुआ। अब प्रदेश सरकार इसे स्थायी रूप देने की दिशा में समीक्षा कर रही है। अगर सरकार इस मॉडल को मंजूरी देती है, तो नये साल 2026 में 'फाइव-डे वर्किंग' + बैलेंस्ड अवकाश' मॉडल को संस्थागत रूप लागू किया जा सकता है।

नई नीतियों को लागू करने का नियम भी बदलेगा

बता दें कि सरकार सभी बदलाव एक साथ नहीं लाएगी। भर्ती और स्वास्थ्य नीति को पहले पायलट जिलों में लागू किया जाएगा, उसके बाद पेंशन और अवकाश से जुड़े नियम पूरे राज्य में लागू किए जाएंगे।

जानकारों का कहना है कि एमपी सरकार केंद्र की तर्ज पर ही सभी बदलाव (MP News) अपने यहां करने की तैयारी कर चुकी है। सरकार का इशारा साफ है कि मध्य प्रदेश अब पुरानी फाइलों से बाहर आना चाहता है। इन प्रस्तावों के पीछे सरकार स्पष्ट मंशा है व्यवस्था को चलाना नहीं, सुधारना है। सामान्य प्रशासन एवं कार्मिक विभाग 2026 में नजर आने वाले ये बदलाव उस दिशा में कदम है जहां सरकारी नौकरी अब जड़ नहीं बल्कि, गतिशील व्यवस्था की प्रतीक बनती नजर आएगी।