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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में गौरीगंज से 12 किलोमीटर दूर बसा कोहरा गांव, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा केंद्र था, जहां हर घर से क्रांतिकारी निकले। यह गांव, जो बंधलगोटी राजपूतों की तालुकदारी का गढ़ था, न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि उस जज्बे के लिए भी, जिसने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी। कोहरा के बाबू भूप सिंह, जिन्हें इतिहास में एक योद्धा के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने इस गांव को स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बनाया।
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