फिल्मी दुनिया के वो पीले पन्ने…, देवयानी और उनकी पीत पत्रकारिता की अनसुनी कहानी
सितारों की दास्तां एक वक्त पर, यानी सत्तर और अस्सी के दौर में कोहरे में लिपटी, जादुई रहस्य का जामा पहने और चटपटी बातों की चाशनी में डूब कर पाठकों तक पहुंचती थी। लीजिए एक बानगी, उस दौर की। ये लेख वरिष्ठ पत्रकार और पॉडकास्टर जयंती रंगनाथन ने लिखा है।