20 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कम पानी में भी लहलहाएगी फसल: जानिए आधुनिक सिंचाई और देसी तकनीकों के खास तरीके

क्या आप जानते हैं कि सही फसल और सिंचाई के तरीकों से आप अपने खेत की नमी को बढ़ा सकते हैं? इस खबर में कुछ आसान और प्रभावी उपाय बताए गए हैं, जिससे आपके खेत हमेशा हरे-भरे रहेंगे।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Aug 20, 2026

farming with modern techniques

सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)

किसानों के लिए पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। लेकिन सही जानकारी और कुछ कारगर उपायों से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस खबर में कुछ प्रभावी और व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं, जो आपके खेत को हरा-भरा बनाए रखने में मदद करेंगे।

सही फसल का चयन और समय पर सिंचाई

कम पानी वाले क्षेत्रों में बाजरा, ज्वार और दालें जैसी फसलें बेहतर विकल्प होती हैं, क्योंकि इन्हें कम नमी में भी अच्छी पैदावार मिलती है। सिंचाई का समय भी बहुत महत्वपूर्ण है। सुबह जल्दी या शाम को सिंचाई करने से पानी का वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

मल्चिंग और खेत में मेड़बंदी

मल्चिंग का अर्थ मिट्टी की सतह पर पुआल, सूखे पत्ते या प्लास्टिक फिल्म बिछाना से है। ऐसा करने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और पानी की बचत होती है। खेत में छोटी-छोटी मेड़ें बनाकर बारिश या सिंचाई का पानी खेत में रोका जा सकता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पानी बर्बाद नहीं होता है।

बारिश का पानी बचाना और रेन वाटर हार्वेस्टिंग

बारिश का पानी खेत में जमा करने के लिए छोटे तालाब या गड्ढे बनाना एक सरल और प्रभावी तरीका है। यह पानी धीरे-धीरे मिट्टी में समाकर फसल को नमी देता है और भूजल स्तर को भी सुधारता है। कुछ स्थानों पर किसानों ने खेतों में रिचार्ज तालाब और सोखते गड्ढे बनाकर भूजल स्तर में सुधार देखा है, जैसे कोरिया जिले के किसानों ने किया है।

आधुनिक सिंचाई तकनीक: ड्रिप और स्प्रिंकलर

ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को आवश्यकता के अनुसार नमी मिलती है। स्प्रिंकलर सिस्टम से खेत में बारिश जैसी फुहार होती है, जिससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई हो जाती है और जलभराव की समस्या नहीं होती। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप और पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिस्टम पर किसानों को सब्सिडी मिलती है। लघु एवं सीमांत किसानों को ड्रिप पर 80%, अन्य किसानों को 70% और पट्टाधारकों को 90% तक सहायता मिल सकती है; स्प्रिंकलर पर भी 45–55% तक अनुदान मिलता है।

खेत की तैयारी और जल प्रबंधन

खेत को समतल करना आवश्यक है, ताकि पानी एक जगह जमा न हो और पूरे खेत में समान रूप से फैल सके।
सिंचाई नालियों को पक्की, संकरी और उचित ढाल वाली बनाना चाहिए, जिससे पानी का बहाव नियंत्रित हो और नुकसान न हो।
संवेदनशील अवस्थाओं, जैसे- ताज मूल (प्रारंभिक जड़ स्थापना) और गांठ बनने के समय में ही पानी देना चाहिए। अन्य समय पर पानी कम देना भी लाभकारी हो सकता है।

जल निकासी और जलभराव से बचाव

बारिश या सिंचाई के बाद यदि खेत में पानी जमा हो जाए, तो सबसे पहले उसे खेत से बाहर निकालना चाहिए। इसके लिए खेत के किनारे नालियां बनाकर पानी को ढलान की दिशा में मोड़ना या पंप की सहायता से निकासी करना प्रभावी होता है। भविष्य में जलभराव से बचने के लिए खेत का समतलीकरण, उचित ढलान और मजबूत जल निकासी व्यवस्था बनाना आवश्यक है।

सरल देसी तकनीकें और स्थानीय उपाय

पानी बचाने के लिए खेत में मेड़ बनाना, बारिश का पानी रोकना और मल्चिंग जैसी देसी तकनीकें बहुत प्रभावी हैं और आसानी से अपनाई जा सकती हैं। इन उपायों से मिट्टी में नमी बनी रहती है, पानी की बचत होती है और फसल सुरक्षित रहती है।

उपायलाभ
ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाईपानी की बचत, फसल को उचित नमी मिलना
मल्चिंग और मेड़बंदीमिट्टी में नमी बनी रहती है, पानी बर्बाद नहीं होता
रेन वाटर हार्वेस्टिंगबारिश का पानी बचता है, भूजल स्तर सुधरता है
खेत समतलीकरण और जल निकासीपानी का नियंत्रण, जलभराव से बचाव
सही फसल चयन और समय पर सिंचाईकम पानी में भी अच्छी पैदावार

योजना से लाभ

जल संरक्षण की योजना बनाने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें। वे आपके क्षेत्र की मिट्टी, जल स्रोत और फसल के अनुसार सबसे उपयुक्त तकनीक और योजना की सलाह दे सकते हैं। यदि आप ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी विकल्पों की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया अवश्य जानें। बारिश के पानी को बचाने और खेत में जल प्रबंधन सुधारने के लिए आज ही छोटे तालाब, मेड़ या मल्चिंग जैसी सरल तकनीकों को अपनाएं। इससे पानी की बचत होगी और फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इस प्रकार, खेतों में पानी की कमी को समझदारी और प्रभावी तरीकों से दूर किया जा सकता है।