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जल-थल और नभ में बढ़ेगी ताकत: भारतीय सेना के लिए खरीदे जाएंगे ‘टोही वाहन और जैमर’, 1.10 लाख करोड़ की डील मंजूर

भारतीय सेना रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु खतरों का पता लगाने के लिए 'टोही वाहन' खरीदेगी। इसके साथ ही वायुसेना के लिए बहुउद्देश्यीय जैमर खरीदे जाएंगे, जो दुश्मनी की गतिविधियों को जाम करने में सक्षम होंगे।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 08, 2026

CBRN vehicles for Indian Army

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार (7 सितंबर 2026) को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह मंजूरी तकनीकी रूप से "आवश्यकता की स्वीकृति" यानी AoN (Acceptance of Necessity) है, जो सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है। AoN मिलने के बाद अगला चरण निविदा (RFP) जारी करना, वेंडर चयन और फिर अनुबंध पर बातचीत का होता है, जिसमें आमतौर पर काफी समय लगता है। रक्षा मंत्रालय की डील के मुताबिक, भारतीय सेना के लिए CBRN यानी रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear) खतरों का पता लगाने के लिए 'टोही वाहन' खरीदे जाएंगे। ये वाहन CBRN पदार्थों से दूषित इलाकों का पता लगाने, पहचान करने, निगरानी करने और उन्हें चिह्नित करने में सक्षम होंगे।

थल सेना को क्या मिलेगा?

रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, थल सेना के लिए CBRN टोही वाहनों के अलावा उच्च गतिशीलता वाले वाहन (हाई मोबिलिटी व्हीकल, HMV), स्वचालित मेकेनिकल माइन लेयर (MML), उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH), ट्रॉल टैंक और सर्वत्र पुल प्रणाली की खरीद को भी मंजूरी मिली है। HMV से दुर्गम इलाकों में सैन्य अभियानों, रसद सहायता और आवाजाही की क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है, जबकि ट्रॉल टैंक और पुल प्रणाली का इस्तेमाल कठिन भूभाग में लड़ाकू टुकड़ियों के लिए संयुक्त रूप से मार्ग तैयार करने में होगा। ALH थल सेना और वायुसेना दोनों के लिए अलग-अलग तरह के इलाकों और अभियान स्थितियों में इस्तेमाल होंगे।

रक्षा डील में नौसेना को लिए क्या है?


रक्षा डील में नौसेना के लिए अरुध्रा रडार तथा मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के डिजाइन, विकास और उसके बाद खरीद को मंजूरी दी गई है। अरुध्रा रडार विभिन्न नौसैनिक वायु स्टेशनों पर मौजूदा पुराने हवाई मार्ग निगरानी रडार की जगह लेंगे। वहीं, मरीन गैस टर्बाइन का इस्तेमाल युद्धपोतों में प्रणोदन प्रणाली (Propulsion Systems in Warships) के तौर पर होता है। इसके स्वदेशी डिजाइन-विकास से भविष्य में इस अहम तकनीक के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटने की उम्मीद जताई गई है।

वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ेगी


वायुसेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्धक क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई प्रस्ताव भी मंजूर हुए हैं। इसके साथ ही ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ) की खरीद को मंजूरी दी गई, जो दुश्मन के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग क्षमता उपलब्ध कराएगा। एक और अहम फैसला डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड सिस्टम की स्थापना का है, जिसके तहत मौजूदा कागजी पहचान पत्रों, पास और परमिट की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (RFID) आधारित स्मार्ट कार्ड इस्तेमाल किए जाएंगे।

भारतीय उद्योग से 98% खरीद

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मंजूर की गई कुल AoN में से लगभग 98% खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी। यह आंकड़ा 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत रक्षा उत्पादन को स्वदेशी बनाने की सरकार की नीति के अनुरूप है और घरेलू रक्षा कंपनियों के लिए बड़े कारोबारी अवसर की ओर इशारा करता है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

यह मंजूरी थल, जल और नभ तीनों क्षेत्रों की क्षमताओं को एक साथ बढ़ाने पर केंद्रित है। रक्षा डील CBRN खतरों से निपटने से लेकर समुद्री निगरानी और हवाई युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए, GBMPJ और अरुध्रा रडार जैसी खरीद इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व निगरानी तकनीक पर बढ़ते फोकस को दिखाती है। यह डील 98% स्वदेशी खरीद का आंकड़ा घरेलू रक्षा उद्योग के लिए बड़ा अवसर पैदा करता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि AoN सिर्फ पहला औपचारिक कदम है। वास्तविक अनुबंध और आपूर्ति में अभी समय लगेगा।