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वेबसाइट पर मिले अधिक डिस्काउंट तो रहें सावधान: ऑनलाइन शॉपिंग के समय कैसे करें असली और नकली की पहचान?

क्या आप जानते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग के समय सस्ते दामों पर मिलने वाले सामान के पीछे ठगी का जाल हो सकता है? ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आपकी छोटी सी गलती से नकली उत्पाद मिल सकते हैं या धोखाधड़ी हो सकती है।
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Vinay Shakya

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Updated: 4 Oct 2026, 7:09 PM IST

Online Smart Shopping Tips

सांकेतिक इमेज (सोर्स-gemini)

ऑनलाइन सस्ते दामों पर मिलने वाले सामान का आकर्षण तो है, लेकिन इसके साथ जुड़ा खतरा भी कम नहीं है। जब कीमतें असामान्य रूप से कम हों, तो सावधानी आवश्यक हो जाती है। आइए समझते हैं कि सस्ते में मिलने वाले सामान में वास्तव में कौन-कौन से जोखिम छिपे हो सकते हैं और आप उन्हें कैसे पहचान सकते हैं?

सस्ते में मिलने वाले सामान में छिपा खतरा

जब कोई ब्रांडेड उत्पाद 70–80% कम कीमत पर बिक रहा हो, तो वह अक्सर नकली या मिलावटी होता है। इंटरपोल भी चेतावनी देता है कि अगर कीमत बहुत ही अच्छी लगती है, तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि यह अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है।

नकली वेबसाइटें और सोशल मीडिया पर चलने वाले फर्जी स्टोर भी आम हैं। कई बार ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन उत्पाद नहीं मिलता या फिर घटिया गुणवत्ता वाला मिलता है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भी बताया है कि ऐसे फर्जी पोर्टलों पर भुगतान करने के बाद ग्राहक को या तो सामान नहीं मिलता, या फिर नकली/पुराना सामान भेजा जाता है।

सरकारी एजेंसियां भी सतर्क हैं। बीआईएस ने मार्च 2025 में दिल्ली और आसपास के गोदामों से 3,500 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद जब्त किए, जिन पर आईएसआई मार्क नहीं था या नकली लेबल था। कुल कीमत लगभग ₹70 लाख थी।

त्योहारी सीजन से पहले सीबीआईसी (कस्टम्स और अप्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर सस्ते और संदिग्ध उत्पादों की जांच तेज कर दी है, खासकर उन उत्पादों पर जो बिना आवश्यक प्रमाण-पत्रों के बेचे जा रहे हैं।

सस्ते सामान का जोखिम

सस्ते में मिलने वाले नकली सामान केवल पैसों का नुकसान नहीं कराते, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं। नकली कॉस्मेटिक्स या सप्लीमेंट्स से त्वचा में जलन, संक्रमण या अन्य गंभीर समस्या हो सकती है। इंटरपोल ने चेताया है कि नकली इलेक्ट्रॉनिक सामान आग या करंट का कारण बन सकते हैं, और नकली खाद्य या दवाएं स्वास्थ्य के लिए सीधे तौर पर खतरनाक हो सकती हैं। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा का खतरा भी है। फर्जी वेबसाइटें आपके बैंक या कार्ड की जानकारी चुरा सकती हैं और उसे डार्क वेब पर बेच सकती हैं।

कानूनी सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकार

भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और ई-कॉमर्स नियम, 2020 ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में उपभोक्ता के क्या अधिकार हैं। यदि आपको नकली उत्पाद मिलता है, तो आप न केवल रिफंड मांग सकते हैं, बल्कि मानसिक कष्ट और समय की हानि के लिए भी मुआवजा ले सकते हैं। साथ ही, फर्जी उत्पादों की बिक्री गैरकानूनी है। यह बौद्धिक संपदा का उल्लंघन भी है और इसके लिए दंडनीय कार्रवाई हो सकती है।

कैसे करें असली और नकली की पहचान?

  • केवल आधिकारिक विक्रेता से ही खरीदें- जैसे Amazon या Flipkart पर ब्रांड का अपना स्टोर।
  • उत्पाद विवरण में FSSAI (खाद्य/सप्लीमेंट्स के लिए) या BIS/ISI (इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए) प्रमाण-पत्र देखें।
  • कीमतों की तुलना करें- यदि कोई ब्रांडेड आइटम बिना किसी सेल के 70–80% कम कीमत में मिल रहा है, तो सतर्क हो जाएं।
  • वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचें- URL में https, सही डोमेन नाम, स्पष्ट संपर्क विवरण और ग्राहक सेवा होनी चाहिए।
  • सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहें- इंस्टाग्राम या फेसबुक पर चलने वाले बहुत सस्ते ऑफर अक्सर फर्जी होते हैं।
  • COD (कैश ऑन डिलीवरी) विकल्प चुनें, खासकर नए या अनजाने प्लेटफॉर्म पर।
  • खरीदारी का रिकॉर्ड रखें- ऑर्डर, स्क्रीनशॉट, चैट, रसीद, ताकि आवश्यकता पड़ने पर शिकायत दर्ज कर सकें।

क्या करें अगर धोखा हो गया?

यदि आपको नकली या घटिया उत्पाद मिला है, तो सबसे पहले रिटर्न/रिफंड की प्रक्रिया शुरू करें। इसके अलावा, आप उपभोक्ता फोरम या पुलिस में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। कानूनी रूप से, आपको मुआवजा भी मिल सकता है, विशेषकर मानसिक कष्ट और समय की बर्बादी के लिए।

बचाव के लिए व्यवहारिक कदम

त्योहारी सीजन जैसे समय में खरीदारी का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार और एजेंसियां जांच तेज कर रही हैं, लेकिन आपकी सतर्कता सबसे बड़ी सुरक्षा है। हमेशा थोड़ा समय निकालकर विक्रेता और उत्पाद की जांच करें। यह आपको धोखाधड़ी से बचा सकता है। ध्यान रखें कि सस्ते दामों का आकर्षण समझ में आता है। लेकिन असली बचत वही है जो आपको गुणवत्ता, सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के साथ मिलती है।