15 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इंटरनेट बंद होने पर भी फोन में दिखेगा कॉलर का नाम? देश में 1 नवंबर से लागू होगा CNAP, जानिए इस तकनीकि के फायदे

भारत में 1 नवंबर से CNAP सिस्टम लागू होने जा रहा है। इसके तहत अनजान नंबर से कॉल आने पर भी फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम और नंबर दिखाई देगा, लेकिन क्या मोबाइल का इंटरनेट बंद होने पर भी यह सिस्टम काम करेगा? क्या बिना मोबाइल डेटा के भी अनजान कॉलर का नाम स्क्रीन पर दिखेगा? आइए, जानते हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

•

image

Vinay Shakya

•

Oct 15, 2026

cnap system implemented in india

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत में एक नवंबर से CNAP सिस्टम लागू होने जा रहा है। इसके तहत अनजान नंबर से कॉल आने पर भी फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम और नंबर दिखाई देगा, लेकिन क्या मोबाइल का इंटरनेट बंद होने पर भी यह सिस्टम काम करेगा? क्या बिना मोबाइल डेटा के भी अनजान कॉलर का नाम स्क्रीन पर दिखेगा? इस लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब और इस नई तकनीकि के बारे में समझेंगे।

क्या है CNAP सिस्टम?

आजकल अधिकतर चीजों के लिए इंटरनेट पर थर्ड-पार्टी एप्स की जरूरत पड़ती है, वहीं टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क्स पर आने वाला यह नया कॉलर ID सिस्टम इस मामले में बेहद अलग और खास माना जा रहा है। DoT के हाल की आदेश के अनुसार, भारत में जियो, एयरटेल, वोडा और बीएसएनएल जैसी सभी टेलीकॉम कंपनियों को एक नवंबर 2026 से इस सेवा को अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

CNAP सिस्टम की बात करें तो इसका पूरा नाम कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन है। आसान तरीके से समझें तो यह एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें कॉल आने वाले का नाम भी दिखाया जाता है। फिर चाहे वह अपने आपके डिवाइस में सेव हो या नहीं।

इंटरनेट बंद होने पर भी काम करेगा CNAP?

अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि क्या फोन का इंटरनेट या वाई-फाई बंद होने पर सरकार का नया सीएनएपी सिस्टम काम करेगा या नहीं, तो इसका जवाब है- हां। इंटरनेट न होने पर भी यह पूरी तरह से काम करेगा।

इंटरनेट पर निर्भर क्यों नहीं है CNAP?

सीधे टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ाव: यह सुविधा सीधे आपके टेलीकॉम ऑपरेटर के इंटरनल नेटवर्क के जरिए काम करती है। जब भी आपके फोन पर किसी नंबर से कॉल आती है, तो ऑपरेटर का बैकएंड नेटवर्क बिना किसी इंटरनेट डेटा के कॉलर की पहचान कर लेता है।

KYC डेटाबेस का इस्तेमाल: जब कॉल आती है, तो यह सिम कार्ड खरीदते समय दिए गए आधिकारिक केवाईसी (Know Your Customer) डेटाबेस के आधार पर रजिस्टर्ड नाम सीधे मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश कर देता है।

सपोर्टेड नेटवर्क: वर्तमान में यह तकनीक मुख्य रूप से 4G और 5G नेटवर्क पर काम करेगी। पुराने 2G और 3G नेटवर्क पर इसे बाद में जोड़े जाने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल इसे लेकर (2G और 3G नेटवर्क) अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

आपके फोन पर कैसे शुरू होगी यह सर्विस?

कोई एप या सेटिंग नहीं: इसे चालू करने के लिए न तो आपको कोई थर्ड-पार्टी एप डाउनलोड करने की जरूरत होगी और न ही फोन की सेटिंग्स में जाकर कोई बदलाव करना पड़ेगा।

बाय-डिफॉल्ट एक्टिव: टेलीकॉम कंपनियां इस सेवा को अपने स्तर (नेटवर्क लेवल) से ही सभी ग्राहकों के लिए डिफॉल्ट रूप से चालू कर देंगी। वहीं, अगर कोई यूजर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो वह इस सिस्टम को ऑफ भी कर सकता है।

असली नाम की डिस्प्ले: जब भी कोई अनजान नंबर से आपको कॉल करेगा, तो टेलीकॉम कंपनी आपके फोन में इंटरनेट न होने पर भी सीधे KYC डेटाबेस से उस व्यक्ति का वही असली नाम स्क्रीन पर दिखाएगी जो उसने सिम लेते समय सरकारी दस्तावेजों में दिया था।

सेव किए गए नाम को प्राथमिकता: अगर कोई ऐसा व्यक्ति कॉल करता है जिसका नंबर आपने पहले से अपने फोन में किसी नाम से सेव किया हुआ है, तो स्क्रीन पर आपकी ओर से सेव किया गया नाम ही दिखाई देगा।

क्यों खास है यह तकनीक?

बिना इंटरनेट के काम करने की यह खूबी इस सिस्टम को आम यूजर के लिए और भी ज्यादा उपयोगी हो सकता है। क्योंकि देश के ऐसे हिस्से जहां मोबाइल इंटरनेट की स्पीड धीमी है या नेटवर्क गायब रहता है, वहां भी यह कॉलर आईडी बिना किसी रुकावट के काम करेगी।