
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए सितंबर राहत भरा रहा। कामा ज्वेलरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में देश का रत्न एवं आभूषण निर्यात 9.43 प्रतिशत बढ़कर 2.95 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में 2.69 अरब डॉलर था। रिपोर्ट गुरुवार को जारी हुई।
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान कुल निर्यात 3.07 प्रतिशत बढ़कर 14.30 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 13.87 अरब डॉलर था। यानी पहली छमाही की वृद्धि सितंबर की तेजी के मुकाबले धीमी रही। इसका मतलब है कि शुरुआती महीनों में क्षेत्र दबाव में था और सितंबर में रफ्तार पकड़ी।
वित्त वर्ष की पहली छमाही में सकल आयात सालाना आधार पर 5.29 प्रतिशत बढ़कर 11.04 अरब डॉलर हो गया। अकेले सितंबर में आयात 25.48 प्रतिशत बढ़कर 2.07 अरब डॉलर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात और आयात, दोनों में तेजी सकारात्मक संकेत है। इसकी वजह घरेलू स्तर पर त्योहारों के दौरान रही मांग और विदेशों में आने वाले छुट्टियों के सीजन की तैयारी है।
रिपोर्ट के अनुसार हीरे के निर्यात का मूल्य घटा, लेकिन मात्रा बढ़ी। यानी प्रति कैरेट मिलने वाली कीमत कम हुई है, मांग नहीं। कच्चे हीरों का बढ़ा आयात भारत की सबसे बड़े हीरा प्रसंस्करण केंद्र की हैसियत को रेखांकित करता है। यह रुझान आगे और मजबूत होने की संभावना जताई गई है। इसी तरह की तस्वीर पिछले महीनों में भी दिखी थी।
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में निर्यात डॉलर के लिहाज से 3.14 प्रतिशत बढ़कर 2.30 अरब डॉलर रहा। इसमें जड़े हुए सोने के आभूषणों का निर्यात 51.22 प्रतिशत उछलकर 642.85 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि कटे-पॉलिश हीरों का निर्यात 4.93 प्रतिशत घटकर 924.51 मिलियन डॉलर रह गया। अप्रैल-अगस्त में कुल निर्यात 2.58 प्रतिशत बढ़कर 11.47 अरब डॉलर रहा।
कामा ज्वेलरी की रिपोर्ट के अनुसार, सादे सोने के आभूषणों का प्रदर्शन सोने की ऊंची कीमतों से प्रभावित रहा। इसके उलट जड़े हुए सोने के आभूषणों के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यह दिखाता है कि विदेशी खरीदार डिजाइन-आधारित और मूल्य वर्धित गहनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली ने भी अगस्त के आंकड़ों पर कहा था कि जड़ाऊ गहनों की तेज वृद्धि भारत की कच्चे माल को तैयार आभूषण में बदलने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
अमेरिका भारतीय आभूषणों का एक बड़ा बाजार है और वहां शुल्क का मुद्दा लंबे समय से उद्योग की चिंता रहा है। एक उद्योग विज्ञप्ति के अनुसार 2026 की शुरुआत में अंतिम रूप पाए भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे ने आभूषणों पर शुल्क 50 प्रतिशत से ऊपर से घटाकर 16 प्रतिशत किया है, और GJEPC इससे करीब 3 अरब डॉलर के निर्यात अवसर का अनुमान लगाता है। हालांकि यह दावा कंपनी की विज्ञप्ति पर आधारित है, इसलिए इसकी पुष्टि सरकारी स्रोतों से की जानी चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट्स का अनुमान है कि त्योहारी और शादी के मौसम में की गति और तेज होगी। कम से कम चालू तिमाही में निर्यात में और बढ़त दिख सकती है। रिपोर्ट के अनुसार यह सुधार उस क्षेत्र के लिए अच्छी खबर है जो लंबे समय से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। हालांकि बाजार की नजर सोने की कीमतों और अमेरिकी बाजार की मांग पर बनी रहेगी, क्योंकि ये दोनों कारक आगे की वृद्धि तय करेंगे।
Updated on:
15 Oct 2026 07:38 pm
Published on:
15 Oct 2026 07:38 pm
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