
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
फ्रेंच फ्राइज (French Fries) स्नैक का इतिहास काफी दिलचस्प है। फ्रेंच फ्राइज की अहमियत का अंदाजा आप साल 2005 की एक घटना से लगा सकते हैं। म्यूनिख की एक आर्ट गैलरी में स्टीफन बोनेनबर्गर नाम के एक कलाकार ने अपनी एक खास कलाकृति प्रदर्शित की थी। उन्होंने फ्रेंच फ्राइज के दो असली टुकड़ों को क्रॉस के आकार में रखा। फिर बिल्कुल उन्हीं दो फ्राइज की नकल करते हुए एक 'सोने का क्रॉस' बनाया और अपनी इस आर्ट को Pommes d' का नाम दिया।
म्यूनिख की आर्ट गैलरी में सिर्फ वह सोने का क्रॉस ही नहीं रखा गया था, बल्कि एग्जीबिशन में वे दो असली फ्रेंच फ्राइज भी रखे गए थे, जिन्हें देखकर वह सोने का क्रॉस बनाया गया था। विवाद तब खड़ा हुआ जब गैलरी से वे असली फ्राइज गायब हो गए, जिन्हें देखकर यह क्रॉस बनाया गया था। वे सादे फ्राइज कोई आम फ्राइज नहीं थे, बल्कि आर्टिस्ट की कलाकृति का मूल आधार थे। इसलिए आर्टिस्ट ने गैलरी पर केस कर दिया। अदालत ने भी इसे 'कला' का नुकसान माना और गैलरी को आदेश दिया कि वे आर्टिस्ट को हर्जाने के तौर पर 2,000 यूरो दें।
बेल्जियम की कहानी: कहा जाता है कि मीयूज नदी के आसपास रहने वाले बेल्जियम के लोग छोटी मछलियों को तल कर खाते थे। कड़ाके की सर्दियों में जब नदी जम जाती और मछली नहीं मिलती, तो वे आलू को लंबा काटकर तल लेते थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिकी सैनिकों ने इसे खाया, तो उन्होंने इसे 'फ्रेंच फ्राइज' कह दिया, क्योंकि उस इलाके के लोग मुख्य रूप से फ्रेंच भाषा बोलते थे।
फ्रांस का दावा: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सच में फ्रांस ही इनका घर है। उनके मुताबिक, 1780 के दशक में पेरिस के पोंट नेउफ पुल पर स्ट्रीट वेंडर्स ने सबसे पहले इन्हें बेचना शुरू किया था।
स्पेन का कनेक्शन: एक थ्योरी यह भी है कि दक्षिण अमेरिका से आलू को यूरोप लाने वाले सबसे पहले लोग स्पेनिश ही थे। 1553 में पेड्रो सिएजा डी लियोन नामक एक स्पेनी इतिहासकार ने अपनी किताब में आलू का जिक्र 'उबले हुए चेस्टनट जितने मुलायम' भोजन के रूप में किया था। चूंकि, स्पेन में खाने को तेल में तलने का पुराना रिवाज था, इसलिए हो सकता है कि उन्होंने ही सबसे पहले आलू को तला हो। हालांकि, तब आलू गोल्फ की गेंद जितने छोटे और ऊबड़-खाबड़ होते थे।
फ्रेंच फ्राइज का आयात करने वाला भारत फ्रेंच फ्राइज का निर्यात करने लगा है। देश बड़ी मात्रा में प्रसंस्कृत आलू का उत्पादन हो रहा है, जिसका इस्तेमाल फ्रेंच फ्राइज और वेफर जैसी कुरकुरी चीजें बनाने में होता है। गुजरात प्रसंस्कृत आलू का सबसे बड़ा उत्पादक और फ्रेंच फ्राइज़ व वेफर्स का प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा है।
प्रसंस्कृत आलू के उत्पादन में गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश और पंजाब का स्थान है। साल 2004-05 में प्रसंस्कृत आलू का उत्पादन एक लाख टन से भी कम था। इसकी खेती केवल 4 हजार हेक्टेयर में होती थी। दो दशकों में, इस किस्म का उत्पादन 10 गुना बढ़कर लगभग 37 हजार हेक्टेयर में 11.50 लाख टन हो गया, उत्पादन क्षेत्र में भी 9 गुना वृद्धि हुई।
गुजरात में प्रसंस्करण-ग्रेड आलू की खेती होती है, जिसकी आपूर्ति देश भर के प्रसंस्कृत खाद्य उद्योगों को फ्रेंच फ्राइज, चिप्स या फ्रोजन फ़ूड बनाने के लिए बड़े पैमाने पर की जाती है। 2024-25 में, राज्य ने 48.59 लाख टन आलू का उत्पादन किया, जिसमें से 25% से अधिक प्रसंस्कृत आलू हैं। शेष कुफरी आलू हैं, जिनका उपयोग सब्जियां बनाने में किया जाता है। गुजरात में प्रसंस्कृत आलू के कुल उत्पादन का लगभग 60% वेफर्स बनाने में और लगभग 40% फ्रेंच फ्राइज बनाने में इस्तेमाल होता है।
Updated on:
16 Sept 2026 03:20 pm
Published on:
16 Sept 2026 03:20 pm
