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PM2.5 के बाद अब ‘ओजोन’ नया खतरा! गर्मी बढ़ते ही क्यों जहरीली हो जाती है शहरों की हवा?

Ground Level Ozone Pollution India: भारत के कई शहरों में ग्राउंड लेवल ओजोन नया और तेजी से बढ़ता खतरा है, WHO भी मान चुका मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा वायु प्रदूषक...
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 07, 2026

Ground Level Ozone Pollution India

Ground Level Ozone Pollution India: भारत के लिए ग्राउंड लेवल ओजोन प्रदूषण नया और तेजी से बढ़ता खतरा (AI Creative)

Ground Level Ozone Pollution India: जब भी वायु प्रदूषण की बात होती है तो, सबसे पहले PM2.5 और PM10 का नाम आता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के कई शहरों में ग्राउंड लेवल ओजोन तेजी से उभरता हुआ प्रदूषक है। इसकी खास बात यह है कि यह सीधे किसी फैक्ट्री या वाहन से नहीं निकलता, बल्कि तेज धूप, गर्मी और हवा में मौजूद प्रदूषकों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। इसी वजह से गर्मियों और दोपहर के समय इसका स्तर सबसे अधिक पाया जाता है।

क्या है ग्राउंड लेवल ओजोन?

ओजोन दो तरह की होती है। ऊपरी वायुमंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में मौजूद ओजोन पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। लेकिन जमीन के करीब बनने वाली ग्राउंड लेवल ओजोन एक हानिकारक वायु प्रदूषक है। यह तब बनती है जब वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) तेज धूप और उच्च तापमान में आपस में प्रतिक्रिया करते हैं।

गर्मी बढ़ने पर क्यों बढ़ता है खतरा?

भारतीय उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में तेज धूप और लंबे समय तक रहने वाला उच्च तापमान ओजोन बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। यही कारण है कि अप्रैल से जून के बीच तथा दोपहर के समय इसका स्तर अधिक देखा जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी भविष्य में इस समस्या को और गंभीर बना सकती है।

किन शहरों में बढ़ रही चिंता?

  • समस्या अब सिर्फ 'कुछ मौकों' पर मानकों के करीब पहुंचने तक सीमित नहीं रही, बल्कि हाल के आंकड़े कहीं ज्यादा गंभीर तस्वीर दिखाते हैं। पर्यावरण थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की 2021 से 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से 10 मई 2026 के बीच देश के 25 बड़े शहरों में हुए अध्ययन में 15 शहरों में गर्मियों के दौरान ग्राउंड-लेवल ओजोन का स्तर सरकार द्वारा तय सुरक्षित सीमा से लगातार ऊपर पाया गया।
  • दिल्ली-NCR की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही। अध्ययन अवधि के सभी 71 दिनों तक यहां ओजोन का स्तर राष्ट्रीय मानक से ऊपर दर्ज किया गया, यानी यह अब सिर्फ मौसमी नहीं बल्कि, लगभग साल भर बना रहने वाला खतरा बन चुका है। गर्मियों में सबसे ज्यादा औसत ओजोन स्तर चंडीगढ़ में दर्ज हुआ, इसके बाद जयपुर और अहमदाबाद का स्थान रहा। इसके अलावा मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (MMR) भी बड़े हॉटस्पॉट में गिना गया है। CPCB द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के 45 में से 22 निगरानी केंद्रों पर ओजोन स्तर मानक से ऊपर पाया गया।

यानी अब यह समस्या केवल दिल्ली-मुंबई जैसे परंपरागत प्रदूषण-प्रभावित महानगरों तक सीमित नहीं रही। पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु के साथ-साथ चंडीगढ़, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। औद्योगिक और तेजी से शहरीकरण वाले शहर भी इससे अछूते नहीं हैं।

स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

ग्राउंड लेवल ओजोन फेफड़ों के ऊतकों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, गले और आंखों में जलन, अस्थमा के मरीजों में अटैक का खतरा, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक जोखिम, लंबे समय तक संपर्क रहने पर फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं परेशान करती हैं। WHO भी ओजोन को मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण वायु प्रदूषक मानता है।

फसलों पर भी असर

ओजोन केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि गेहूं, सोयाबीन, चावल और अन्य फसलों की उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकती है। पौधों की पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम होने से उत्पादन घटने की आशंका रहती है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 को नियंत्रित करने के प्रयासों के साथ-साथ NOx और VOCs के उत्सर्जन को भी कम करना होगा। केवल धूल कम करने से ओजोन की समस्या हल नहीं होगी। वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, स्वच्छ ईंधन और वैज्ञानिक निगरानी पर समान रूप से काम करना जरूरी है।

क्या करें आम लोग?

  • दोपहर 12 से 4 बजे के बीच भारी व्यायाम से बचें, खासकर यदि AQI या ओजोन स्तर ऊंचा हो।
  • अस्थमा या फेफड़ों के मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं साथ रखें।
  • स्थानीय वायु गुणवत्ता बुलेटिन पर नजर रखें।
  • निजी वाहनों का कम उपयोग करें और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें।

भारत में वायु प्रदूषण की बहस अभी भी PM2.5 के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि ग्राउंड लेवल ओजोन तेजी से उभरती चुनौती है। बढ़ती गर्मी, शहरीकरण और वाहनों के उत्सर्जन के बीच यह प्रदूषक आने वाले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि वायु प्रदूषण की चर्चा केवल धूल और धुएं तक सीमित न रहे, बल्कि ओजोन जैसे अदृश्य लेकिन खतरनाक प्रदूषकों को भी नीति और जनजागरूकता के केंद्र में लाया जाए।