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बगीचे में खाली जमीन का करें सही इस्तेमाल; उगाएं अदरक-हल्दी, कम लागत में डबल हो जाएगी आमदनी

आपने कभी सोचा है कि आपके बगीचे की खाली जगह आपकी आमदनी को दोगुना कर सकती है? किसान, बगीचे की खाली जगह में अदरक और हल्दी जैसी फसलें उगाकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 26, 2026

ginger and turmeric cultivation

सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)

आम, अमरूद, कटहल जैसे पेड़ों के बीच खाली जमीन में अदरक एवं हल्दी जैसी सहफसली फसलें उगाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इस खाली जमीन का सही उपयोग किसानों को बड़ा मुनाफा दे सकता हैं। यदि आपके पास फलदार बगीचा है और खाली जगह है, तो इंटरक्रॉपिंग एक व्यावहारिक और लाभदायक विकल्प हो सकता है। शुरुआत में छोटे पैमाने पर प्रयोग करें, जैसे एक या दो बेड और अनुभव के आधार पर विस्तार करें। यह तरीका न केवल आपकी आमदनी बढ़ाएगा, बल्कि जमीन का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करेगा। बाग में खाली पड़ी जमीन का उपयोग कैसे करें, आइए आसान तरीके से समझते हैं।

पेड़ों के बीच अदरक-हल्दी उगाएं

अदरक और हल्दी दोनों ही छाया पसंद फसलें हैं, जो तेज धूप की बजाय छनकर आने वाली रोशनी में बेहतर बढ़ती हैं। इसलिए इन्हें आम, अमरूद, नींबू या कटहल जैसे बड़े फलदार पेड़ों के बीच उगाया जा सकता है। इस तरह की खेती से खाली पड़े हिस्से का उपयोग होता है और अतिरिक्त आय भी मिलती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि आम के बगीचों में इन फसलों को लगाने से मुख्य फसल पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता, बल्कि लाभदायक परिणाम मिलते हैं।

लाभ-लागत अनुपात और आय

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के शोध में पाया गया कि आम के बगीचे में अदरक और हल्दी की सहफसली खेती से अतिरिक्त आय मिलती है। अदरक में प्रति हेक्टेयर लगभग ₹1,79,996 की शुद्ध आय और लाभ-लागत अनुपात (B:C) 2.04 रहा, जबकि हल्दी में ₹1,29,232 की आय और B:C अनुपात 1.86 रहा—जबकि केवल आम की खेती में यह अनुपात 1.81 था। इससे स्पष्ट होता है कि खाली जगह का उपयोग करके किसान अपनी आमदनी में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

आंवला बगीचों में इंटरक्रॉपिंग का अनुभव

राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) के अध्ययन में पाया गया कि 6–8 वर्ष पुराने आंवला बगीचों में हल्दी और अदरक की सहफसली खेती से लाभदायक परिणाम मिले। आंवला + हल्दी संयोजन में लाभ-लागत अनुपात 6.29 था, जबकि आंवला + अदरक में यह 3.44 था। इससे प्रति हेक्टेयर ₹3.99 लाख तक अतिरिक्त आय का अनुमान लगाया गया।

अन्य पेड़-पौधों के साथ इंटरक्रॉपिंग के उदाहरण

केरल में नारियल, काजू, रबर और होम गार्डन जैसी प्रणालियों में अदरक और हल्दी की उपज अलग-अलग रही। उदाहरण के लिए, काजू के बगीचों में हल्दी की उपज 7.63 Mg/ha रही, जबकि खुले खेत में यह 7.01 Mg/ha थी। जम्मू में आम के बगीचों में किए गए शोध में हल्दी और अदरक दोनों को सफलतापूर्वक उगाया जा सकता पाया गया, और हल्दी ने सबसे अधिक उपज दी।

कैसे करें शुरुआत?

सबसे पहले, बगीचे में खाली पड़े हिस्से की पहचान करें। जहां पेड़ों की छाया पर्याप्त हो और मिट्टी उपजाऊ हो, ऐसी जगह का चयन करें।

  1. मिट्टी की तैयारी: खाली जमीन को अच्छी तरह जुताई करें और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाएं, ताकि मिट्टी भुरभुरी और उपजाऊ बने।
  2. ऊंचे बेड बनाएं: जलभराव से बचने के लिए लगभग 9 इंच ऊंचे बेड तैयार करें।
  3. बीज का चयन: स्वस्थ, रोगमुक्त और अंकुरित कंद (राइजोम) चुनें—खराब कंद से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
  4. बुवाई की दूरी: कतार से कतार की दूरी 12–15 इंच और पौधे से पौधे की दूरी 8–10 इंच रखें। कंद को 2–3 इंच गहराई पर लगाएं।
  5. सिंचाई और देखभाल: मानसून के बाद हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन जलभराव न हो।
  6. फसल चक्र: बुवाई के बाद 8–9 महीने में फसल तैयार हो जाती है—सितंबर-अक्टूबर में बढ़वार, नवंबर-दिसंबर में कंद का आकार बढ़ना, और जनवरी-फरवरी तक फसल पक जाती है।

सावधानियां और सुझाव

  • जलभराव से बचें: अधिक नमी से कंद सड़ सकते हैं।
  • रोगमुक्त कंद चुनना सफलता की पहली शर्त है।
  • फसल चक्र के दौरान मिट्टी की नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें।
  • मुख्य फसल (जैसे आम या आंवला) की देखभाल भी नियमित रखें। इंटरक्रॉपिंग से उसका विकास प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सारांश तालिका: लाभ-लागत अनुपात तुलना

इंटरक्रॉपिंग सिस्टमलाभ-लागत अनुपात (B:C)अतिरिक्त आय (₹/ha)
आम + अदरक2.04लगभग ₹1,79,996
आम + हल्दी1.86लगभग ₹1,29,232
आंवला + हल्दी6.29लगभग ₹3.99 लाख
आंवला + अदरक3.44-------------------------