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जब महिलाओं को नजर आया करियर का एक नया रास्ता! जानिए भारत की पहली मरीन इंजीनियर कैसे बनीं मिसाल?

India first marine engineer sonali banerjee: क्या आप जानते हैं कि एक महिला ने समुद्र की लहरों को चुनौती देकर इतिहास रचा था? जानिए मरीन इंजीनियर सोनाली बनर्जी की प्रेरणादायक कहानी, जिसने न केवल सपने देखे, और उन्हें सच कर दिखाया, देश भर की महिलाओं और बेटियों के लिए बन गई प्रेरणा
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 27, 2026

India First Marine Engineer

India First Marine Engineer: आप भी जानिए क्या है सोनाली बनर्जी की सफल यात्रा की कहानी? (AI Creative)

India first marine engineer sonali banerjee: आज की तारीख, 27 अगस्त, भारतीय सामाजिक इतिहास में कई मायनों में महत्वपूर्ण रही है। इस दिन के घटनाक्रमों में से एक विशेष और प्रेरणादायक उपलब्धि है, सोनाली बनर्जी का 1999 में भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनना।

यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत सफलता थी, बल्कि महिलाओं के लिए समुद्री क्षेत्र जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्र में एक नई राह खोलने वाली कहानी भी थी। patrika.com पर जानिए इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पूरी कहानी और उसका असर भी।

इतिहास में आज, सोनाली बनर्जी की उपलब्धि

27 अगस्त 1999 को सोनाली बनर्जी ने भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि उस समय की सामाजिक और तकनीकी बाधाओं को पार करने का प्रतीक थी। सोनाली का जन्म और पालन-पोषण इलाहाबाद में हुआ। उस दौर में लड़कियों के लिए करियर के रास्ते गिने-चुने माने जाते थे और मरीन इंजीनियरिंग जैसा क्षेत्र तो सोचने में भी नहीं आता था।

चाचा ने दिए सपने, सोनाली ने किए सच

सोनाली को इस दिशा में मोड़ने का श्रेय जाता है उनके चाचा को। उनके चाचा नौसेना में कार्यरत थे। बचपन से जहाजों और समंदर की कहानियां सुनते-सुनते सोनाली के मन में भी यही सपना पलने लगा। भले ही उस समय यह एक 'नॉट सो लेडिज़' यानी महिलाओं के लिए न बना पेशा समझा जाता था।

कोलकाता के MERI में दाखिला और अकेली महिला होने की चुनौती

सोनाली ने कोलकाता के पास तरातला स्थित मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (MERI) से अपना कोर्स पूरा किया। यहां 1500 कैडेट्स के बैच में वे अकेली महिला थीं। हालात इतने अनजान थे कि कॉलेज प्रशासन को यह तक तय करने में उलझन हुई कि उन्हें ठहराया कहां जाए। आखिरकार लंबी चर्चा के बाद उन्हें अधिकारियों के क्वार्टर में जगह दी गई। यह छोटी सी बात बताती है कि उस दौर में एक महिला के लिए इस क्षेत्र में कदम रखना संस्थागत तौर पर भी कितना नया और मुश्किल था।

समाज और राजनीति पर इसका प्रभाव

यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि महिलाओं के लिए तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बनी। उस समय भारतीय राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक संकेत था। यह उपलब्धि उन युवतियों के लिए एक संदेश थी कि वे पारंपरिक सीमाओं को पार कर अपने करियर में आगे बढ़ सकती हैं।

1999 की यह उपलब्धि तब सामने आई, जब भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण और आरक्षण जैसे मुद्दे जोर पकड़ रहे थे। सोनाली बनर्जी की सफलता ने यह दिखाया कि जब अवसर मिलते हैं, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं। यह उपलब्धि उस समय की सरकारों और संस्थानों के लिए भी अहम थी कि महिलाओं को तकनीकी शिक्षा और करियर में सिर्फ सपोर्ट की जरूरत है।

ये इत्तेफाक भी दिलचस्प

27 अगस्त की तारीख भारत के लिए एक और वजह से खास है। इसी दिन गर्टुड एलिस राम भारतीय सशस्त्र बलों की पहली महिला मेजर जनरल बनी थीं। दोनों उपलब्धियों के बीच दशकों का फासला है, लेकिन एक ही तारीख पर दो अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं ने अपने-अपने "पहली बार" वाले इतिहास दर्ज किए।

सोनाली अकेली मिसाल नहीं रहीं

सोनाली की उपलब्धि किसी अपवाद तक सीमित नहीं रही। इसके सालों बाद, मार्च 2021 में समुद्री इतिहास में पहली बार एक कार्गो जहाज 'एमटी स्वर्ण कृष्णा' को पूरी तरह महिला कप्तान और महिला अधिकारियों की टीम ने संचालित किया। यह विश्व मैरीटाइम इतिहास में भी पहली बार हुआ था। यानी सोनाली ने जो दरवाजा 1999 में खोला, उसके बाद भारतीय महिलाओं ने समुद्री क्षेत्र में कदम दर कदम आगे बढ़ना जारी रखा।

आज इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहें तो क्या करें?

आज मरीन इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए 12वीं (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स के साथ) के बाद MERI कोलकाता, MERI चेन्नई जैसे संस्थानों के एंट्रेंस एग्जाम या इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग के जरिए दाखिला लिया जा सकता है। पहले जहां यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह पुरुषों तक सीमित था, वहीं आज कई शिपिंग कंपनियां और सरकारी योजनाएं महिला कैडेट्स को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही हैं।

समय की कसौटी पर- जानिए आज क्यों महत्वपूर्ण हो जाती है ये उपलब्धि

आज, 27 अगस्त (2026) को जब हम इस उपलब्धि को याद करते हैं, तो यह हमें यह सोचने पर विवश करता है कि उस दिन से अब तक महिलाओं की तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भागीदारी कितनी बढ़ी है। यह उपलब्धि आज भी प्रेरणा देती है। खासतौर पर उन महिलाओं को जो समुद्री, इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी क्षेत्रों में कदम रखना चाहती हैं।

जानिए, क्या बदल गया, क्या शेष है

आज, 2026 में महिलाओं की भागीदारी इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा में बढ़ी है। लेकिन समुद्री क्षेत्र जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में अब भी कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों में प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी, जागरुकता का अभाव और सामाजिक पूर्वाग्रह शामिल हैं।

सोनाली बनर्जी की कहानी बताती है कि रास्ता चाहे कितना भी अकेला क्यों न हो, लेकिन ऐसी जगहों पर जब आप दरवाजा बनाते हैं, तो सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि पीछे आने वालों को भी नई राह दिखा जाते हैं।