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पहली बार भारत की धरती पर जापानी फाइटर जेट! जानिए Veer Guardian 26 की कहानी क्या हम बनेंगे सुपरपावर?

India Japan defence cooperation: भारत और जापान का रक्षा सहयोग अब एक नई ऊंचाई पर है? राजनाथ सिंह और जापानी रक्षा मंत्री की मुलाकात के बाद पहली बार JASDF के लड़ाकू विमान भारत आएंगे। जानिए Veer Guardian 26 अभ्यास और भारत-जापान रक्षा साझेदारी (Maritime Security Cooperation) की पूरी कहानी।
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 29, 2026

India Japan defence cooperation

India Japan defence cooperation: AI Creative

India Japan defence cooperation: भारत और जापान के बीच रक्षा संबंध अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हाल ही में नई दिल्ली में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक ने इस साझेदारी को नई ऊंचाई दे दी है।

दोनों की मुलाकात में एक ऐतिहासिक घोषणा हुई कि, पहली बार जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) के लड़ाकू विमान भारतीय धरती पर उतरेंगे और दोनों देश मिलकर 'Veer Guardian 26' नामक द्विपक्षीय वायु अभ्यास आयोजित करेंगे।

यह सिर्फ एक सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच, यह कदम भारत और जापान के रणनीतिक रिश्तों की गहराई और आपसी भरोसे को दर्शाता है। एक ऐसा संकेत देता है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की दिशा तय कर सकता है।

'Maritime Security Cooperation' समझौते पर किए हस्ताक्षर

गौरतलब है कि इस बैठक में दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते, 'Maritime Security Cooperation' पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता जापान के रक्षा मंत्रालय और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच पहली बार समुद्री सुरक्षा पर आधारित औपचारिक ढांचा प्रदान करता है। इसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना (Maritime Domain Awareness), खोज एवं बचाव (SAR), मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।

समझौते में यह भी शामिल है कि दोनों देश जहाजों की मरम्मत और रखरखाव सुविधाओं के पारस्परिक उपयोग पर कार्य करेंगे। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने नौसैनिक जहाज निर्माण, अनमैन्ड सिस्टम (जैसे ड्रोन) के एकीकरण और विशेष बलों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

बैठक में यह अहम फैसला भी

इस बैठक में यह भी तय हुआ कि दोनों देश शीघ्र ही '2+2' (विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय) वार्ता आयोजित करेंगे, जिसमें इन पहलों को और तेजी से लागू करने की दिशा में कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए एक कार्य समूह (Working Group) भी स्थापित किया जाएगा, जो रक्षा, तकनीकी, औद्योगिक और परिचालन क्षेत्रों में सहयोग का समन्वय करेगा।

भारत-जापान रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण?

पहला- यह कदम दोनों देशों की साझा रणनीतिक सोच 'मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत' को ठोस रूप देने की दिशा में है। समुद्री सुरक्षा, वायु अभ्यास और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

दूसरा, जापानी लड़ाकू विमानों का पहली बार भारत आना और अभ्यास में भाग लेना दोनों सेनाओं के बीच विश्वास और परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा। यह भारत की वायु रक्षा क्षमताओं में विविधता और मजबूती लाने का संकेत भी है।

तीसरा, समुद्री सहयोग समझौता हिंद महासागर और उससे जुड़े समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देशों को समुद्री खतरों जैसे अवैध मछली पकड़ना, समुद्री डकैती, ग्रे-जोन गतिविधियों से निपटने में मदद करेगा।

चौथा, 'Make in India' पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में जापानी कंपनियों के साथ सह-निर्माण और सह-विकास की संभावनाएं खुल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिशा में जापानी रक्षा उद्योगों को भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी करने का निमंत्रण दिया है।

भारत और जापान के लिए यह सहयोग कितना अहम

भारत के लिए यह सहयोग रक्षा क्षमताओं में विविधता लाने, घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर है। जापान के लिए यह सहयोग हिंद-प्रशांत में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने और भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत के साथ संबंधों को गहरा करने का अवसर है।

अब आगे क्या?

  • 'Veer Guardian 26' अभ्यास के सफल आयोजन के बाद, दोनों देशों के बीच वायु, नौसेना और विशेष बलों के अभ्यास और भी जटिल और व्यापक हो सकते हैं।
  • कार्य समूह के माध्यम से औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को तेजी से लागू किया जा सकता है।
  • '2+2' बैठक में इन पहलों को और ठोस रूप देने के लिए नई योजनाएं और समझौते सामने आ सकते हैं।

यह सहयोग केवल सैन्य अभ्यास या तकनीकी साझेदारी नहीं है, बल्कि यह भारत-जापान के बीच रणनीतिक विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता की दिशा में एक ठोस संकेत है। यह संकेत अब केवल कूटनीतिक शब्दों में नहीं, बल्कि वास्तविक क्षमताओं और साझेदारियों में बदल रहा है।

इस नए अध्याय से जुड़े आगामी कदमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। विशेषकर तब जब 'Veer Guardian 26' अभ्यास और '2+2' बैठक की तैयारियां आगे बढ़ेंगी।