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India’s Mozzarella: जम्मू का देसी ‘मोज़ेरेला’, जानिए क्यों इतनी खास है उधमपुर की कलाड़ी

India's Mozzarella: जानिए भारत के अपने 'देसी मोज़ेरेला' कलाड़ी की कहानी, इसका इतिहास, GI Tag की खासियत और मशहूर कलाड़ी कुलचे का स्वाद।
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भारत

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Chitra Badoliya

Jul 24, 2026

Mozerella Udhampur Kaladi Cheese GI Tag Desi Burger

जम्मू का असली 'देसी चीज़'!( AI)

India's Mozzarella: कश्मीर के सेब और केसर के चर्चे तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन अगर आप कभी जम्मू के पहाड़ी रास्तों पर निकलें, तो हवा में उठती एक खास सौंधी-सौंधी खुशबू आपका ध्यान खींच लेगी। यह खुशबू है तवे पर धीमी आंच पर सिकती हुई 'कलाड़ी' की।

बाहर से एकदम क्रिस्पी, सुनहरी और अंदर से बेहद नरम, पिघली हुई और रेशेदार पहली नजर में यह किसी विदेशी मोज़ेरेला या कॉटेज चीज़ जैसी दिखती है, लेकिन इसका स्वाद और बनाने का अंदाज पूरी तरह से हिन्दुस्तानी और पारंपरिक है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करते हुए उधमपुर की इस खास 'कलाड़ी' (Udhampur Kaladi) को भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी मिल चुका है। आइए जानते हैं जम्मू के इस 'देसी मोज़ेरेला' की दिलचस्प कहानी, इसके बनने का अनोखा तरीका और क्यों यह हर फ़ूड लवर की पसंदीदा बनती जा रही है।

चरवाहों की रसोई से फाइव स्टार तक: कलाड़ी की अनोखी खोज

कलाड़ी कोई आज का मॉडर्न फ़ूड ट्रेंड नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सदियों पुराना है। इसकी शुरुआत जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले गुज्जर और बकरवाल जनजातियों की सुझबुझ से हुई थी।

  • दूध को खराब होने से बचाने की तरकीब: घुमंतू जीवन जीने वाले चरवाहे जब पहाड़ों पर मवेशियों को चराने ले जाते थे, तो उनके पास भारी मात्रा में कच्चा दूध बच जाता था। बिजली या रेफ्रिजरेटर न होने के कारण दूध जल्दी खराब हो जाता था। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने दूध को खास तरीके से फाड़कर और सुखाकर सहेजने की कला विकसित की।
  • सफर का साथी: सुखाए गए इस सख्त दूध के चक्कों (डिस्क) को महीनों तक बिना खराब हुए रखा जा सकता था। पहाड़ों की लंबी और कठिन यात्राओं में यह चरवाहों के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा जरिया बना।
  • शाही रसोई से आम बाज़ारों तक: चेनानी, पंचैरी और उधमपुर के पहाड़ी इलाकों से निकलकर यह स्वाद धीरे-धीरे राजा-महाराजाओं के दरबार तक पहुंचा। डोगरा शासकों के संरक्षण में इसे और पहचान मिली और कालक्रम में यह जम्मू की गलियों का सबसे मशहूर स्ट्रीट फ़ूड बन गया।

न तेल, न घी: तवे पर खुद के फैट में सिकता है यह देसी चीज़

कलाड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए आपको अलग से तेल या घी की एक बूंद भी नहीं डालनी पड़ती।

बनाने की पारंपरिक विधि: कलाड़ी बनाने के लिए गाय या भैंस के कच्चे, फुल-फैट दूध का इस्तेमाल किया जाता है। दूध को उबाले बिना इसमें मट्ठे (छाछ) का खट्टा पानी मिलाकर धीरे-धीरे फाड़ा जाता है। फिर इसे मखमली कपड़े में छानकर गोल टिक्कियों का आकार दिया जाता है और कुछ दिनों के लिए खुली धूप में सुखाया जाता है।

जब इस सूखी हुई कलाड़ी को गर्म तवे पर रखा जाता है, तो इसके अंदर मौजूद प्राकृतिक मक्खन और फैट खुद-ब-खुद बाहर आने लगता है। धीमी आंच पर सिकते ही इसका बाहरी हिस्सा क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन हो जाता है, जबकि अंदर का हिस्सा पिघलकर एकदम चीज़ी और खिंचावदार (stretchy) हो जाता है।

कलाड़ी कुलचा: जम्मू का अपना 'देसी बर्गर'

अगर आप जम्मू जाएं और आपने 'कलाड़ी कुलचा' नहीं खाया, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। स्थानीय हलवाई और स्ट्रीट वेंडर्स तवे पर क्रिस्पी सेकी हुई गरम कलाड़ी को गोल कुलचे या ब्रेड के बीच में रखते हैं। इसके ऊपर चुटकी भर काला नमक, भुना जीरा, लाल मिर्च और इमली या अनारदाने की खट्टी-मीठी चटनी डाली जाती है। कुलचे के साथ जब पिघली हुई चीज़ी कलाड़ी का पहला बाइट मुंह में जाता है, तो स्वाद का जो धमाका होता है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी पश्चिमी बर्गर से नहीं की जा सकती।

GI टैग का जादू: लोकल स्वाद को मिली ग्लोबल पहचान

3 अक्टूबर 2023 का दिन उधमपुर और डोगरा संस्कृति के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, जब 'उधमपुर कलाड़ी' को आधिकारिक रूप से GI Tag मिला।

GI टैग मिलने से क्या बदला?

  • शुद्धता की गारंटी: अब उधमपुर के विशेष भौगोलिक वातावरण और पारंपरिक तरीके से बनी कलाड़ी को ही यह नाम दिया जा सकता है, जिससे डुप्लीकेसी खत्म हुई है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: इससे जम्मू के दूर-दराज़ गांवों में डेयरी फार्मिंग करने वाले किसानों और स्थानीय कारीगरों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलने लगा है।
  • ग्लोबल डिमांड: आज देश-विदेश के फ़ूड ब्लॉगर्स और टूरिस्ट्स कलाड़ी का स्वाद चखने के लिए उधमपुर का रुख कर रहे हैं। अब यह केवल एक स्थानीय व्यंजन नहीं, बल्कि भारत की धरोहर का हिस्सा बन चुका है।

सेहत का खजाना: स्वाद के साथ न्यूट्रिशन भी

फ़ास्ट फ़ूड के इस दौर में कलाड़ी स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी बेहतरीन कॉम्बिनेशन है:

  • प्रोटीन का पावरहाउस: पूरी तरह से दूध से बने होने के कारण यह प्रोटीन से भरपूर है, जो मांसपेशियों की मजबूती के लिए बेहतरीन है।
  • कैल्शियम से भरपूर: हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए इसमें प्राकृतिक कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है।
  • नो प्रिजर्वेटिव्स: इसमें किसी भी तरह के आर्टिफिशियल कलर या केमिकल प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह 100% नेचुरल और ऑर्गेनिक फ़ूड है।

भारत के समृद्ध खान-पान की पहचान

उधमपुर की कलाड़ी सिर्फ दूध से बना एक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह जम्मू के पहाड़ों, चरवाहों की समृद्ध परंपरा और डोगरा संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है। यह इस बात का सबूत है कि भारत के ग्रामीण अंचलों में स्वाद और सेहत के ऐसे अनगिनत खजाने छिपे हैं, जो दुनिया के बड़े से बड़े फ़ास्ट फ़ूड ब्रांड्स को मात दे सकते हैं।

अगली बार जब भी आप जम्मू की वादियों की तरफ रुख करें, तो तवे पर सिकती हुई गरमा-गरम कलाड़ी का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें.