
अंतरिक्ष की दुनिया में अब तक जो बातें सिर्फ साइंस-फिक्शन फिल्मों या कहानियों में दिखाई देती थीं, वे बहुत जल्द हकीकत बनने जा रही हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की 'एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डवलपमेंट रीसर्च टीम' और उनके प्रमुख रिसर्च वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों की स्थायी बस्ती यानि 'मून बेस' (Moon Base) स्थापित करने की दिशा में काम करना तेज कर दिया है।
नासा के वैज्ञानिकों का मुख्य लक्ष्य चांद के उस हिस्से पर इंसानों का स्थायी आशियाना बनाना है, जहां अब तक कोई नहीं पहुंच पाया है। इस विशाल योजना को पूरा करने के लिए 2029 तक चांद पर 20 से ज्यादा रोबोटिक और कमर्शियल मिशन उतारे जाएंगे। खास बात यह है कि इंसानों के कदम रखने से पहले ही चांद की सतह पर पानी, बिजली, संचार और रहने के लिए बुनियादी सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) रोबोट्स की मदद से तैयार कर ली जाएंगी।
इंसान को चांद के माहौल में भेजने से पहले वहां की परिस्थितियों को समझना और जरूरी मशीनरी का परीक्षण करना बहुत जरूरी है। नासा की सी-एल-पी-एस (CLPS - Commercial Lunar Payload Services) पहल इसी रणनीति का हिस्सा है। इसका सीधा सा गणित यह है कि चांद पर 14 दिनों तक चलने वाली भीषण रातें और माइनस में रहने वाला तापमान किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को पल भर में खराब कर सकता है। इसलिए नासा पहले प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर ऐसे रोवर, पावर सिस्टम और उपकरण भेज रहा है, जो चांद के कठोर वातावरण में बिना रुके काम कर सकें।
इस मिशन को पूरा करने के लिए नासा ने चार बड़ी और भरोसेमंद स्पेस कंपनियों—ब्लू ओरिजिन (Blue Origin), फायरफ्लाई एयरोस्पेस (Firefly Aerospace), इंट्यूटिव मशीन्स (Intuitive Machines) और वॉयजर टेक्नोलॉजीज (Voyager Technologies) के साथ हाथ मिलाया है।
मिशन और लैंडर: ब्लू ओरिजिन अपने नए शक्तिशाली लैंडर 'ब्लू मून एमके1' (Blue Moon MK1) को चांद पर भेजने की तैयारी कर रही है। इस पहली कमर्शियल उड़ान को 'एंड्योरेंस' नाम दिया गया है।
हाल ही में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में इसका 'थर्मल वैक्यूम टेस्ट' पूरा हुआ है। इस टेस्ट से यह साबित हो गया है कि लैंडर चांद के जम जाने वाले तापमान और वैक्यूम में भी एकदम सही काम करेगा। इसके इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और बॉडी को असेंबल कर लिया गया है। यह लैंडर चांद पर भारी-भरकम निर्माण सामग्री और मशीनरी उतारने का काम करेगा।
मिशन और लैंडर: फायरफ्लाई कंपनी 'ब्लू घोस्ट मिशन 2' (Blue Ghost Mission 2) के लिए 22 फीट ऊंचा एक विशाल स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रही है।
यह मिशन चंद्रमा के उस हिस्से पर उतरेगा जो हमेशा पृथ्वी से छिपा रहता है, जिसे 'Far Side' यानी सुदूर भाग कहा जाता है। यह अमेरिका का पहला ऐसा मिशन होगा जो चांद के इतने शांत और अज्ञात हिस्से पर उतरेगा। यहां वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि जब ब्रह्मांड में पहली बार तारे बनने शुरू हुए थे, तब स्थितियां कैसी थीं।
मिशन और लैंडर: इंट्यूटिव मशीन्स अपने 'IM-3' मिशन के तहत 'ट्रिनिटी' (Nova-C) नाम के लैंडर को चांद की सतह पर उतारेगी। इसके साथ 'अल्टस-1' नाम का एक छोटा सैटेलाइट भी भेजा जाएगा, जो चांद के चक्कर लगाते हुए पृथ्वी और लैंडर के बीच सिग्नल पहुंचाएगा।
यह मिशन चांद पर मौजूद 'रेनर गामा' नाम के एक रहस्यमयी चुंबकीय भंवर (Magnetic Swirl) की जांच करेगा। वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि वहां का चुंबकीय क्षेत्र रोबोट्स और इंसानी उपकरणों को कैसे प्रभावित करता है।
मिशन और लैंडर: वॉयजर टेक्नोलॉजीज का 'ग्रिफिन-1' (Griffin-1) लैंडर 2026 के अंत तक लॉन्च के लिए तैयार किया जा रहा है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) में इसके वजन और बैलेंस की जांच पूरी हो चुकी है।
ग्रिफिन-1 अपने साथ 'एस्ट्रोलैब FLIP' नाम का एक रोवर और नासा के 5 पेलोड ले जाएगा। यह अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल पेलोड होगा जो चांद की सतह पर उतरकर दूर-दूर तक जाकर मैपिंग और मिट्टी की जांच करेगा।
चांद पर लंबे समय तक रुकने के लिए सिर्फ लैंडर काफी नहीं हैं, वहां बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। इसके लिए नासा और रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन मिलकर एक विशेष 'सरफेस इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर' (सोलर पावर ग्रिड) पर काम कर रहे हैं।
यह ग्रिड चांद की हफ़्तों लंबी रातों और घने अंधेरे वाले गड्ढों (Craters) में भी बिना रुके बिजली की सप्लाई चालू रखेगा, जिससे वहां मौजूद उपकरणों और मून बेस को लगातार पावर मिलती रहे।
बहरहाल, नासा की इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ चांद पर झंडा गाड़ना नहीं है, बल्कि इंसानी सभ्यता का विस्तार करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब इंसान चांद पर रहना और वहां के संसाधनों का इस्तेमाल करना सीख जाएगा, तो यही 'मून बेस' भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) और उससे आगे के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए पहला इंटर-प्लैनेटरी स्टेशन (अंतरिक्ष का पेट्रोल पंप और स्टॉपओवर) बनेगा।
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Updated on:
11 Aug 2026 05:03 pm
Published on:
11 Aug 2026 04:42 pm
