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भूत-प्रेतों ने बनाया था इस एेतिहासिक बावड़ी काे, बहुत खास है राजस्थान की ये 6 बावड़ियां

केंद्र सरकार ने पिछले दिनाें देश की 16 प्रचीन बावड़ियों पर डाक टिकट जारी किए। इनमें राजस्थान की छह एेतिहासिक बावड़ियां भी शामिल हैं।

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जयपुर। केंद्र सरकार ने पिछले दिनाें देश की 16 प्रचीन बावड़ियों पर डाक टिकट जारी किए। इन 16 प्रचीन बावड़ियों में राजस्थान की छह एेतिहासिक बावड़ियां भी शामिल हैं।

chand baori

राजस्थान की इन बावड़ियों में आभानेरी की प्रसिद्ध चांद बावड़ी, बूंदी की रानीजी की बावड़ी एवं नागर सागर कुंड, अलवर जिले की नीमराना बावड़ी, जोधपुर का तूर जी का झालरा, और जयपुर की पन्ना मियां की बावड़ी, शामिल हैं।

chand baori

दाैसा जिले में बांदीकुर्इ तहसील के आभानेरी में स्थित चांद बावड़ी काे भूल-भुलैया वाली बावड़ी भी कहा जाता है। बावड़ी में करीब 3,500 सीढ़ियां हैं। कहा जाता है कि इस बावड़ी काे भूत-प्रेतों ने बनाया था।

rani ji ki baori

बूंदी शहर में स्थित रानीजी की बावड़ी राजस्थान की सबसे शानदार बावडि़यों में से एक मानी जाती है। यहां बावड़ी में कई कुओं का निर्माण किया गया है, जिनमें बारिश के दौरान पानी भरा रहता है।

nagar sagar kund

बूंदी में चोगन गेट के पास दो सीढ़ीदार कुंड हैं। इनकाे पहले जनानासागर और गंगा सागर कहा जाता था, लेकिन अब इन्हें सुयुक्त रूप से नागर सागर कुंड कहा जाता है। इसका निर्माण बूंदी के लोगों के लिए सूखे के दौरान पानी के लिए कराया गया था।

neemrana bawdi

अकाल से रहत देने के लिए नीमराणा के राजा महासिंह ने 1760 में नीमराणा बावड़ी का निर्माण कराया था। 125 सीढियों वाली यह बावड़ी अपने विशाल रूप के कारण विशेष महत्व रखती है। नीमराणा बावड़ी दिल्ली से 125 किमी दूर और नीमराना फोर्ट पैलेस के नजदीक है।

toor ji ka jhalra

सूर्य नगरी जाेधपुर में एेतिहासिक तूरजी का झालरा बावड़ी स्थित है। इसका निर्माण 1740 में हुआ था। इसमें करीब 3,500 सीढ़ियां हैं। तूर जी का झालरा पर्यटकाें के आकर्षण का केंद्र है।

panna meena ki baori

जयपुर के आमेर के पास स्थित है पन्ना मीणा की। इसे पन्ना मीणा का कुंड भी कहा जाता है। इस बावड़ी के एक ओर जयगढ़ दुर्ग और दूसरी ओर पहाड़ों की नैसर्गिक सुंदरता है। बावड़ी अपनी विशेष आकार की सीढ़ियों और बरामदों के लिए विख्यात है।


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