
छावनी चौराहे पर अलग ही कहानी है। पहले एलआईसी भवन के यहां दिनभर कचरा फैला रहता था। निगम की कई बार किरकिरी भी हुई। बोर्ड की बैठक में भी यह मसला हर बार उठता था, इसके चलते नगर निगम ने एक कोचिंग समूह के सहयोग से यहां आधुनिक कचरा पात्र तैयार कराकर रखवाया। लोगों के बैठने के लिए आधुनिक कुर्सियां भी लगाई गई। स्वच्छ कोटा के स्लोगन अंकित करवाए।

सबकुछ इतना स्मार्ट हो गया कि सुंदरता देख लोगों ने यहां कचरा डालना बंद कर दिया। और, आधुनिक डस्टबिन के चंद कदम दूर ही स्वप्रेरणा से कचरा डालना शुरू कर दिया है। एेसे में यहां दिनभर कचरे का ढेर लगा रहता है। इस पर उप महापौर सुनीता व्यास ने कहा कि छावनी चौराहे पर आधुनिक कचरा पात्र के पास दूसरी जगह कचरा डालने वालों को पाबंद किया जाएगा। सफाई पर निगरानी की जा रही है। संवेदकों को भी पाबंद किया गया है।

सोफिया स्कूल के मुख्य गेट के पास ही लोगों ने अघोषित कचरा प्वाइंट बना लिया है। दिनभर सूअर मुंह मारते हैं। दादाबाड़ी तीन बत्ती रोड पर डस्टबिन के आसपास ही कचरा फैला हुआ है। बसंत विहार में डस्टबिन ही गायब हो गया है, केवल लोहे के एंगल नजर आ रहे हैं। लोग खुले में ही कचरा डाल रहे।

निगम की 6 घोषणाएं है कि शहर के सभी कचरा पात्रों से दो पारी में कचरा उठाया जाएगा। कचरा फैलाने वालों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे। कचरा पात्रों पर कर्मचारी तैनात रहेंगे, जो बाहर कचरा नहीं डालने देंगे। सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमीट्रिक मशीन से ही होगी। सफाई कर्मचारी तय गणवेश में ही सफाई करेंगे। शहर में दो पारी में सफाई होगी।

इन घोषणाओं की हकीकत कुछ और ही है। करीब 265 कचरा पात्र हैं, एक पारी में भी कचरा नहीं उठ रहा। एक भी कचरा प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे। किसी भी प्वाइंट पर कर्मचारी नहीं। अभी भी कई सेक्टर कार्यालयों में एेसा नहीं हुआ। 90 फीसदी कर्मचारी बिना गणवेश में आते है। ज्यादातर वार्डों में एक पारी में ही सफाई होती है।