
फिर घूमेगी जिंदगी की साइकिल: हनुमान गढ़ी क्षेत्र में बाढ़ से खण्डहर हो चुके आशियाने में मिली साइकिल को निकालकर लाता वृद्ध।

हनुमान गढ़ी क्षेत्र में बाढ़ से खण्डहर हो चुके आशियाने में शायद कोई चीज सुरक्षित बची हो, इसी उम्मीद में सामान तलाश करते लोग।

कोटा के हनुमान गढ़ी बस्ती में ताश के पत्तों की बिखरे सपनों के आशियानें।

टूटा घर संभालते मजबूत रिश्ते : हनुमान गढ़ी क्षेत्र में बाढ़ से खण्डहर हो चुके आशियानों में सामान ढंूढ़ते लोग।

कुन्हाड़ी क्षेत्र स्थित बापू नगर के मकानों में छतों पर सूख रहे घर-गृहस्थी के सामान व कपड़ों की वजह से इलाके की छतों पर सतरंगी सी चादर बिछी प्रतीत हो रही थी। समूचे इलाके में छतों पर नजर आ रहा था तो सिर्फ सूखने के लिए धूप में रखे कपड़ों का ढेर।

हनुमानगढ़ी बस्ती में घर के मलबे में दबा मिला कूलर की मोटर व फंखे का ले जाता बाढ़ पीडि़त।

सड़क पर आ गई दुकान: खाईरोड स्थित बाजार में व्यापारियों ने पानी से गीला हुआ सामान इस तरह से सड़क पर सुखाने के लिए फैला रखा है।

कोटा बैराज स्थित रोड पर चंबल की उफनती लहरों के साथ बहकर आया विशाल पेड़ का तना, जिसे देखकर तबाही का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।

बापू बस्ती में बाढ़ से ध्वस्त हुए मकान। जिन्हें देख ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने बुलडोजर चला दिया हो।

बाढ़ का पानी उतरा तो बच्चों ने अपनी स्कूली किताबें संभाली, कई तो बह गई और जो बची उसे इस तरह धूप में सुखाई।

आगमगढ़ गुरुद्वारे की ओर से बाढ़ से बेघर हुए लोगों को भोजन कराया गया।

चम्बल के उफान में डूबे भविष्य को एकटक निहारती इशिका। आसपास ही बिखरे हुए मलबे के ढेर पर भावी भविष्य को संजोने की कोशिश करते हनुमानगढ़ी के तबाह हुए घरों के बच्चे।

नयाुपरा बस स्टेण्ड इलाके में एक दुकान का बर्बाद हुआ सामान सहेजने में जुटी महिलाएं।

चंबल के रौद्र रूप का गवाह बनी कोटा के नयापुरा की बस्तियां, जिसके उजड़े-बिखरे आशियाने बता रहे हैं कि मंजर कितना भयानक रहा होगा।

चंबल के रौद्र रूप का गवाह बनी कोटा की बस्तियां, जिसके उजड़े-बिखरे आशियाने बता रहे हैं कि मंजर कितना भयानक रहा होगा।

खाईरोड स्थित बस्ति में जिधर नजर दौड़ाओ उधर मलबों के ढेर के रूप में तबाही के मंजर नजर आए।