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Photos : इस फौजी को शहादत के डेढ़ साल बाद माना गया शहीद, अब परिजन इसलिए आंसू बहाने को हो रहे मजबूर

नीमकाथाना निवासी सुनील कुमार यादव वर्ष 2014 में भारत-चीन सीमा पर फाल्कन ऑपरेशन के लिए तैनात थे।
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सीकर

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Vishwanath Saini

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Updated: 16 Jan 2018, 2:29 PM IST

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नीमकाथाना निवासी सुनील कुमार यादव वर्ष 2014 में भारत-चीन सीमा पर फाल्कन ऑपरेशन के लिए तैनात थे।

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18 अक्टूबर 2014 को बॉर्डर पर 18000 हजार ऊंची दुर्गम पहाडिय़ों में माइनस 15 डिग्री तापमान में पेट्रोलिंग के दौरान मौसम खराब होने के कारण सुनील यादव के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो गई और वे देश के लिए शहीद हो गए।

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शहीद सुनील कुमार की वीरांगना कांता यादव व बच्चे की फाइल फोटो

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सरकार ने सुनील यादव की मौत को सामान्य माना था, जिसकी वजह से उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया।

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सुनील यादव के पिता सांवलराम यादव ने सरकार से संघर्ष किया। नतीजा ये रहा कि शहादत के डेढ़ साल बाद सरकार ने सुनील यादव को शहीद को दर्जा दिया।

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बेटे को शहीद का दर्जा मिलने के बाद पिता सांवल राम यादव उसकी नीमकाथाना में प्रतिमा लगवाने के लिए कार्यालय दर कार्यालय चक्कर लगा रहे हैं।

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प्रतिमा लगवाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठने से परेशान शहीद के पिता ने नीमकाथाना में भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जो पिछले आठ दिन से जारी है।

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प्रतिमा लगवाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठने से परेशान शहीद के पिता ने नीमकाथाना में भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जो पिछले आठ दिन से जारी है।

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