
बिहार: सीट बंटवारे पर महागठबंधन में फंसा पेंच, 12 सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी, RJD 8 देने को तैयार
पटना। मोदी सरकार को आगामी आम चुनाव में दोबारा सत्ता में काबिज होने से रोकने के लिए विपक्ष एक मंच पर आने को मजबूर हो गया है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी अपनी दुश्मनी को भुलाकर विपक्ष एक साथ आने को तैयार है और इस गठबंधन को महागठबंधन का नाम दिया जा रहा है। हालांकि अभी तक महागठबंधन का मूल स्वरूप सामने नहीं आया है। लेकिन उससे पहले ही विपक्षी गठबंधन में दरारें पड़नी भी शुरु हो गई है। दरअसल बिहार में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी में खींचातानी चल रही है। एक रिपोर्ट की मानें तो बिहार में लोकसभा की चालीस सीटें हैं और कांग्रेस 12 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है। तो वहीं राष्ट्रीय जनता दल कांग्रेस को आठ सीटें देने को तैयार है। अब ऐसे में महागठबंधन बनने से पहले ही विपक्षी दलों में मनमुटाव शुरु हो गया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन से अलग किए जाने के बाद बिहार में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ रही है। बता दें कि बिहार में महागठबंधन से ठीक उलट एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है और वे अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।
आरजेडी ने 20 सीटों पर जताया दावेदारी
बता दें, रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि आरजेडी 20 सीटों पर अपने दावेदारी पेश कर रही है। जबकि एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन चुके राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (उपेंद्र कुशवाहा) पांच सीटें, राष्ट्रीय जनतांत्रिक दल (शरद यादव) तीन सीटें और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (जीतनराम मांझी) तीन सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर गहमागहमी जारी है। बता दें कि इन दलों के अलावा महागठंबधन में मुकेश साहनी की वीआईपी और वामपंथी दल भी शामिल हैं। साथ ही बसपा भी बिहार में अपने उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसे में चालीस सीटों के अंदर सबको उनकी इच्छा के अनुरुप सीट नहीं मिल सकता है। लिहाजा हर पार्टी अपनी दावेदारी पेश कर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है लेकिन आरजेडी और कांग्रेस सीटों के बंटवारे पर अपने कदम पीछे खींतना नहीं चाहते हैं।
3 फरवरी को राहुल गांधी पटना में करेंगे रैली
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 3 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में एक रैली को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दिन कांग्रेस और आरजेडी के अलावा अन्य दलों के साथ सीटों का बंटवारा संभव है। हालांकि अब देखना दिलचस्प है कि आरजेडी और कांग्रेस कितने सीटों पर सहमत होते हैं। साथ ही अपने सहयोगियों के लिए कितनी सीटें छोड़ती है। बता दें कि 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस 12 में से 2 और आरजेडी ने 27 में से चार सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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Updated on:
23 Jan 2019 08:13 am
Published on:
22 Jan 2019 08:10 pm
