
वसुंधरा राजे को चीफ मिनिस्टर ऑफ द ईयर‘ अवॉर्ड का सोशल मीडिया पर जिक्र
नई दिल्ली: राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को 'चीफ मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड से शनिवार को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री राजे को यह पुरस्कार ई-गवर्नेंस में अभूतपूर्व काम करने के लिए एक निजी संस्था ने दिल्ली में आयोजित 52वें स्कॉच शिखर सम्मेलन में दिया। इस पुरस्कार पर सोशल मीडिया में कई दिलचस्प टिप्पणियां की जा रही हैं। कुछ यूजर्स ने इसे मजाक करार दिया है तो कुछ यूजर्स ने इसे उनकी सरकार की विदाई का तोहफा तक बता रहे हैं।
मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह कार्यक्रम में थे मौजूद
बता दें कि केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे स्वयं इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहीं। उनकी तरफ से उनके सलाहकार समिति में ओएसडी डॉ. अनुज सक्सेना और आईटी विभाग के सह निदेशक आरएल सोलंकी ने स्कॉच ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर से अवॉर्ड ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कैंपेन को आम लोगों तक पहुंचाने में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राज्य सरकार की सराहनीय प्रयास किए हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की चर्चा
पुरस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है। सोशल मीडिया पर मनमोहन मेहता लिखते हैं, 'मुझे यह जानने में बहुत दिलचस्पी है कि वो निर्णायक कौन थे', जबकि ढेरों यूजर्स ने इस अवॉर्ड को जोक ऑफ द ईयर बताया। वहीं, पोपेराम नाम के यूजर ने ट्वीट किया, "ऐसा लगता है कि यह विदाई समारोह का पुरस्कार है"। कुछ यूजर्स ने कहा कि चुनाव से पहले अवॉर्ड..पुरस्कार देने का दौर चल पड़ा है। एक ट्विटर यूजर्स ने लिखा कि क्या ये अवॉर्ड सरकार चलाने के लिए मिला है। या फिर सरकार को फेयरवेल दिया जा रहा है। वहीं महुआ घोषे लिखती हैं कि क्या राजे को यह पुरस्कार गोरक्षक आंदोलन शुरू करने के लिए मिला? जबकि चेतन शाह ने इस अवॉर्ड की तुलना यूनेस्को अवॉर्ड से की है। भास्कर नामक यूजर ने इसका कारण इस साल राजस्थान के चुनाव को बताया तो वोटर नाम के एक यूजर ने लिखा, "ये गवर्मेंट बिक गई है."
Updated on:
23 Jun 2018 10:04 pm
Published on:
23 Jun 2018 09:30 pm
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