
विजयन सरकार की लापरवाही से आई केरल में बाढ़, बारिश तो 1924 से काफी कम हुईः कांग्रेस
तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि केरल में आई बाढ़ मानव-जनित है और यह खराब बांध प्रबंधन की वजह से आई है। विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने मीडिया से कहा कि यह आपदा ऊर्जा मंत्री, जल संसाधन मंत्री और केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) के बीच समन्वय के अभाव की वजह से आई। उन्होंने कहा, 'इस मानूसन, केरल में 41.44 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई और सभी बांधों के गेट को बिना समुचित विश्लेषण या प्रभाव का अध्ययन किए बिना ही खोल दिया गया। लोग पूरी तरह से अनभिज्ञ थे कि बांधों को खोला जा रहा है।'
केरल में बांधों का प्रबंधन केएसईबी या जल संसाधन मंत्रालय देखता है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पथानमथिट्टा, अलप्पुझा और वायनाड हैं, जहां सबसे ज्यादा संख्या में बांध मौजूद हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, 'इस वर्ष 1924 में हुई बारिश की तुलना में काफी कम बारिश हुई है। इस बार यह आपदा इसलिए आई क्योंकि मौसम भविष्यवाणी को नजरअंदाज किया गया और हल्के में लिया गया। इडुक्की बांध की अधिकतम जल क्षमता 2,403 फीट है। 15 जुलाई के बाद, इसकी क्षमता 90 फीसदी तक पहुंच गई थी। 31 जुलाई को जलस्तर 2,395.68 फीट तक पहुंच गया था और ऊर्जा मंत्री एमएम मणि ने कहा कि जब जलस्तर 2,397 फीट पर पहुंच जाएगा तो एक ट्रायल रन चलाया जाएगा।'
चेन्निथला ने कहा, 'उन्होंने ऐसा नहीं किया। जब 9 अगस्त को जलस्तर 2,398 फीट तक पहुंच गया तो पहले बाढ़ गेट को खोल दिया गया। त्रिशूर जिले के चालाकुड्डी क्षेत्र में सभी छह बांधों के गेट को एकसाथ खोल दिया गया। यह बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। केरल सरकार ओखी आपदा से सीखने में विफल रही। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों को शामिल कर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को पुनर्जीवित करने का वादा किया था। वह फाइल अभी भी उनके कार्यालय में पड़ी हुई है। यह और कुछ नहीं बल्कि मानव जनित आपदा है।'
Published on:
22 Aug 2018 04:41 pm
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