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भारतीय सेना से खुश कश्मीरी आवाम, देशसेवा के लिए आगे आ रहे युवा: निर्मला सीतारमण

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सेना जम्मू कश्मीर में अत्यधिक संयम बरत रही है और एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो सेना प्रदर्शनकारियों तथा पत्थरबाजों से संयम के साथ निपट रही है।
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Chandra Prakash Chourasia

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Jul 13, 2018

jammu

भारतीय सेना से खुश कश्मीरी आवाम, देशसेवा के लिए आगे आ रहे युवा: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के बारे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारतीय सेना अत्यधिक संयम बरत रही है। इतना ही नहीं हमारे जवान स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में लगातार सुधार की कोशिश करते हुए शिक्षा, चिकित्सा और प्रशिक्षण देने का भी काम कर रहे हैं।

सेना नहीं करती मानवाधिकारों का उल्लंघन: रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों में सेना के प्रति गुस्सा हो तो वह सेना में शामिल होने की बात क्यों कहेंगे। आतंकवादियों द्वारा अपहरण के बाद निर्मम तरीके से मारे गए शहीद सैनिक औरंगजेब के परिवार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वह उनसे मिलने गईं तो उनके भाइयों ने निस्संकोच सेना में शामिल होने का जज्बा दिखाया। अगर सेना मानवाधिकारों का उल्लंघन करे तो स्थानीय लोग सेना में क्यों शामिल होंगे।

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कश्मीर पर झूठी है यूएन की रिपोर्ट

सीतारमण ने कहा कि आयोग ने यह रिपोर्ट जमीनी स्थिति का अध्ययन किए बगैर किसी आरामदायक जगह पर बैठकर तैयार की है। यह रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार है। इन्होंने कहा कि यह सही तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि सेना जम्मू कश्मीर में अत्यधिक संयम बरत रही है और एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो सेना प्रदर्शनकारियों तथा पत्थरबाजों से संयम के साथ निपट रही है।

सीमा पर ही मार गिराए जाएंगे आतंकी

घाटी में बड़ी संख्या में युवाओं के आतंकवादी संगठनों से जुड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय नहीं है और इस पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के इस रूझान पर नजर रखे हुए है। इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि उन्हें आतंकवाद का दामन थामने के लिए कौन प्रेरित कर रहा है। इस साल अब तक 100 से भी अधिक आतंकवादियों के मारे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि सेना को निर्देश दिया गया है कि आतंकवादियों को सीमा पर ही ढेर किया जाना चाहिए। अंदर आने से पहले ही उनका सफाया कर दिया जाता है।