चिदंबरम का मोदी सरकार को सुझाव- Economy को सुधारने के लिए कर्ज लेने में न करें संकोच

  • Economy को पटरी पर लाने के लिए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार को सुझाव दिया
  • Chidambaram ने देश में मांग पैदा करने के लिए सरकार को अधिक से अधिक उधार लेने का सुझाव दिया

By: Mohit sharma

Updated: 07 Sep 2020, 10:41 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना महामारी ( Coronavirus Crisis ) से प्रभावित अर्थव्यवस्था ( Indian Economy ) को फिर से पटरी पर लाने के लिए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ( Former Union Finance Minister P. Chidambaram ) ने मोदी सरकार ( Modi Government ) को सुझाव दिया है। इस सुझाव में चिदंबरम ने देश में मांग पैदा करने के लिए सरकार को अधिक से अधिक उधार लेने का सुझाव दिया है। इस दौरान कांग्रेस नेता चिदंबरम ( Congress leader P Chidambaram ) ने धन जुटाने के सरकार को कुछ उपाय भी सुझाये। इन उपायों के अंतर्गत FRBM मानदंडों में ढील, विनिवेश में तेजी और वैश्विक बैंकों से धन उधार लेना शामिल है।

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अर्थव्यवस्था की दुर्गत को लेकर सरकार को नसीहत

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने रविवार को ट्वीट के माध्यम से अर्थव्यवस्था की दुर्गत को लेकर सरकार को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाए जिससे कि अर्थव्यवस्था को फिर से पुर्नजीवित किया जा सके। आपको बता दें कि देश की जीडीपी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में माइनस 24 प्रतिशत तक गिर गई है। एक के बाद एक ट्वीट में कांग्रेस नेता ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मांग बढ़ाना जरूरी है। 50 प्रतिशत गरीब परिवारों को कैश ट्रांसफर किया जाना चाहिए। जबकि मुफ्त अनाज बांटने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना भी जरूरी है।

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अर्थव्यवस्था को फिर से जीवित करने के लिए पैसे की जरूरत पड़ेगी

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने एक ट्वीट में कहा कि गोदामों में पड़े अनाज का उपयोग भुगतान करने में भी किया जा सकता है। लोक निर्माण कार्य पर इस तरह से खर्च करने पर बैंक की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और वो ज्यादा से ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को फिर से जीवित करने के लिए पैसे की जरूरत पड़ेगी। सरकार को इसके लिए कर्ज लेना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन सब योजना पर अमल करने के लिए धन की जरूरत होगी। ऐसे में अगर कर्ज भी लेना पड़े तो संकोच न करें।

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अंतिम उपाय के तौर पर राजकोषीय घाटे का मौद्रीकरण

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अधिक धन जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्वबैंक, एशियाई विकास बैंक आदि की 6.5 अरब डॉलर की पेशकश का इस्तेमाल कर सकती है। जबकि अंतिम उपाय के तौर पर राजकोषीय घाटे का मौद्रीकरण भी किया जा सकता है।

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