
Gujarat Cabinet Sworn
नई दिल्ली। गुजरात में आज दोपहर डेढ़ बजे भूपेंद्र पटेल ( Bhupendra Patel ) के मंत्रिमंडल ( Gujarat Cabinet Sworn ) का शपथ ग्रहण समारोह ( Oath Ceremony ) होगा। माना जा रहा है कि इस कैबिनेट में 27 मंत्री शपथ ले सकते हैं। यही नहीं 90 फीसदी नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी जबकि विजय रुपाणी कैबिनेट में शामिल रहे मंत्रियों को हटाया जा सकता है। यही वजह है कि दो बार मंत्रिमंडल शपथग्रहण समारोह टल गया।
बुधवार को कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लेना थी, लेकिन विरोध और असंतोष के चलते इसे गुरुवार 1.30 बजे तक टाल दिया गया। जानते हैं आखिर गुजरात कैबिनेट में क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत, किन नए चेहरों को मिल सकती है जगह, आगे क्या पड़ सकता है असर।
इसलिए दो बार टला शपथग्रहण
गुजरात के नए मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को शपथ ली। माना जा रहा था कि मंगलवार को उनके मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और नए मंत्री शपथ लेंगे, इसके बाद रात भर विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी रहा और बुधवार को शपथ ग्रहण की खबर आई, लेकिन एक बार फिर टाल दी गई।
निवर्तमान सरकार के कई मंत्रियों ने नए मंत्रिमंडल का विरोध किया और इसी वजह से मंत्रियों का शपथ ग्रहण गुरुवार दोपहर तक के लिए टाल दिया गया।
तीम महिलाओं समेत नए चेहरों को मौका
भूपेंद्र पटेल की नई कैबिनेट में तीन महिला विधायकों- संगीता पाटिल, मनीषा वकील और निमाबेन आचार्य को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा जगदीश पटेल (अमराईवाड़ी), शशिकांत पंड्या (दीसा), ऋषिकेश पटेल (विसनगर), गजेंद्र सिंह परमार (प्रांतिज), गोविंद पटेल (राजकोट), आरसी मकवाना (महुवा), जीतू वरानी (भावनगर), पंकज देसाई (नडियाड), कुबेर डिंडोर (संतरामपुर), केतन इनामदार (सावली), दुष्यंत पटेल (भरूच), नरेश पटेल(गणदेवी) और कनुभाई देसाई (पारदी) को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है।
पुराने मंत्रियों में इनको जगह मिलने की उम्मीद
नई कैबिनेट में रुपाणी सरकार में शामिल रहे 11 कैबिनेट मंत्रियों में से जिन चेहरों को जगह देने पर चर्चा है उनमें दिलीप ठाकोर, गणपत वसावा और जयेश रादडिया के नाम शामिल हैं।
इसलिए पड़ी बदलाव की जरूरत
गुजरात में बड़े फेरबदल के पीछे सबसे बड़ी वजह जिस बात को माना जा रहा है वो है आगामी विधानसभा चुनाव। दरअसल आरएसएस के एक सर्वे में बीजेपी को एंटी इनकंबेंसी का डर सता रहा है। यही वजह रही कि पहले सीएम विजय रुपाणी को हटाया गया और अब उनके मंत्रिमंडल के ज्यादातर चेहरों को हटाने की तैयारी है।
बीजेपी शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता है कि भूपेंद्र पटेल को कमान सौंपने के बाद उन्हें पुरानी टीम के साथ किसी भी तरह की तालमेल की दिक्कत हो। नए चेहरों या यूं कहें अपनी टीम के साथ भूपेंद्र पटेल की जिम्मेदारी आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करना है।
इस बदलाव के पीछे जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधाना भी मकसद है, ताकि चुनाव में किसी भी तरह की कोई गुंजाइश ना रहे।
आगे क्या हो सकता है असर?
गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के बड़े बदलावों के दो असर हो सकते हैं। एक बीजेपी के पक्ष में और दूसरा उन्हें सत्ता से दूर कर सकता है। दरअसल इस तरह पुराने दिग्गजों को हटाना अंदरुनी कलह को गहरा कर सकता है। इसका असर ये होगा कि चुनाव से पहले पार्टी में गुटबाजी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है नतीजा चुनाव में हार के तौर पर भी देखने को मिल सकता है।
यही नहीं नाराज चेहरे आने वाले समय में पार्टी का दामन छोड़कर विरोधी दलों में शामिल हो सकते हैं। ये पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे।
फायदाः इस बदलाव से फायदा ये होगा कि बीजेपी एंटीइंकबेंसी फेक्टर से उबर सकती है। पुराने नेताओं की छवि से जो नुकसान हो रहा है या जो माहौल बन रहा है वो पॉजिटिव रिस्पॉन्च में तब्दील हो सकता है। नतीजा विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक बार फिर अच्छी जीत मिल सकती है।
Published on:
16 Sept 2021 11:10 am
बड़ी खबरें
View Allराजनीति
ट्रेंडिंग
