जानिए क्या है आर्टिकल 35A, क्यों मचा था बवाल

Amit Kumar Bajpai | Updated: 06 Aug 2019, 12:22:16 AM (IST) राजनीति

  • All about Article 35A of Jammu-Kashmir हिंदी में
  • जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 35A से जुड़ी पूरी जानकारी
  • 65 साल बाद राष्ट्रपति ने खत्म किया राष्ट्रपति का आदेश

नई दिल्ली। दुनिया के स्वर्ग में अब आप भी अपना आशियाना बनवा सकेंगे। खूबसूरत वादियों के बीच आपका घर हो सकेगा और रोज इसकी बालकनी पर सुबह। जन्नत माने जाने वाले जम्मू-कश्मीर में तेज रफ्तार हाईवे, बड़े मॉल-होटल समेत विकास के नए रास्ते खुल सकेंगे। ऐसा सबकुछ इसलिए क्योंकि सोमवार को मोदी सरकार ने संसद में जम्मू-कश्मीर के Article 370 को खत्म करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही बीते काफी वक्त से विवादों में चल रहा आर्टिकल 35A भी समाप्त हो गया। राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से लागू राजकीय गजट भी पेश कर दिया। जबकि इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए थे और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन को रविवार देर रात से ही नजरबंद कर दिया गया था। इन सभी घटनाक्रमों के बीच यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर ( All about Article 35A of Jammu-Kashmir ) आर्टिकल 35A क्या है। पत्रिका डॉट कॉम की इस विशेष रिपोर्ट में देखिए जम्मू-कश्मीर के आर्टिकल 35A से जुड़ी पूरी जानकारी।

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आखिर आर्टिकल 35A क्या है?

  • सन 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदेश से संविधान में आर्टिकल 35A को जोड़ा गया था।
  • आर्टिकल 35A या अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए उस वक्त की केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 के तहत मिलने वाली शक्तियों का इस्तेमाल किया गया।
  • धारा 370 कानून में प्रावधान है कि जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक क्षेत्र के बाहर का निवासी इस राज्य में प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकता।
  • इतना ही नहीं, इस कानून में यह नियम भी है कि प्रदेश से बाहर का निवासी कोई भी व्यक्ति यहां की राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का फायदा नहीं उठा सकता और न ही प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल कर सकता है।

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आर्टिकल 35A के विरोध के कारण

  • आर्टिकल 35A का विरोध करने वाले इसके दो प्रमुख कारण बताते रहे हैं।
  • विरोध करने वालों की पहली दलील है कि आर्टिकल 35A जम्मू-कश्मीर में अन्य राज्यों के हिंदुस्तानी नागरिकों को स्थायी नागरिक मानने से रोकता है।
  • जबकि दूसरी दलील है कि इसकी वजह से अन्य राज्यों के नागरिक न तो जम्मू-कश्मीर में नौकरी पा सकते हैं और न ही प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं।
  • इतना ही नहीं अगर इस राज्य की लड़की किसी अन्य राज्य में शादी कर लेती है तो वो भी यहां पर संपत्ति के अधिकार से अलग हो जाती है।
  • यह संविधान में अलग से जोड़ा गया है जो विरोध का कारण है।

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आर्टिकल 35A के समर्थकों का तर्क

  • कई ऐसे भी हैं जो इसका समर्थन करते रहे हैं।
  • आर्टिकल 35A ( All about Article 35A of Jammu-Kashmir ) का समर्थन करने वालों में नेशनल कान्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस और सीपीएम शामिल हैं। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती की पार्टियों समेत अन्य दलों ने इसके बरकरार रहने को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
  • इनकी मांग थी कि आर्टिकल 35A को यूं ही जारी रहना चाहिए।
  • हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के मुताबिक आर्टिकल 35A जम्मू-कश्मीर के हित में नहीं है।

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कौन हैं जम्मू-कश्मीर के स्थायी नागरिक

  • जम्मू-कश्मीर का संविधान सन 1956 में बनाया गया था।
  • इसी के तहत स्थायी नागरिकता की परिभाषा भी तय की गई थी।
  • राज्य के संविधान के मुताबिक जो व्यक्ति 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा था और उसने कानूनी ढंग से यहां संपत्ति का अधिग्रहण किया हो, वो ही यहां का स्थायी नागरिक है।
  • इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति 10 वर्षों से इस राज्य में रह रहा हो या फिर 1 मार्च 1947 के बाद राज्य से माइग्रेट होकर (मौजूदा पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में) चले गए हों, लेकिन प्रदेश में वापस बसने के परमिट के साथ लौटें हों।

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क्यों हुई हटाने की मांग?

  • आर्टिकल 35A को हटाने की मांग इसलिए की जा रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के द्वारा लागू नहीं किया गया।
  • इसके अलावा यह आर्टिकल पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आज भी राज्य के मूल अधिकारों और पहचान से अलग रखता है।

यों तो आर्टिकल 370 और 35A ( All about Article 35A of Jammu-Kashmir ) आज खत्म हो गया, लेकिन क्या वाकई इससे जम्मू-कश्मीर की समस्या पूरी तरह खत्म हो पाएगी। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। देश-दुनिया से जुड़ी हुई ताजा जानकारी के लिए बने रहिए पत्रिका डॉट कॉम के साथ।

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