
पाकिस्तान चुनाव: अब पाकिस्तान में होगा 'आर्मी ब्वॉय' का राज!
इस्लामाबाद। इस बार पाकिस्तान में आम चुनाव नाटकीय तरीके संपन्न हुआ और उसका परिणाम भी उसी अंदाज में आया है। अभी तक के चुनावी रुझानों के मुताबिक विश्व के चर्चित क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ को बहुमत की ओर अग्रसर है। लेकिन इमरान की इस आश्चर्यजनक जीत पर काउंटिंग शुरू होने के साथ ही सवाल उठने लगे। वहां के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये इमरान की जीत न होकर पाक 'आर्मी ब्वॉय' की जीत है। पाकिस्तानी सेना ने लोकतांत्रिक चुनावों में हस्तक्षेप कर इमरान खान को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। यही कारण है कि पाकिस्तान में लोग इमरान को 'आर्मी ब्वॉय' कहने लगे हैं।
आर्मी ब्वॉय के पर्याय क्यों बने इमरान?
इस बात को समझने के लिए इमरान की राजनीतिक करिअर को जानना जरूरी है। इमरान ने 1996 में पाकिस्तान तहरीक ए इंसान नाम से अपनी पार्टी बनाई। उसके बाद हुए दो चुनावों में इमरान को एक भी सीटें नहीं मिली। 2008 का चुनाव उनकी पार्टी नहीं लड़ी। 2013 में वे ट्रिपल-पी और आसिफ अली जरदारी के सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और अमरीकी हमलों का विरोध कर चुनाव लड़ा और इमरान की पार्टी तीसरी बड़ी सबसे पार्टी बन गई। पिछले पांच साल के दौरान उन्होंने भारत में 2014 के चुनावों की तरह भ्रष्टाचार को पाकिस्तान में मुख्य मुद्दा बनाया। इसे नवाज शरीफ सरकार पर हमला बोलने का सबसे बड़ा हथियार बनाया। नवाज सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और पनामा पेपर्स में सेना के सहयोग से उन्हें फंसाया गया। इस मामले में वर्तमान में नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम जेल में है। उन्होंने सेना से मिलकर पीएमएल-एन यानी नवाज की पार्टी को बदनाम किया।
भारत विरोध पर क्यों उतरी पीटीआई
इमरान पहले भारत से संबंधों की बेहतरी की बात करते थे उन्होंने अचानक उसमें नाटकीय बदलाव लाते हुए पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में सेना को खुश करने के भारत विरोधी एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया। इतना ही उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर पीटीआई की सरकार बनी तो वो कश्मीर की आजादी का समर्थन करेंगे। यहां पर आपको बता दें कि भारत में कुछ वर्ष पहले जब मीडिया कॉन्क्लेव में शामिल होने पर उन्होंने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की वकालत की थी, लेकिन अब वही इमरान भारत से दुश्मनी निकालने की बात करते हैं। यानी इमरान एक राजनेता नहीं बल्कि सेना की भाषा बोलने लगे हैं। अफगानिस्तान में अमरीका और भारत की मौजूदगी का भी उन्होने विरोध किया। पीएम मोदी को सबक सिखाने की भी उन्होंने बातें की है। चुनाव प्रचार के दौरान सेना से हाथ मिलाने का भी उनपर आरोप लगा है। आर्मी से सांठगांठ की वजह से चुनाव के दौरान से ही उनके विरोधी उनका नाम 'आर्मी ब्वॉय' के रूप में उछाल चुके हैं। अब वही आर्मी ब्वॉय नाटकीय तरीके से हुए चुनाव और मतगणना में सबसे बड़ी पार्टी बनने और सामान्य बहुमत को छूने की ओर अग्रसर है।
पांच पाट्रियों ने चुनाव को बताया धोखा
जिस तरीके से पाकिस्तान में चुनाव कराया गया और उसका परिणाम घोषित किया गया उसे सेना और इमरान का षडयंत्र मानते हुए बीती रात पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ, ट्रिपल-पी के बिलावल भुट्टो, एमक्यूएम सहित पांच प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस चुनाव को सेना का धोखा करार दिया है। इन पार्टियों ने चुनाव परिणामों को रिजेक्ट कर दिया है। इतना ही नहीं चुनाव काउंटिग के परिणामों को बीती मध्य रात्रि में प्रसारण पर सेना ने रोक लगा दी। आपको बता दूं कि पाक सेना ने चार लाख से अधिक पाक सेना को चुनाव ड़यूटी पर तैनात किया था। पाकिस्तान में थल, वायु और नौसेना के कुल सैनिकों की संख्या करीब साढ़े लाख है। यानि पूरी की पूरी थल सेना को चुनाव ड्यूटी पर लगा दिया गया था।
15 फीसद मतदाता नहीं डाल पाए वोट
चुनाव के दौरान पाक सेना ने विरोधी दलों के मतदाताओं को बड़ी संख्या में मतदान करने से रोका, देर शाम मतदान के लिए लाखों की संख्या में लाइन लगे लोगों को वोट नहीं डालने दिया गया। राजनीतिक पाट्रियों की अपील के बावजूद चुनाव आयोग ने मतदान को संपन्न करा दिया। एक अनुमान के मुताबिक चुनाव आयोग के इस निर्णय से करीब पाक के 15 फीसदी मतदाता वोट नहीं डाल सके। यही कारण है कि पाकिस्तान में इस इलेक्शन को विरोधी दल के नेता सलेक्शन की संज्ञा दे रहे हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अब पाकिस्तान में आर्मी ब्वॉय राज करेगा।
Published on:
26 Jul 2018 10:30 am
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