
राफेल डील पर कांग्रेस बोली- मोदी के मितरों की तिजोरी भरने के लिए करदाता देंगे 1.30 लाख करोड़
नई दिल्ली। राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि पीएम ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड(एचएएल) के साथ हुए समझौते को रद्द कर निजी क्षेत्र की ऐसी कंपनी को ठेका दिया जो समझौते के समय धरातल पर थी ही नहीं। इसके साथ ही कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर भी मोदी सरकार को घेरना जारी रखा है। कांग्रेस की आधिकारिक ट्विटर हैंडल से राफेल को लेकर कई तीखे ट्वीट किए गए। कांग्रेस ने कहा कि देशवासियों की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। आखिर देश बड़ा या दोस्ती?
मोदी सरकार ने पहुंचाया रिलायंस को फायदा
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूपीए सरकार ने राफेल सौदे के तहत फ्रांस की कपंनी डसाल्ट एविएशन के साथ ज्वाइट वेंचर में एचएएल को तकनीकी हस्तांतरण के लिए समझौता किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने एचएएल के साथ किए गए इस समझौते को रद्द कर दिया। सरकार ने इसके बदले इसी काम के लिए रिलायंस डिफेंस लिमिटेड नाम की कंपनी ने डसाल्ट एविऐशन के साथ ज्वाइट वेंचर बनाया है।
समझौते से 12 दिन पहले ही बनी कंपनी
सुरजेवाला ने कहा कि यह कंपनी मोदी द्वारा फ्रांस सरकार के साथ 10 अप्रैल 2015 को किए गए समझौते के 12 दिन पहले यानी 28 मार्च 2015 को बनाई गई थी। इसके अलावा जिस रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय ने राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण का लाईसेंस दिया था उसका गठन इस सौदे के 14 दिन बाद यानी 24 अप्रैल 2015 को हुआ।
जो कंपनी थी ही नहीं, उसे जारी हुआ लाइसेंस
राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि रिलायंस की कंपनी ने जब लडाकू विमान बनाने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया था उस समय तक उसके पास अपनी जमीन नहीं थी और ना ही ढांचागत व्यवस्था थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने गुजरात के अमरेनी का जो पता दिया है उस जगह से कोई और कंपनी संचालित हो रही है। उस कंपनी का मालिक भी कोई और ही है।
राफेल के नाम पर 1.30 लाख करोड़ का ठेका
कांग्रेस ने कहा कि रिलायंस की कंपनियों को राफेल का कुल 1.30 लाख करोड़ रुपए का ठेका दिया गया। इसमें एक लाख करोड़ रुपए की ऑफसेट व्यवस्था है जिसके तहत इन विमानों की मरम्मत तथा उनसे संबंधित देखरेख का काम 50 साल तक रिलायंस की इन कंपनियों को ही करना है।
Published on:
27 Jul 2018 08:06 pm
