11 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सोशल मीडिया पर बिगाड़ी जा रही है राजनेताओं की छवि, हिटलिस्‍ट पर सबसे ऊपर राहुल गांधी

निगेटिव पब्लिसिटी के पीछे विरोधियों का हाथ माना जा रहा है। ताकि उन उभरते राजनेताओं की छवि को धूमिल करना संभव हो सके जो सत्‍ता के विकल्‍प बन सकते हैं।Image spoil
3 min read
Google source verification

image

Dhirendra Kumar Mishra

Nov 06, 2018

Rahul Gandhi

सोशल मीडिया पर बिगाड़ी जा रही है राजनेताओं की छवि, हिटलिस्‍ट पर सबसे ऊपर राहुल गांधी

नई दिल्‍ली। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय राजनीति में अहम नेताओं की छवि को खराब करने का फैशन ट्रेंड में है। इस मामले में 2012 से लेकर 2014 तक वर्तमान में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की छवि पर हमला हुआ। इसके पीछे विरोधियों की एक सोची समझी चाल थी। हालांकि अब इसमें उनके अलावा अखिलेश यादव, तेजप्रताप यादव, मायावती, तेजस्‍वी यादव, ममता बनर्जी, चंद्राबाबू नायडू आदि शामिल हो गए हैं। इस काम को अंजाम देने वालों को इसके बदले पैसा दिया जाता है। कहने के मतलब ये है ये हमले अब और तेज हो गए हैं। निगेटिव पब्लिसिटी के पीछे विरोधियों का हाथ माना जा रहा है। ताकि उन उभरते राजनेताओं की छवि को धूमिल हो सके जो सत्‍ता के विकल्‍प बन सकते हैं।

निगेटिव पब्लिसिटी
सियासी मोर्चे पर विरोधियों को जनता की नजर में छवि गिराने को निगेटिव मार्केटिंग माना जाता है। नेगेटिव मार्केटिंग एक सोची समझी रणनीति है। इसे कुछ लोग एक बंद कमरे के अंदर बैठकर राजनीतिक फायदे के लिए अंजाम देते हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह का पोस्‍ट करने और मीडिया में वायरल करने के लिए पेशेवरों को पैसे दिए जाते हैं। इस तरह का एक मामला कुछ दिनों पहले सामने आया था। इस मामले में यूट्यूब पर ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो ब्लॉक किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे भाजपा के अंदर काम कर रहे आईटी सेल में युवा दूसरी पार्टी पर हमला करते हैं और उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। यूट्यूब ब्लॉक के बाद इस बात पर काफी बवाल हुआ। ध्रुव राठी के ऊपर FIR तक हो गई। 2012 के बाद लगातार 2014 तक राहुल गांधी की छवि पर हमला किया गया और यह दिखाने की कोशिश की गई कि राहुल एक नाकारा इंसान हैं। यह हमला राहुल गांधी पर एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है, मौजूदा वक्त में राहुल गांधी के अलावा इसमें और भी बहुत से नाम जुड़ गए हैं। जैसे अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव यह सभी वह चेहरे हैं जो देश के अंदर युवा राजनीति के चेहरे बताए जाते हैं।

2014 के बाद ट्रेंड में आई तेजी
राहुल गांधी पर इस तरह के हमले 2014 के बाद बहुत तेजी से बढ़े हैं। 2017 में उत्तर प्रदेश के अंदर हुए विधानसभा चुनाव में भी यह ट्रेंड देखने को मिला था। उक्‍त चुनाव में सीधे तौर पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी को टारगेट किया गया था। मौजूदा वक्त में अगर आप सोशल मीडिया पर जाएं तो आपको खासकर राहुल गांधी पर आपत्तिजनक पोस्ट देखने को मिल जाएंगे। यही ट्रेंड नए अंदाज में मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल रहा है। इन चुनावों में राहुल गांधी पर हमले जारी हैं। उन्‍हें कन्‍फ्यूज्‍ड, महादेव के भक्‍त व अन्‍य कई नामों से लोकप्रिय किया जा रहा है ताकि राहुल की छवि पब्लिक में खराब हो।

बढ़ा हमले का दायरा
लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही ये हमले राहुल गांधी तक सीमित न रहकर यह पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गांधी तक पर हो रहे हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी तक को नहीं बख्शा जा रहा है और पोस्ट इतनी अश्लील और इतनी आपत्तिजनक है शायद आपको भी देख कर यकीन न हो उन पोस्टों में ऐसा झूठ बताया जाता है जिसे पढ़कर आपका भी दिमाग पलट जाए। गांधी परिवार को सीधे तौर पर मुस्लिम परिवार बता दिया जाता है, गांधी परिवार को देश का सबसे घोटालेबाज परिवार भी बताया जाता है।

कैसे मिलता है पैसा
आईटी सेल में काम करने वाले युवकों को पोस्ट के हिसाब से पैसा दिया जाता है जिसकी पोस्ट जितनी ज्यादा शेयर होगी उसको दाम उतने ही ज्यादा मिलेंगे। यही नहीं चुनाव के वक्त हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण जैसा माहौल भी तैयार किया जाता है। ताकि चुनाव के वक्त धर्म के नाम पर वोटों को बदला जा सके। इस तरह से आईटी सेल आपके दिमाग के साथ आपकी सोच के साथ खेलता है। इसके पीछे युवाओं के भागने की मुख्‍य वजह भारत में बेरोजगारी का बड़े पैमाने पर होना है। राजनीतिक पार्टी इस तरह के षड्यंत्र कर रही हैं जिसमें बेरोजगार युवक अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं।