
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS)
Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ वाले बयान पर शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता अच्छी तरह जानती है कि असली शेर कौन है और शेर की खाल में लोमड़ी कौन घूम रही है। विधानसभा के चुनाव में ये पता चल गया, किसे 20 सीटें मिलीं और किसे 60 सीटें मिलीं। नगर परिषद और जिला परिषद के नगर निकायों के चुनाव में पता चला कि कौन असली शिवसेना का शेर है। इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 'ऑपरेशन टाइगर' पर तंज कसते हुए कहा था कि शेर का ऑपरेशन करने वाला आज तक कोई पैदा नहीं हुआ है। जब हम असली शेर निकालेंगे, तो ये सारे भाग जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की प्रवक्ता ज्योति वाघमारे ने कहा, “ऑपरेशन होगा या नहीं होगा और अगर होगा तो कब होगा, इसका फैसला हमारे सर्जन करेंगे। हम जैसे कंपाउंडर इस पर बोलें तो ठीक नहीं है। लेकिन हमारे सर्जन और डीन की योग्यता को महाराष्ट्र ही नहीं, पूरा देश देख चुका है।”
उन्होंने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि जो व्यक्ति कल तक घर से बाहर नहीं निकलता था, वह आज दर-दर घूम रहा है। जो पहले मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात नहीं करता था, वह आज हर किसी से मिल रहा है। वाघमारे ने कहा कि अगर यह सब एकनाथ शिंदे के डर की वजह से हो रहा है और इसी डर के कारण उद्धव ठाकरे लोगों से मिलकर काम कर रहे हैं, तो यह डर उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि ऐसा डर होना जरूरी है।
राज्यसभा सांसद ज्योति वाघमारे ने अपने बयान में शेर और लोमड़ी का उदाहरण देते हुए उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जंगल में अगर कोई जानवर दो कदम पीछे चला जाए तो समझ लेना शेर आ रहा है। लेकिन अगर शेर खुद दो कदम पीछे चला जाए तो समझ लेना कि एकनाथ शिंदे आ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि टाइगर का ऑपरेशन नहीं हो सकता, लेकिन टाइगर कौन है और टाइगर की खाल पहने लोमड़ी कौन है, यह महाराष्ट्र समझ चुका है। वाघमारे ने दावा किया कि धनुष-बाण चुनाव चिह्न शिवसेना की आन, बान और शान है और इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात करने वाले लोगों ने अपनी राजनीतिक पहचान खो दी है।
उनके मुताबिक, एकनाथ शिंदे ही शिवसेना के असली शेर हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के नतीजों से लेकर नगरपालिका चुनावों तक यह बात साबित हो चुकी है और पूरे महाराष्ट्र ने इसे स्वीकार किया है।
इससे पहले उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर तीखा हमला किया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की उस दलील का समर्थन किया, जिसमें पार्टी की पहचान को लेकर अंतिम फैसला आने में देरी होने की स्थिति में अविभाजित शिवसेना के चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को फ्रीज करने की मांग की गई थी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि जिन लोगों ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न ‘चुराया’ है, उन्हें उसी चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करके अपनी सत्ता मजबूत करने और शासन चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
ठाकरे ने कहा कि इस कानूनी लड़ाई में करीब चार साल बीत चुके हैं। इस दौरान दो बड़े चुनाव भी हो चुके हैं, जबकि मामला लगातार तारीख-दर-तारीख आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस देरी का राजनीतिक नुकसान उनकी पार्टी को उठाना पड़ रहा है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनकी पार्टी का ही अधिकार है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर शासन चलाने में अक्षम होने का आरोप लगाया और कहा कि यह विवाद पैदा ही नहीं होना चाहिए था।
एकनाथ शिंदे के उस बयान पर भी ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने चुनाव चिह्न को फ्रीज करने को बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को फ्रीज करने के समान बताया था। ठाकरे ने तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘फ्रीज्ड माइंड’ वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘धनुष-बाण’ पर बोलने का नैतिक अधिकार वे लोग खो चुके हैं, जिन्होंने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद खड़ा किया।
Updated on:
10 Sept 2026 08:41 am
Published on:
10 Sept 2026 08:26 am
