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दुर्गा पूजा से रथ यात्रा तक, क्या त्योहारों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं? जानिए चुनौतियां और जमीनी हकीकत

भारत में त्योहारों और उत्सवों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियां एक जटिल और बहुआयामी विषय हैं। आइए जानते हैं क्या हमारे पसंदीदा त्योहारों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं?
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Vinay Shakya

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Oct 21, 2026

Security arrangements for festivals

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत में त्योहारों और उत्सवों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियां एक जटिल और बहुआयामी विषय हैं। ये चुनौतियां हर वर्ष लाखों लोगों की भागीदारी, अस्थायी संरचनाओं, भीड़ नियंत्रण, तकनीकी निगरानी और आपात प्रतिक्रिया तंत्र की मजबूती पर निर्भर करती हैं। हालिया घटनाओं और समीक्षा रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि सुरक्षा में सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं, लेकिन कई कमजोरियां अभी भी बनी हुई हैं।

सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदा चुनौतियां

कोलकाता में 17 अक्टूबर को दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीड़ दुर्घटना में करीब 19 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। बारिश के दौरान अचानक भगदड़ मचने से यह घटना हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों का पता चला। पुलिस ने आयोजकों और सुरक्षा कर्मियों को हिरासत में लिया और जांच शुरू की।

ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा के दौरान भीड़ के अचानक बढ़ने से कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने 33 लोगों को प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन देने के बाद अस्पताल भेजा। इससे स्पष्ट होता है कि भीड़ नियंत्रण और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

साल 2019 के कुंभ मेले में 240 मिलियन से अधिक तीर्थयात्रियों की भागीदारी ने दिखाया कि अत्यधिक भीड़, सीमित मार्ग, असंगठित पार्किंग और संचार की कमी जैसी चुनौतियां कितनी गंभीर हो सकती हैं।

सुरक्षा सुधार के प्रयास और रणनीतियां

पिछले वर्ष गृह मंत्रालय ने राज्य पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे बड़े जनसमूह वाले आयोजनों के लिए आयोजकों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करें और आयोजन के अनुभवों का रिकॉर्ड रखें। इससे स्पष्ट एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और बेहतर समन्वय की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

पुरी रथ यात्रा–2026 की समीक्षा में पुलिस अधिकारियों ने तकनीकी निगरानी, नियंत्रण कक्ष, मौसम संबंधी आकस्मिकताओं, और खोए हुए लोगों की पहचान व पुनर्मिलन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर चर्चा की। इसी प्रकार, वाराणसी में दुर्गा पूजा और दशहरा के आयोजन से पूर्व प्रशासन ने बिजली, सड़क और सार्वजनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

विशेष सुरक्षा तंत्रों का उपयोग

दिल्ली में दशहरा समारोह के दौरान प्रधानमंत्री की संभावित उपस्थिति को देखते हुए तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया। इसमें लगभग 2,500 केंद्रीय सशस्त्र बल और दिल्ली पुलिस के जवान, विशेष सेल के SWAT कमांडो शामिल थे, साथ ही ट्रैफिक नियंत्रण की भी व्यवस्था की गई।

साइबर सुरक्षा की दृष्टि से, 2025 के महाकुंभ मेले में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए विशेष टीम ने कार्य किया और आयोजन के दौरान कोई साइबर हमला सफल नहीं हुआ।

विधिक और संस्थागत सुधार

एक अध्ययन में यह बताया गया है कि धार्मिक आयोजनों के लिए मौजूदा कानून जैसे- आईपीसी, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और 2023 की भारतीय न्याय संहिता, विशेष रूप से पर्याप्त नहीं हैं। जिससे जवाबदेही और कार्यान्वयन में बाधा आती है। ORF की रिपोर्ट में एसओपी और मल्टी-एजेंसी प्रोटोकॉल को कानूनी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण, निकासी और एजेंसियों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां सुनिश्चित की जा सकें।

नवीन तकनीकी उपाय

डिजिटल प्रवेश नियंत्रण जैसे क्यूआर कोड और आरएफआईडी टैग का उपयोग सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके अतिरिक्त, भीड़ के व्यवहार का विश्लेषण कर उसे नियंत्रित करने के लिए मनोवैज्ञानिक मॉडल का उपयोग भी प्रभावी माना जा रहा है।

हालांकि कई सुधार हुए हैं, फिर भी आपात निकासी योजनाओं की कमी, असंगठित प्रवेश-निकास मार्ग, और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जैसा कि कोलकाता की घटना में स्पष्ट हुआ। इसके अलावा, कानूनी ढांचे में स्पष्टता और तकनीकी अपनाने में असमानता भी चुनौती बनी हुई है।

चुनौतियां और जमीनी हकीकत

त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियां जमीनी हकीकत, तकनीकी क्षमता, कानूनी स्पष्टता और संस्थागत समन्वय पर निर्भर करती हैं। हालिया घटनाओं ने यह दिखाया है कि सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं। जैसे- एसओपी का निर्माण, तकनीकी निगरानी, और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती। लेकिन आपात योजना, कानूनी मजबूती और व्यवहारिक प्रशिक्षण में और सुधार की आवश्यकता है।

व्यवहारिक सुझाव

राज्य और केंद्र मिलकर एक राष्ट्रीय मानक तैयार करें, जिसमें आयोजकों, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट हों। साथ ही, आयोजन स्थल पर वास्तविक समय में निगरानी, ड्रोन, डिजिटल नियंत्रण और व्यवहार विश्लेषण को अपनाना चाहिए। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि आम जनता का विश्वास भी बढ़ेगा और त्योहारों का आनंद सुरक्षित रूप से मनाया जा सकेगा। इस दिशा में आगे बढ़ना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि प्रत्येक नागरिक, आयोजक और सुरक्षा एजेंसी की भी साझा जिम्मेदारी है।