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आखिर वनकर्मियों ने दिन-रात 24 घंटे तक जंगल में छूपकर किसका किया इंतजार..

जंगल में तीन जगह दिखे पैंथर,
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Pratapgarh

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जिले में वन्यजीव गणना
प्रतापगढ़
वन विभाग की ओर से जंगलों में वाटर ***** पद्धति से वन्यजीवों की गणना 29 मई सुबह 10 बजे से बुधवार सुबह 10 बजे तक की गई। जिले में कुल 77 वाटर ***** पर गणना की गई। इस दौरान तीन स्थानों पर पैंथर दिखाई दिए। इसमें एक जाखम के पास, एक नागलिया डेम के पास और एक पीपलखूंट के केलामेला में दिखाई दिया। इस दौरान वनकर्मियों ने देखा कि पैंथर पानी पीने के बाद पुन: अपने रास्ते जंगल में चले गए। इसके साथ ही कई वन्यजीवों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
उपवन संरक्षक अमरसिंह गोठवाल ने बताया कि जिले में 77 वाटर ***** बनाए गए थे। इन पर दो-दो कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें से छोटीसादड़ी रेंज में 9, प्रतापगढ़ में 18, पीपलखूंट में 11, धरियावद में 17, देवगढ़ में 9 और बांसी रेंज में 15 वाटर ***** पर वन्यजीव गणना की गई। इसके साथ ही सीतामाता अभयारण्य में 56 वाटर ***** पर गणना की गई।
इसके साथ ही रात में सियार, जरख, लोमड़ी आदि भी दिखाई दिए। वहीं दिन में बंदर, मोर, चौसिंगा समेत कई वन्यजीव दिखाई दिए।
धरियावद
सीतामाता वन्यजीव अभयारण में वन्यजीव गणना बुधवार सुबह सम्पन्न हुई। अभ्यारण क्षेत्र के 23 प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर सीतामाता वन्यजीव रेन्ज जाखम एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय के 37 वनकर्मियों, 48 वन सुरक्षा प्रबंधन समिति सहित वन्यजीव प्रेमियों ने सहयोग दिया। क्षेत्रीय वन अधिकारी दारासिंह राणावत ने बताया कि पूर्णिमा के दिन मंगलवार सुबह 10 बजे से शुरू हुई वन्यजीव गणना बुधवार सुबह 10 बजे तक चली। इस दौरान 160 सियार, 25 जरख, 4 पैन्थर, 18 जंगली बिल्ली, 11 बिज्जू, 121 जंगली मुर्गे, 432 मोर, 220 रोजडें, 64 जंगली सुअर, 13 बाज, 602 लंगूर, 10 सेहीं, 15 चौसिंगा, 18 खरगोश, 7 उल्लू गणना के दौरान दिखाई दिए। वन्यजीव गणना में वन्यजीव अभयारण के रेन्ज अधिकारी मनोज औदिच्य, उडनदस्ता दिनेश मीणा, क्षेत्रीय वन अधिकारी दारासिंह राणावत, पुष्करलाल वैष्णव, संगीता मीणा, कृष्णप्रतापसिंह, के अलावा चितोडगढ़़ से 93 स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों के दल एवं धरियावद के पर्यावरण प्रेमियों, ईडीसी सदस्यों ने सहयोग दिया।
दिखी उडऩ गिलहरी
गणना के दौरान क्षेत्रीय वन अधिकारी राणावत ने सेणाबावडी, आरामपुरा वनखंड मेें उडन गिलहरी देखी। विभाग के अनुसार इस बार उडन गिलहरी की संख्या में मामूली बढोत्तरी हुई।
गत वर्ष के मुकाबले बढ़ी वन्यजीवों की संख्या
सीतामाता अभयारण वन क्षेत्र में गत वर्ष जहां 1592 वन्यजीव गणना के दौरान दिखाई दिए। वहीं इस बार 1860 वन्यजीवों की गणना हुई। इनमें मोर,लंगूर, रोजडों जैसे वन्यजीवों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई।
इन जगह रही पैन्थर की हलचल
जॉखम रेन्ज के मनोजकुमार औदिच्य ने बताया कि पूर्णिमा एवं चांदनी रात्रि के चलते वन्यजीवों की गणना प्रभावी रूप से हुई। इसके लिए वन्य अभयारण क्षेत्र में बनाए गए 17 वॉटर ***** पर गणना हुई। जिसमें मोगिया, जाखम डेम, पुंगा तालाब, केली, झर, ग्यासपुर घाटा में पैन्थर की हलचल दिखाई दी।