
घरेलू उड़ानों पर ही रहेगा फोकस, PC- IANS
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद छोटी दूरी की उड़ानों को अपने कारोबार का प्रमुख आधार बनाए रखेगी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने मंगलवार को कहा कि एयरलाइन की भविष्य की विकास रणनीति उसकी मौजूदा लागत-कुशल परिचालन व्यवस्था पर आधारित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार करते समय कंपनी घरेलू और क्षेत्रीय उड़ानों की दक्षता से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'एविएशन इंडिया एंड साउथ एशिया 2026' सम्मेलन में वॉल्श ने इंडिगो की विस्तार योजनाओं, नए विमानों की डिलीवरी और परिचालन लागत से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए नए अंतरराष्ट्रीय अवसर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन अवसरों के कारण उसके मौजूदा सफल कारोबारी मॉडल से ध्यान नहीं हटना चाहिए।
वॉल्श ने बताया कि इंडिगो के बेड़े में वर्तमान में चार एयरबस ए321एक्सएलआर विमान मौजूद हैं। कंपनी को 2026 के अंत तक एक और विमान मिलने की उम्मीद है। इसके बाद दिसंबर 2027 तक इस श्रेणी के विमानों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो जाने का अनुमान है।
ए321एक्सएलआर लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता वाला नैरो-बॉडी विमान है। इसकी मदद से एयरलाइन अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार कर सकती है। इस विमान का इस्तेमाल उन विदेशी मार्गों पर भी किया जा सकता है, जहां लंबी दूरी की परिचालन क्षमता की आवश्यकता होती है।
वॉल्श ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार इंडिगो की भविष्य की योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, एयरलाइन अपनी मौजूदा घरेलू और क्षेत्रीय उड़ान सेवाओं को मजबूत बनाए रखने पर भी समान रूप से ध्यान देगी।
इंडिगो अपने बेड़े में एयरबस ए350-900 वाइड-बॉडी विमानों को भी शामिल करने की तैयारी कर रही है। वॉल्श के अनुसार, इन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 की दूसरी तिमाही से शुरू होने की संभावना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नए विमान प्रकार का परिचालन शुरू करने से पहले कंपनी को व्यापक स्तर पर तैयारी करनी होगी। इसमें विमान संचालन से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करना भी शामिल है।
वॉल्श ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ए350 विमानों को बेड़े में शामिल करने को लेकर उत्साह के बीच कंपनी को अपनी मौजूदा शॉर्ट-हॉल सेवाओं की परिचालन दक्षता से ध्यान नहीं हटाना चाहिए।
इंडिगो ने पट्टे पर लिए गए बोइंग 787 वाइड-बॉडी विमानों का परिचालन बंद कर दिया है। अब कंपनी भविष्य में अपने ए350 विमानों के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
वॉल्श ने कहा कि इंडिगो की सबसे बड़ी ताकत उसकी दक्ष और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत है। कंपनी ने इसी कारोबारी मॉडल के आधार पर भारतीय विमानन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है।
उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विस्तार के दौरान भी लागत नियंत्रण और परिचालन दक्षता बनाए रखना आवश्यक होगा। कंपनी को नए अवसरों का लाभ उठाने के साथ मौजूदा सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सुरक्षित रखनी होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विमानन क्षेत्र में बढ़ती लागत के बीच एयरलाइंस के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन के दौरान वॉल्श ने एयरलाइंस और हवाई अड्डा संचालकों के बीच बेहतर साझेदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट संचालकों को बुनियादी ढांचे में निवेश करते समय लागत और उसके उपयोग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
वॉल्श पहले भी भारत में हवाई अड्डा शुल्क और करों को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका मानना है कि कम शुल्क और प्रतिस्पर्धी लागत संरचना से भारतीय विमानन बाजार के विस्तार को प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट संचालकों और एयरलाइंस के बीच प्रभावी समन्वय विमानन क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है।
इंडिगो के बेड़े में फिलहाल 440 से अधिक विमान हैं। कंपनी ने वर्ष 2030 तक विमानों की संख्या बढ़ाकर लगभग 600 करने का लक्ष्य रखा है।यह विस्तार इंडिगो की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, वॉल्श ने स्पष्ट किया है कि बेड़े का आकार बढ़ने के बावजूद शॉर्ट-हॉल सेवाएं कंपनी के कारोबार का प्रमुख आधार बनी रहेंगी।
विली वॉल्श ने 3 अगस्त 2026 को इंडिगो के सीईओ का पद संभाला था। इंटरग्लोब एविएशन के निदेशक मंडल ने 31 मार्च 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्होंने पीटर एल्बर्स का स्थान लिया, जिन्होंने मार्च में पद छोड़ दिया था।
इंडिगो से जुड़ने से पहले वॉल्श इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के महानिदेशक थे। वह ब्रिटिश एयरवेज और इंटरनेशनल एयरलाइंस ग्रुप जैसे प्रमुख विमानन संगठनों का नेतृत्व भी कर चुके हैं। अब उनके नेतृत्व में इंडिगो अंतरराष्ट्रीय विस्तार और अपने मौजूदा कारोबारी मॉडल के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
Updated on:
3 Nov 2026, 4:11 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 4:11 PM IST
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