
दीवाली की रौनक़ के बीच व्यापारी UPI शुल्क स्थगित होने से दुकानदारों को राहत, ग्राहकों के लिए भुगतान पहले की तरह निःशुल्क। (फोटो डिजाइन : ChatGPT)
दीवाली आने वाली है। बाज़ारों में रंग-बिरंगी झालरें सजने लगी हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार की उम्मीदें जाग उठी हैं और मिठाई की दुकानों में त्योहार की मिठास घुल रही है। इसी रौनक़ के बीच कल्पना कीजिए एक छोटी-सी दुकान की, जहाँ दुकानदार दिनभर की कमाई गिनने के बजाय मोबाइल पर आने वाली भुगतान की आवाज़ सुनकर मुस्कुराता है। लेकिन इसी मुस्कान के पीछे एक फ़िक्र भी थी—क्या अब डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर उसकी कमाई का कुछ हिस्सा UPI शुल्क में चला जाएगा?
इस चिंता के बीच 13 अक्टूबर को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ( NPCI) ने महत्वपूर्ण घोषणा की। 15 अक्टूबर से लागू होने वाला प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी व्यापारी छूट दर शुल्क दीवाली के बाद तक स्थगित कर दिया गया। नई तारीख़ अलग से अधिसूचित होगी। यानी आज से बड़े यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। व्यापारियों को त्योहार के व्यस्त दिनों में राहत मिली है।
नई व्यवस्था के अनुसार, व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले चुनिंदा यूपीआई भुगतान ₹2,000 से अधिक होने पर 0.4 प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित है। ₹75,000 या उससे अधिक की राशि पर शुल्क अधिकतम ₹300 रहेगा। उदाहरण के लिए, ₹10,000 की ख़रीदारी पर व्यापारी का शुल्क ₹40 होगा। यह कोई सरकारी कर नहीं, बल्कि भुगतान प्रक्रिया संचालित करने वाली संस्थाओं के बीच बाँटा जाने वाला शुल्क है।
प्रस्तावित सामान्य व्यापारी दर पर गणना; अभी लागू नहीं
| भुगतान | दर | शुल्क |
|---|---|---|
| ₹2,000 | शून्य | ₹0 |
| ₹3,000 | 0.4% | ₹12 |
| ₹5,000 | 0.4% | ₹20 |
| ₹10,000 | 0.4% | ₹40 |
| ₹25,000 | 0.4% | ₹100 |
| ₹50,000 | 0.4% | ₹200 |
| ₹75,000 | अधिकतम सीमा | ₹300 |
स्रोत: केंद्रीय वित्त मंत्रालय, 15 सितंबर 2026। राशि की गणना अधिसूचित प्रस्तावित दर से की गई है। विशेष श्रेणियों की अलग दरें हो सकती हैं।
त्योहार पर कोई परिवार ₹10,000 की मिठाइयाँ ख़रीदे या ₹50,000 के कपड़े, प्रस्तावित व्यापारी शुल्क का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तियों के बीच यूपीआई से धन हस्तांतरण निःशुल्क रहेगा। भुगतान अनुप्रयोगों को ऐसे लेनदेन पर छिपा हुआ शुल्क लगाने की अनुमति भी नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें।
त्योहारों की असली रौनक़ केवल बड़े प्रतिष्ठानों में नहीं, बल्कि फूल बेचने वालों, खिलौने सजाने वालों और फुटपाथ के छोटे कारोबारियों में भी बसती है। प्रस्तावित नियमों में विशेष छोटे व्यापारी वर्ग के अंतर्गत आने वाले उन कारोबारियों को छूट मिलेगी, जिनकी यूपीआई क्यूआर माध्यम से मासिक प्राप्तियाँ ₹1 लाख तक हैं। सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेनदेन शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। हालाँकि यह प्रतिशत लेनदेन की संख्या का है, सभी व्यापारियों की संख्या का नहीं।
प्रस्तावित शुल्क संरचना और प्रमुख छूट
| भुगतान श्रेणी | शुल्क दर | सीमा/छूट |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत हस्तांतरण | शून्य | पूरी छूट |
| छोटे व्यापारी | शून्य | पात्रता अनुसार |
| ₹2,000 तक ख़रीदारी | शून्य | पूरी छूट |
| सामान्य व्यापारी | 0.4% | अधिकतम ₹300 |
| रेल व आवश्यक सेवाएँ | नियत ₹5 | ₹2,000 से ऊपर |
| पूँजी बाज़ार | 0.02% | अधिकतम ₹300 |
| ग्राहकों पर शुल्क | शून्य | वसूली नहीं |
स्रोत: वित्त मंत्रालय की 15 सितंबर 2026 की आधिकारिक विज्ञप्ति। दरें प्रस्तावित हैं और अमल स्थगित है।
यूपीआई अब केवल भुगतान का साधन नहीं, देश की रोज़मर्रा की अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। एनपीसीआई के नवीनतम उपलब्ध मासिक आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में लगभग 2,406.84 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29.37 लाख करोड़ से अधिक रहा। इस दौरान 756 बैंक यूपीआई नेटवर्क से जुड़े थे। इतने विशाल लेनदेन तंत्र को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना भी एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।
सरकार का तर्क है कि डिजिटल भुगतान का विस्तार, तकनीकी सुधार और सुरक्षित भुगतान व्यवस्था बनाए रखने के लिए टिकाऊ वित्तीय संसाधन आवश्यक हैं। प्रस्तावित शुल्क की आमदनी सरकार के ख़ज़ाने में नहीं जाएगी, बल्कि भुगतान तंत्र की भागीदार संस्थाओं में बाँटी जाएगी। वित्त मंत्रालय ने छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने के लिए कुल शुल्क संग्रह के पाँच प्रतिशत के बराबर राशि से विशेष कोष बनाने की व्यवस्था भी बताई है।
शुल्क स्थगित होने से त्योहार के दौरान कारोबारियों को राहत मिली है, लेकिन भविष्य की चिंता बनी हुई है। व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि शुल्क लागू होने पर कम मुनाफ़े वाले कारोबारों की लागत बढ़ सकती है। दूसरी तरफ़, भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए आय का स्थायी स्रोत विकसित करने की दलील दी जा रही है। यही वजह है कि शुल्क की नई व्यवस्था में छोटे दुकानदारों के हित और डिजिटल व्यवस्था की ज़रूरतों के बीच संतुलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुकानदार अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से व्यापारी श्रेणी, प्रस्तावित शुल्क और लागू होने की नई तारीख़ की लिखित जानकारी लें। भुगतान का हिसाब और बैंक विवरण सुरक्षित रखें। ग्राहकों को भुगतान से पहले राशि जाँचनी चाहिए। यदि कोई व्यापारी भविष्य में प्रस्तावित शुल्क के नाम पर अलग राशि माँगे, तो स्पष्टीकरण माँगें और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से शिकायत करें। बिना आधिकारिक सूचना के किसी अतिरिक्त शुल्क को अनिवार्य न मानें।
दीवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, मेहनत की कमाई और छोटी-छोटी उम्मीदों का उत्सव भी है। किसी कुम्हार के लिए बिकता हुआ दीया उसके परिवार की मुस्कान है, तो किसी दुकानदार के लिए मोबाइल पर पहुँची भुगतान की सूचना दिनभर की मेहनत का फल। प्रस्तावित यूपीआई शुल्क को टालने से इस त्योहार पर कारोबारियों को कुछ राहत मिली है। अब ज़रूरत है कि भविष्य की व्यवस्था ऐसी बने, जिसमें तकनीक आगे बढ़े, छोटे व्यापारियों का भरोसा बना रहे और डिजिटल भुगतान की सहजता भी सुरक्षित रहे।
Disclaimer: दोनों तालिकाएँ संभावित शुल्क का गणित समझाती हैं, वर्तमान में वसूल किए जा रहे शुल्क का नहीं। कहानी में वर्णित दुकानदार और दृश्य साहित्यिक उदाहरण हैं, किसी वास्तविक व्यक्ति के बयान नहीं।
Updated on:
15 Oct 2026 12:36 pm
Published on:
15 Oct 2026 12:36 pm
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