
जानें गांव में पेयजल व्यवस्था के लिए कैसे करें आवेदन, PC- Chatgpt
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस मिशन का उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन पहुंचाना है, ताकि लोगों को नियमित रूप से पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल मिल सके। हालांकि, कई गांवों में लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें, किस अधिकारी से संपर्क करें और नल कनेक्शन नहीं मिलने पर शिकायत कहां दर्ज कराएं। ऐसे में ग्राम पंचायत, पानी समिति और संबंधित पेयजल विभाग की भूमिका समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी थी। इसके साथ मिशन के लिए कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय को स्वीकृति दी गई। जल जीवन मिशन 2.0 में केवल पाइपलाइन और नल कनेक्शन लगाने के बजाय पानी की नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता और दीर्घकालिक रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया है।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के संबंधित विभागों द्वारा किया जाता है। ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति, जिसे पानी समिति भी कहा जाता है, स्थानीय स्तर पर योजना बनाने, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यदि किसी गांव में सभी घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचे हैं, तो ग्रामीण सबसे पहले ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव या पानी समिति से संपर्क कर सकते हैं। ग्राम सभा की बैठक में भी पेयजल की समस्या उठाई जा सकती है। इसके बाद संबंधित विभाग उपलब्ध जल स्रोतों, पाइपलाइन और आवश्यक बुनियादी ढांचे का आकलन कर आगे की कार्रवाई करता है।
जल जीवन मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, गांव की पेयजल आवश्यकताओं के लिए ग्राम कार्य योजना यानी विलेज एक्शन प्लान तैयार किया जाता है। इसमें जल स्रोत, पानी की टंकी, पाइपलाइन, घरेलू कनेक्शन, जल संरक्षण और संचालन तथा रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया जाता है। ग्राम पंचायत या पानी समिति इस योजना को संबंधित विभागों के सहयोग से तैयार करती है।
ग्राम कार्य योजना को ग्राम सभा से मंजूरी मिलने के बाद जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के समक्ष आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जाता है। तकनीकी स्वीकृति और अन्य आवश्यक मंजूरियां संबंधित प्राधिकरणों द्वारा दी जाती हैं।
जल जीवन मिशन मुख्य रूप से गांव की पेयजल व्यवस्था विकसित करने वाला कार्यक्रम है। इसके लिए सभी राज्यों में एक जैसी व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
यदि किसी परिवार को नल कनेक्शन नहीं मिला है, तो वह ग्राम पंचायत, पानी समिति या संबंधित ग्रामीण पेयजल विभाग से संपर्क कर सकता है। परिवार के विवरण और कनेक्शन की स्थिति की जांच करानी चाहिए।
आवश्यकता होने पर लिखित प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है। इसमें आवेदक का नाम, गांव, ग्राम पंचायत, मोबाइल नंबर और समस्या का विवरण दर्ज करना उपयोगी होगा। आवेदन प्राप्त होने की रसीद या शिकायत संख्या सुरक्षित रखनी चाहिए।
जल जीवन मिशन के आधिकारिक डैशबोर्ड पर ग्रामीण पेयजल कनेक्शन की प्रगति देखी जा सकती है। इसके लिए राज्य, जिला, ब्लॉक और संबंधित गांव का चयन कर उपलब्ध आंकड़ों की जांच की जा सकती है।
डैशबोर्ड में 'रिपोर्टेड' और 'सर्टिफाइड' जैसी दो स्थितियां दिखाई जाती हैं। रिपोर्टेड का अर्थ है कि संबंधित गांव में सभी घरों तक नल से पानी पहुंचने की सूचना दर्ज की गई है। सर्टिफाइड स्थिति ग्राम सभा की निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दर्ज होती है।
यदि किसी गांव को पूरी तरह कवर बताया गया है, लेकिन घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, तो ग्रामीण संबंधित पंचायत और पेयजल विभाग के समक्ष शिकायत कर सकते हैं।
जल जीवन मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्यों की भागीदारी का प्रावधान है। समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाना है। पानी समिति गांव में पेयजल व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और स्थानीय समस्याओं के समाधान में सहयोग करती है। पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रत्येक गांव में पांच व्यक्तियों, प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं, को फील्ड टेस्टिंग किट का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।
यदि नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है, पानी दूषित है या पाइपलाइन खराब है, तो सबसे पहले ग्राम पंचायत अथवा पानी समिति को लिखित शिकायत दें। समाधान नहीं मिलने पर ब्लॉक या जिला स्तर के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अथवा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग से संपर्क किया जा सकता है। केंद्र सरकार के केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण मंच सीपीग्राम्स पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत में समस्या शुरू होने की तारीख और प्रभावित परिवारों की जानकारी देने से संबंधित अधिकारियों को जांच करने में मदद मिल सकती है।
जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पानी समितियों को पेयजल योजनाओं के संचालन में अधिक जिम्मेदारी देने पर जोर है। 'जल अर्पण' व्यवस्था के माध्यम से पूरी हो चुकी पेयजल योजनाओं को स्थानीय संस्थाओं को औपचारिक रूप से सौंपने की पहल भी की गई है।
ग्रामीणों को ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेकर जलापूर्ति, पानी की गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। नियमित निगरानी और समय पर शिकायत करने से गांव की पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
Updated on:
3 Nov 2026, 4:27 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 4:27 PM IST
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